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Monday, 13 February 2012

बागेश्वर में बरसा प्रशासन का डंडा

बागेश्वर में बरसा प्रशासन का डंडा

लेखक : नैनीताल समाचार :: :: वर्ष :: : January 19, 2012  पर प्रकाशित
घनश्याम विद्रोही
bageshwar-reema-khadiya-minesप्रशासन का डंडा कैसा होता है, यह यहाँ के वासिंदों को पहली बार चला। आम आदमी को छोड़ यदि दूसरे नजरिए से देखें तो यह डंडा चलना भी जरूरी था। प्रशासन का कहर जहाँ अतिक्रमणकारियों पर टूटा, वहीं सालों से सरकार को करोड़ों के राजस्व का घाटा पहुँचा रहे खनन माफियाओं पर भी। ऐसे में जिला प्रशासन के कार्यों की यदि सराहना की जाये तो अतिश्योक्ति नहीं। अलबत्ता महिलाओं ने इन नेक कार्यों के लिए जरूर प्रशासन की पीठ थपथपाई है।
डीएम दीपक रावत, एसडीएम श्रीश कुमार तथा खान अधिकारी राजपाल लेघा की कार्यवाही को शायद ही खनन माफिया कभी भूला पाएंगे। वहीं अतिक्रमण कर सड़कों को अस्त-व्यस्त रखने वालों को भी प्रशासन के डंडे की याद आती रहेगी। जिला प्रशासन ने नगर में अतिक्रमण हटाने के साथ ही होटलों में शराब पीने वालों पर भी लगाम लगाई। पंजीकृत शराब की दुकान के साथ बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे रेस्टोरेंट को भी बंद कराया। इस मामले में प्रशासन को शराब माफियाओं की भी सुननी पड़ी। एसडीएम ने साहस का कार्य किया। दुकानों में छापेमारी कर, खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए, जिस पर खूब हल्ला भी हुआ, लेकिन प्रशासन ने आम उपभोक्ता की मदद की। झोलाछाप डाक्टरों की भी खैर ली गई जिसमें आधा दर्जन से अधिक दुकानें बंद चल रही हैं। नगर की सफाई व्यवस्था, रसोई गैस वितरण तथा पानी की सुचारू व्यवस्था भी तहसील प्रशासन ने पहली बार अपने हाथों पर ली है। जिले में जनप्रतिनिधियों की खानें होने के बावजूद भी छापेमारी हुई और करीब बीस हजार बैग खडि़या जब्त की गई। दो खडि़या खानें अवैध रूप से चल रही थी, उन्हें सीज किया गया। इस तरह की कार्यवाही होने के बाद अन्य पट्टाधारकों ने खान से संबंधित दस्तावेज, उपकरण आदि जुटाने भी शुरू कर दिए।
इतना ही नहीं उत्तर भारत हाइड्रोपावर कंपनी ने कपकोट के लोगों का जीना हराम किया था। उनके हक-हकूकों को लूटकर उन्हें न्यायालय के चक्कर तक कटावा दिए। अखबार वालों को भी यहाँ से धमकी मिलती रही, यदि उनके खिलाफ एक शब्द भी लिखा तो न्यायालय के चक्कर कटावा दिए जाएंगे। उत्तर भारत हाइड्रोपावर कंपनी के महाप्रबंधक तो कपकोट से लेकर सेराघाट तक सरयू को अपनी बताने लगे और बिना अनुमति के दो साल से क्रेसर चला रहे थे, जिससे करोड़ों के राजस्व का नुकसान सरकार को हुआ। गत दिनों एसडीएम सदर श्रीश कुमार तथा खान अधिकारी ने क्रेशर समेत पाँच करोड़ रूपये की संपत्ति सीज कर दी, जिस पर महाप्रबंधक तिलमिला गए। ग्रामीणों ने इस कार्यवाही को उचित करार दिया। सौंग आंदोलन के अगुवा मोहन सिंह टाकुली कहते हैं कि कपकोट में जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण, घातक साबित होगा, जिसका लक्षण गत वर्ष सुमगढ़ हादसा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों ने 18 मासूमों की मौत के बाद भी सबक नहीं लिया है। उत्तर भारत ने कपकोट की प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया है, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ेगा।
प्रशासन ने करीब तीस सालों से अल्मोड़ा मैग्नेसाइट नाम से झिरौली में चल रही कंपनी की भी खैर ली। वहाँ भी अवैध क्रेसर चल रहा था। खान अधिकारी के अनुसार तीन करोड़ की संपत्ति सीज की है। एसडीएम तथा खान अधिकारी ने जिले में हो रहे अवैध खनन की जाँच के लिए टीम गठित करने की आज्ञा भी डीएम से मांगी है। यदि उन्हें आज्ञा मिल गई तो कई नए खुलासे आने वाले दिनों में होंगे। अलबत्ता जिला प्रशासन के कामों पर जिला वासियों को नाज है। इधर डीएम दीपक रावत ने कहा कि अवैध रूप से धरती तथा हिमालय के साथ छेड़छाड़ कर रहे लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा तथा अभियान को और तेज किया जाएगा।