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Tuesday, 23 September 2014

धर्मावतार का फलाहार प्रवासी मीडिया का यह धर्मोन्मादी जनविरोधी तेवर मुक्त बाजार का सबसे बड़ा अभिशाप

धर्मावतार का फलाहार प्रवासी
मीडिया का यह धर्मोन्मादी जनविरोधी तेवर मुक्त बाजार का सबसे बड़ा अभिशाप
पलाश विश्वास
आज राष्ट्रीय मीडिया पर ब्रेकिंग न्यूज है कि कैसे अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान भारत के प्रधानमंत्री कैसे नवरात्र मनायेंगे और किसतरह विशुद्ध शाकाहारी धर्मावतार में फलाहार पर वे अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मुक्त बाजार भारत का डिजिटल बुलेट कायाकल्प करेंगे।मेड इन इंडिया का कायाकल्प मेक इन कर गुजरेंगेऔर बाकी सारे सुदारों को किसी खूबी से अंजाम देंगे।पन्ने दर पन्ने रंगे जारहे हैं।

चौबीसों घंटे लाइव।एकाध पन्ना जनता के लिए भी छोड़ो।

एकाध घंटा जनता की भी फिक्र कर लो भइये।
मुखपन्ने पर बन्नू को रहने दो बहाल,स्क्रालिंग पर बताओ हमारा हाल।

प्रधानमंत्री के डांडिया रिहर्सल पर अभी कोई खबर नहीं बनी है क्योंकि शायद अमेरिका से सीधे उस कार्यक्रम का लाइव प्रासारण होना है।

वीजा की फिलहाल कोई समस्या नहीं है तो टीआरपी बढ़ाने के लिए सिनेमायी गाशिप फार्मेट अपनाता मीडिया तो टीआरपी में और इजाफा होता।चाहे तो कपिल शर्मा के वहां प्रोमो डलते या बिग बास में ही धर्मावतार का आसन जमा देते।

मीडिया युद्ध क्या होता है,किसी भी महानगर,नगर और गांव तक की फिजां को सूंघ कर बताया जा सकता है।

मीडिया युद्ध का बार बार यूपी से वास्ता पड़ा है,गाय पट्टी गोबर प्रदेस वगैरह वगैरह बदनामियों के बावजूद जहां मुख्यमंत्री एक बंगालिन रही हैं साठ के दशक में और कमलापति त्रिपाठी तक हुए तमाम मुख्यमंत्रियों की पहचान राष्ट्रीय हुआ करती थी।

देश को एक के बाद एक प्रधानमंत्री देने के बावजूद जो खुद पिछड़ा रहा,लेकिन बाकी देश को संसाधनों के बंटवारे में जिसने चूं तक नहीं की।रेल मंत्री बनकर किसी यूपी वाले ने यूपीरेल नहीं बनाया। बिहार रेल बंगाल रेल की तरह।

यूपी आज भी अस्मिताओं के गृहयुद्ध में घिरे होने के बावजूद वाराणसी के गंगाघाट की तरह किसी भी मुष्य के स्वागत में पलक पांवड़े बिछा सकता है ।

गनीमत है कि यूपी वाले अपने को मराठी बंगाली गुजराती उत्तराखंडी पंजाबी तामिल की तरह  यपीअइया नहीं कहते अब भी।

उस यूपी को आग में शिक कबाब बना देने की कोई कसर नहीं छोड़ी मीडिया ने।

मीडिया क्या कुछ कर सकता है,पिछले चुनावों में जनमतशून्य जनादेशों के निर्माण में उसकी निर्णायक भूमिका के मद्देनजर खुलासा करने की शायद जरुरत नहीं है।

मीडिया कारपोरेट मार्केटिंग बतौर बाजार का विस्तार ही नहीं कर रहा है,धर्मोन्माद का युद्धक कारोबार कर रहा है।

भारत में मीडिया उसीतरह युद्ध गृहयुद्ध कारोबार कर रहा है जैसे अमेरिका की युद्धक अर्थव्यवस्था वैश्विक इशारों के बहाने दुनियाभर में करती है।

गनीमत है कि मीडिया अब भी मुकम्मल अमेरिका बन नहीं सका है वरना वह सीधे कारपोरेट देशी विदेशी कंपनियों के हित में जब जाहे तब भारत पाकिस्तान,भारत चीन, भारत नेपाल,भारत बांग्लादेश युद्ध शुरु करवा देता।

लेकिन कौन माई का लाल उस एफडीआईखोर  महाबलि जनता को आत्मघाती अस्मिता धर्मोन्मादी गृहयुद्ध में जनता को उलझाने से रोक सकता है,हमें नहीं मालूम।

मीडिया का ही कमाल है जैसे बंगाल बाजार की शक्तियों के हवाले है वैसे ही पूरे देश में देश बेचो पीपीपी है।

यही परिवर्तन है जिसके तहत जनता का धरमन्मादी ध्रूवीकरण हो जाये।उस महान संघ परिवारी कार्यभार को पूरी निष्ठा के साथ अंजाम दे रहा है मीडिया।

बंगाल में हर अखबार का सच अलग है,एक के मुकाबले दूसरे का उलट।हर चैनल का सत्यमेव जयते सत्तापक्ष का सच है।

सबसे बड़ा धमाका तो अब हुआ है कि राष्ट्रीय मीडिया ने कोलकाता में भारी वर्षा में भीगते करीब एक लाख छात्रों के महाजुलूस को राष्ट्रीय बनने नहीं दिया,उसके बारे में यह अभिनव सच का खुलासा कर रहा सत्तापक्ष ममता बतीजा सांसद अभिषेक बनर्जी के फेसबुकवाल  हवाले कि उस महाजुलूस में शामिल हर छात्र छात्रा को शराब गांजा हेरोइन के नशे में सड़क पर उतारा गया था।उन्हे नकद भुगतान भी किया सीपीएम और भाजपा ने।जबकि जुलूस का नारा था बुलंग,इतिहासेर भूल सीपीएम तृणमूल।

अब मीडिया का सच यह भी है कि जादवपुर के वीडियो फुटेज और छात्रों के एतकताबद्द अविराम अक्लांत आंदोलन के फुटेज के सच को भले ही झुठला दें वह,मां माटी मानुष के इस छात्र आंदोलन के खिलाफ दिया जा रहा हर प्रवचन वाक्य युधिष्ठिर सुवचन सत्य है और आंदोलनकारी छात्रों को सबक सिखाने के लिए सिनेमा सितारों की चकाचौंध और विद्वतजनों की सुर तालबद्ध संगत में जिन बाहुबली छात्रों को दीदी सड़क पर उतार रही है,वे भले ही दिवंगत जेपी की जीप के बोनट पर खड़े होकर पेशाब कर दें,गांधी की लंगोट वे तमाम लोग न सिर्फ नशामुक्त हैं बल्कि फलाहार पर हैं।

यह फलाहारी वृत्त चप्पल चाट का जायका है स्वादिष्ट इलिशिया।

हम जब नैनीताल डीएसबी कालेज में पढ़ते थे सात के दशक में,तब लखनऊ और दिल्ली तो क्या बरेली से छपने वाले अखबारों के लिए भी दोपहर तक इंतजार करना पड़ता था और पहाड़ों की बड़ी से बड़ी खबर चंद पंक्तियों में निपटा दी जाती थी।

तराई की तो खबर छापने के लिए कलेजा चाहिए था,खबरची की कभी भी शामत तय थी।उसका मारा जाना तय था।सत्तर के दशक में मेरे इलाके में मैं तड़ीपार था पत्रकारिता की खातिर।

उसवक्त पूरा उत्तराखंड एकजुट था।पहाड़ और तराई एक दूसरे से नत्थी थे।

देवभूमि होने के बावजूद तब पहाड़ों में धर्मोन्माद न था।

आस्था और सांप्रदायिकता पर्यायवाची शब्द न थे।

हम बचपन से रोजाना बंगाल के बंगाली  अखबार पढ़ते रहे हैं।जैसे हिंदी और अंग्रेजी के अखबार।मेरे पिता अपढ़ थे लेकिन कोई भी भारतीय भाषा अबूझ नहीं थी उनके लिए।

वे यायावरी तरीके से देशाटन नहीं करते थे,जनता की लड़ाइयों में अपनी सक्रिय हिस्सेदारी के लिए देश के खेतों खलिहानों,नदियों पहाड़ों जगलों में जनता के बीच अलख जगाते थे और उन्हें एक दूसरे से जोड़ते थे।

जब भी वे घर लौट आते थे,उनके साथ जिस राज्य से वे आये हों,वहां के तमाम अखबार वहां की भाषा में होते थे और वे अपेक्षा रखते थे कि मैं उन्हें बांच लूं।

मराठी गुजराती उड़िया गुरमुखी तामिल तेलुगु वगैरह वगैरह के अखबार बंसतीपुर में ही हम देखते रहते थे।भले ही पढ़ न पाते हों।तस्वीरे देश की तस्वीरें थीं।

उन अखबारों में भारत एक अखंड देश हुआ करता था ।बहुलता के बावजूद आस्था और पहचान,संस्कृति और भाषा की भिन्नताओं के बावजूद एक सूत्र में पिरोया हुआ देश।

लता मंगेशकर के ऐ मेरे वतन के लोगों गीत सिर्फ शब्द भर नहीं थे।वे प्रधानमंत्री से लेकर आम लोगों की भावनाओं को ध्वनि सुर ताल लय में बांधने का चरमोत्कर्ष है तो आधुनिक संगीतकारों के वंदेमातरम से लेक जय हो में वैज्ञानिक चमत्कार की चकाचौंध चाहे जितने प्रलयंकर हों,राष्ट्रवाद का वह स्थाईभाव नहीं है और उसी तरह,उस बुनियादी फर्क की तरह,जिसे आज सूचना तकनीक के सौजन्य से हम मान रहे हैं राष्ट्रवाद,वह दरअसल धर्मोन्माद है।

फलाहार इसीलिए बड़ा समाचार है क्योंकि उससे धर्मावतार को केंद्रित धर्मोन्माद को अश्वमेधी जनसंहार का थीमसांग बनाया जा सकें।

सूचना प्राद्योगिकी आने से पहले गायत्री मंत्र सुनने वाले लोग इस देश में कितने रहे होंगे,इसकी गणना की जा सकती थी।

अब तो लग रहा है कि भारत में कम से कम सूचना महाविस्फोट का एकमेव एजंडा धर्मोन्मादी परमाणु विस्फोरण है।

जैसे तमाम अकादमी,विश्वविद्यालय और विद्वतजन रोज नयी नयी अस्मिता और नये नये अवतार पैदा कर रहे हैं,मीडिया का पूरा फोकस इन अस्मिताओं को धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे एक दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया जाये।

मीडिया का यह धर्मोन्मादी जनविरोधी तेवर मुक्त बाजार सबसे बड़ा अभिशाप है।

कई दिनों से महाराष्ट्र को शाही फोकस में रखा गया है।
कश्मीर बाढ़ अब बिलावल भुट्टो हैं।
अपने तरफ के लाखोंलाख  बावला बिलावल के दावे और उनके भड़काये युद्धोन्मादी धर्मोन्मादी अंध राष्ट्रवाद पर किसी प्रबुद्ध मतिमंद को लेकिन शर्म नहीं आती।

भारत चीन सीमा विवाद का मसला भी काफुर है।
त्योहारी बाजार है।
धन लक्ष्मी की लाटरी खुल रही हैकई दिनों से महाराष्ट्र को शाही फोकस में रखा गया है।
कश्मीर बाढ़ अब बिलावल भुट्टो हैं।

अपने तरफ के लाखोंलाख  बावला बिलावल के दावे और उनके भड़काये युद्धोन्मादी धर्मोन्मादी अंध राष्ट्रवाद पर किसी प्रबुद्ध मतिमंद को लेकिन शर्म नहीं आती।

तमाम ज्योतिष केंद्रे भाग्य बांच रहे हैं मीडियकर्मी और फिलहाल यूपी को बख्शे हुए हैं,लेकिन समाजवादियों को बेदखल किये बिना अश्वमेध थमेगा ,इसके आसार नहीं हैं।

सारे अखबार चैनल महाराष्ट्र में जनादेश बनाने के लिए सत्ता समीकऱ बनाने बिगाड़ने के खेल में डंडा लेकर दौड़ पड़े हैं कि सामने जो मिले पहले उसका सिर फोड़ दें।

কামদুনি হচ্ছে না,না না না পাশে আছি যাদবপুর

কামদুনি হচ্ছে না,না না না

পাশে আছি যাদবপুর
কলরব থামছে না,আন্দোলন থামছে না,সারা বিশ্বজুড়ে প্রতিবাদ এবার
আবার মহামিছিলের আয়োজন,মদ গাঁজা তত্বে ক্ষমতার কেরামতি শেষ
শাসকের মিছিলে রুদ্ধ হবে না গণসঙ্গীত বিদ্রোহের,অন্যায় প্রতিরোধ
রাজনীতির ঐ লৌহ প্রাচীর ভাঙ
ভাঙ রে বেটি
ভাঙ রে বেটা ভাঙ

পলাশ বিশ্বাস
রাজনীতির ঐ লৌহ প্রাচীর ভাঙ
ভাঙ রে বেটি
ভাঙ রে বেটা ভাঙ

পাশে আছি যাদবপুর

কলরব থামছে না,আন্দোলন থামছে না,সারা বিশ্বজুড়ে প্রতিবাদ এবার

আবার মহামিছিলের আয়োজন,মদ গাঁজা তত্বে ক্ষমতার কেরামতি শেষ

শাসকের মিছিলে রুদ্ধ হবে না গণসঙ্গীত বিদ্রোহের,অন্যায় প্রতিরোধ

ফেসবুক সংলাপ আবহ প্রস্তুতিতে অবরুদ্ধ জ্বালামুখি এই বঙ্গ বহুত দিন বাদ বাংলার কন্ঠে সেই বিদ্রোহী সংলাপঃ

মাননীয় উপাচার্য, সম্বোধনটা কি ঠিক করলাম? না করলে নিজ গুণে ক্ষমা করে দেবেন । আসলে আপনি সব সৌজন্য, মনুষ্যত্ব হারিয়ে ... কিন্তু যে আঘাত যাদবপুরবিশ্ববিদ্যালয়ের ছাত্রছাত্রীদের উপর নেমে এসেছিল, সেই আঘাত আহত করেছে আমাকেও, আমাদের সকলকে, সারা বাংলার সব ছাত্রছাত্রীকে ।

পাশে আছি যাদবপুর... We're on to victory, We're on to victory, We're on to victory someday; Oh, deep in my heart, I do believe, We're on to victory someday. We'll walk hand in hand, we'll walk hand in hand, We'll walk hand in hand someday; Oh, deep in my heart, I do believe, We'll walk hand in hand someday. We are not …

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না

সারা বিশ্বের একশো শহরে দেশে বিদেশে একযোগে প্রতিবাদ
ছাত্র আন্দোলনের পথেই সমাজ বাস্তবের আগুন আজ দাবানল
মুন্না ভাই লগে রহো,গোলাপের পাহাড় জমছে উপাচার্যের ঘরে
সহিংস নয়,অহিংস এই আন্দোলন,এই গণ প্রতিবাদ, যার রাজনৈতিক কোনো রং নেই,তবু রাজনৈতিক চুনকামে পিঠ বাঁচাবার প্রচেষ্টাযশাসকের কুত্সা প্রচারে আরো আরো ইন্ধন

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না

নির্যতিতার বাবা শিক্ষা মন্ত্রী ও ছাত্র পরিষদ নেতার আশ্বাসনে
নরম হয়েছেন,বলেছেন উপাচার্যের ইস্তীফা চাই না,কিন্তু গণকনভেনশন হবে যাদবপুরে আবার
যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না

দেখা যাক কোথায় কোথায় আলো নিভিয়ে হয় তান্ডব আযোজন
দেখা যাক, আরো কত নন্দিনীর হতে পারে শ্লীলতা হানি

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি নয়

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না

গ্রেপ্তার ছাত্র ছাত্রীদের বিরুদ্ধে অভিযোগ প্রত্যাহারে উপাচার্যের ক্ষমা নেই,বুঝিয়ে দিচ্ছে যাদবপুর,তাঁকে সুস্থ হতেই হবে,তাই ফুল দিয়ের তাঁর  সুস্থতার শুভেচ্ছা,সুস্থ হয়ে বিশ্ববিদ্যালয়ে আসুন ক্ষমাহীন অপরাধের জন্য পদত্যাগ করুন

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না

তদন্তের জন্য সরকার কমিটি গড়ছেন,বেশ,ভালো কথা

নৃসিংহপ্রসাদ ভাদুড়ীর মত সম্মানীয়রা সেই সমিতিতে আছেন,ভালো কথা
শিক্ষা মন্ত্রী বলছেন,যেহেতু আগস্ট  মাসে নির্যাতিতার পরিবার মুখ্যমন্ত্রীকে অনুরোধ করেছেন,তাই স্বতন্ত্র তদন্ত কমেটি,ছাত্র আন্দোলনের সঙ্গে যোগাযোগ নেই,তারপর ছাত্র আন্দোলনের বিরুদ্ধ শাসকের মহামিছিল আযোজন,যা শেষ অবধি ফতোয়া জারি করার পরও শুধু শাসকের মিছিল থেকে গেল,কিনা শিক্ষা ক্ষেত্রে নৈরাজ্যের প্রতিবাদে

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না

মানে পুলিশ ডাকিয়ে লাঠি পেটা আর শ্লীলতাহানির জন্য কোনও অনুশোচনা নেই কারও,যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের জন্য অনুশোচনা নেই কারো,একজন নিগৃহিতার জন্য ন্যায় দাবি করে যে নন্দিনীরা নিগৃহিতা হলেন,তাঁদের ন্যায় দিতে সরাসরি অস্বীকার শাসক যাদবপুরকে কামদুনি করতে চাইছে

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না
মহামিছিলে যারা বোঝেন নি,তাঁরা গণ কনভেনসানে বুঝবেন

যারা অন্ধ তাঁরা আবার দৃষ্টিপাতে অস্বীকার করবেন,কিন্তু এবার মহামিছিল লালবাজারে যাবে,হয়ত শেষ পর্যন্ত মহামিচিলের গন্তব্য নবান্ন হবে

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না

পিসির মতই সাংসদ ভাইপো লিখচছেন কবিতা,তাও বেশ ভালো
বই বেরোলে পুজোয় পিসির মতই বিকোবে ভালো

কবিতার কি ছিরি,অন্ত্যমিল তবু চমত্কার

মদ গাঁজা ভাঙ্গ বন্ধ
তাই আন্দোলনের গন্ধ

মানেটা কি দাঁড়ালো

যারা বৃষ্টিতে ভিজেছিল
তাঁরা সব্বাই মাতাল

আমাদের ঘরের ছেলে মেয়েরা
জনে জনে মাতাল

মাতলামি যদি হয় এই কলরব
হোক কলরব হোক কলরব

যারা বৃষ্টিতে ভিজেছিল
তাঁরা সব্বাই গাঁজাখোর

জানা নাই বুঝি
গাঁজা না হলে গাজন হয় না

গাজনের অতি প্রয়োজন আজ
হোক কলরব কলরব হোক

মনাে যারা বৃষ্টিতে ভিজেছিল
তাঁরা খেয়েছিল ভাঙ্গ

ভাঙ্গ খেয়েই ওরা বৃষ্টিতে
ভিজেছিল জলমগ্ন রাজপথে

শাসকের অহন্কার ভাঙ্গতে
যদি ওরা খেয়ে থাকে ভাঙ্গ

তবে আনো রাজ্যের ভাঙ্গ
জনে জনে খাক সেই ভাঙ্গ

প্রতিবাদে

বিশ্বজুড়ে

ভাঙ্গের আসর বসবে এবার

নেশা হবে প্রতিবাদ

গাজাখোর সব নেমে
হবে প্রতিবাদ
প্রতিবাদ

অন্যায়ের এই মগের মুল্লুকে  
যত পারিস খেয়ে নে ভাঙ্গ

প্রতিবাদে ঐ পাষাণপুরি ভাঙ
বইছে প্রাণের গাঙ্গ

রাজনীতির ঐ লৌহ প্রাটীর ভাঙ
ভাঙ রে বেটি
ভাঙ রে বেটা ভাঙ

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না

যাদবপুর কিন্তু কামদুনি হচ্ছে না

মৌসুমী সরকার লিখেছেন খবর ইমেজ কোলকাতায়
চূড়ান্ত আন্দোলনের পঞ্চম দিনে কতকটা ‘রাবড়ি প্রসেস’ নিল যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয় কর্তৃপক্ষ, শাসক দল ও সরকার। রাবড়ি প্রস্তুতিতে যেভাবে নিচে থেকে আঁচ দিয়ে উপরের পাখার বাতাস দিতে হয় ঠিক সেভাবেই নরমে–গরমে ছাত্রদের আন্দোলনকে বাগে আনতে উদ্যোগ নিতে দেখা গেল। ইঙ্গিতটা অবশ্য পাওয়া গিয়েছিল চতুর্থ দিনেই। সেদিন মুখ্যমন্ত্রীর নির্দেশে শিক্ষামন্ত্রী পার্থ চট্টোপাধ্যায় ও তৃণমূল ছাত্র পরিষদের রাজ্য সভাপতি শঙ্কুদেব পণ্ডা পৌঁছে গিয়েছিলেন নির্যাতিতার সল্টলেকের বাড়িতে। শিক্ষামন্ত্রী আশ্বাস দিয়েছিলেন নিরপেক্ষ তদন্ত কমিটি গঠন করা হবে। সেই মতো আজ সকালেই ৫ সদস্যের তদন্ত কমিটির নামধাম ঘোষণা করেন শিক্ষামন্ত্রী। পাশাপাশি ছাত্রীর বাবাকে নবান্নে ডেকে পাঠান মুখ্যমন্ত্রী। তবে ৪৮ ঘন্টা আগের অবস্থান থেকে একেবারে ঘুরে গেলেন তিনি। নবান্ন ঘুরে এসে নিজের অবস্থান থেকে কার্যত ইউ টার্ন নিলেন নির্যাতিতার বাবা। এদিন টিএমসিপির পালটা মিছিলের পাশাপাশি অবস্থান বিক্ষোভে সামিল হয়ে তিনি জানান, মুখ্যমন্ত্রীর আশ্বাসে তিনি মুগ্ধ। সুতরাং ছাত্রছাত্রীদের এই অবস্থান বিক্ষোভের কোনও দরকার নেই। তাঁরা যেন আন্দোলনের পথ ছেড়ে পঠনপাঠনে মন দেয়।
একদিকে যখন এভাবেই ছাত্রছাত্রীদের ক্ষোভ প্রশমণের একটি সূক্ষ্ম চেষ্টা লক্ষ্য করা যাচ্ছিল তখনই আন্দোলনরত ছাত্রছাত্রীরা বিশ্ববিদ্যালয়ে ঢুকে দেখলেন তাঁদের লাগানো পোস্টার ছিঁড়ে ফেলা হয়েছে, মুছে দেওয়া হয়েছে দেওয়াল লিখন। জানলেন উপাচার্যর বাড়ির লিফলেটকাণ্ড তদন্তে অভিজিৎ চক্রবর্তীর বাড়িতে পৌঁছেছে বিধাননগর থানার পুলিশ। এর সঙ্গে সঙ্গেই পূর্ব ঘোষিত পালটা মিছিল ও রাজভবন অভিযান তো ছিলই। সেই মিছিল যখন রাজভবনমুখী তখন হঠাৎই, খুব আকস্মিকভাবে বিশ্ববিদ্যালয় কর্তৃপক্ষ সন্ধির সাদা পতাকা ওড়ালেন। রেজিস্ট্রার প্রবীর ঘোষ জানালেন, ১৭ তারিখের রাতের ঘটনায় যে ৩৭ জন ছাত্রছাত্রীর বিরুদ্ধে অভিযোগ জমা পড়েছিল তা প্রত্যাহার করে নেওয়া হবে। পাশাপাশি আহত ছাত্রছাত্রীদের চিকিৎসার খরচ বহন করবে বিশ্ববিদ্যালয় কর্তৃপক্ষ। একইসঙ্গে প্রবীর বাবু ছাত্রছাত্রীদের কাছে আবেদন রাখলেন অনতিবিলম্বের তাঁরা যেন পঠনপাঠনে যোগ দেন।
একদিকে নরমপন্থা ইন্যদিকে চরমপন্থা, এর মাঝে দাঁড়িয়েও আন্দোলনকারী ছাত্রছাত্রীরা নিজেদের সিদ্ধান্তে অনড়। তাঁদের দাবিও সেই একই, অবিলম্বে পদত্যাগ করতে হবে উপাচার্যকে। একইসঙ্গে তাঁরা জানালেন, তাঁদের পরবর্তী কর্মসূচি। সেই কর্মসূচির মধ্যে একদিকে যেমন রয়েছে সোমবার বিকেলের ভিডিও কনফারেন্স, অন্যদিকে রয়েছে বুধবার নাগরিক কনভেনশন ও বৃহস্পতিবারের লালবাজার অভিযান। এছাড়াও বৃহস্পতিবারই ১০০ দেশে সংগঠিত হবে প্রতিবাদ মিছিল। প্রসঙ্গত, সোমবার সাংবাদিক বৈঠক করে শিক্ষামন্ত্রী পার্থ চট্টোপাধ্যায় জানান, ছাত্রছাত্রীদের দাবি অনুযায়ী মুখ্যমন্ত্রীর নির্দেশেই ৫ সদস্যের তদন্ত কমিটি গঠন করা হয়েছে। কিন্তু শিক্ষা দফতরের গঠিত এই তদন্ত কমিটিকে দিয়েও নিরপেক্ষ তদন্ত সম্ভব নয় বলে জানিয়েছেন আন্দোলনকারীরা। অপরদিকে এদিনই বিশ্ববিদ্যালয়ের রেজিস্ট্রার প্রবীর ঘোষ বিক্ষোভরত ছাত্রছাত্রীদের আলোচনায় বসার আহ্বান জানিয়েছেন। আন্দোলনকারীদের মতে, চাপে পড়েই অবশেষে আলোচনার সিদ্ধান্ত নিয়েছে বিশ্ববিদ্যালয় কর্তৃপক্ষ। ছাত্রছাত্রীরা এটিকে তাঁদের কিছুটা হলেও নৈতিক জয় বলে মনে করছেন।

গত কাল আজকালের প্রতিবেদন: যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের ছাত্রী শ্লীলতাহানির ঘটনায় নিরপেক্ষ তদম্তের সিদ্ধাম্ত নিল রাজ্য সরকার৷‌ মুখ্যমন্ত্রী মমতা ব্যানার্জির নির্দেশে একটি নিরপেক্ষ তদম্ত কমিটি গড়া হবে বলে রবিবার শিক্ষামন্ত্রী পার্থ চ্যাটার্জি জানিয়েছেন৷‌ আজ, সোমবার তিন বা চার সদস্যের এই তদম্ত কমিটি ঘোষণা করা হবে৷‌ যত তাড়াতাড়ি, সম্ভব হলে ৭২ ঘণ্টার মধ্যে শিক্ষা দপ্তরের কাছে এই রিপোর্ট জমা দেওয়ার জন্য সদস্যদের কাছে অনুরোধ করা হবে৷‌ পার্থবাবু এদিন নির্যাতিতা ওই ছাত্রীর বাড়ি যান৷‌ সঙ্গে ছিলেন তৃণমূল ছাত্র পরিষদের সভাপতি শঙ্কুদেব পন্ডা৷‌ সেখান থেকে শিক্ষামন্ত্রী যান রাজভবনে৷‌ সেখানে প্রায় এক ঘণ্টা রাজ্যপাল কেশরীনাথ ত্রিপাঠীর সঙ্গে বৈঠক করেন৷‌ পরে তিনি সাংবাদিকদের প্রশ্নের জবাবে জানান, ওই ছাত্রী এবং তাঁর পরিবার নিরপেক্ষ তদম্তের দাবি জানিয়ে আসছিল৷‌ মুখ্যমন্ত্রী নিজেই এই ধরনের তদম্তের জন্য বলেছেন৷‌ তাঁরই কথা মতো তদম্ত কমিটি গঠন করছে শিক্ষা দপ্তর৷‌ তদম্তের রিপোর্ট হাতে পাওয়ার পরই রাজ্য সরকার প্রয়োজনীয় ব্যবস্হা নেবে৷‌ তবে যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয় কর্তৃপক্ষ আলাদা ভাবে যে তদম্ত করছে, সেটা তারা চালিয়ে যেতে পারে৷‌ এদিন দুপুরে নিগৃহীতা ওই ছাত্রীর বাড়িতে যান শিক্ষামন্ত্রী৷‌ ছাত্রীটির পরিবারের সদস্যদের সঙ্গে বেশ কিছুক্ষণ কথা বলেন এবং দোষীদের শাস্তির আশ্বাস দেন৷‌ পরে ছাত্রীটির বাবা বলেন, শিক্ষামন্ত্রী দোষীদের শাস্তির আশ্বাস দিয়েছেন৷‌ রাজ্যপালের সঙ্গে দেখা করতে যাচ্ছিলেন তিনি৷‌ তার মাঝে আমাদের বাড়িতে এসেছিলেন৷‌ ২৫ মিনিট কথা হয়৷‌ ছাত্রীর বাবা জানান, দোষীদের শাস্তি চাই৷‌ মেয়ের জন্য আন্দোলন হচ্ছে৷‌ দোষীদের শাস্তির দাবিতে আন্দোলনে পাশে আছি৷‌ এদিকে যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের প্রতিবাদী ছাত্ররা প্রশ্ন তুলেছেন ছাত্রীর বাড়িতে শিক্ষামন্ত্রীর সঙ্গে তৃণমূল ছাত্র পরিষদের রাজ্য সভাপতির যাওয়া নিয়ে৷‌ তাঁদের বক্তব্য, শিক্ষামন্ত্রী ওই ছাত্রীর বাড়িতে যেতেই পারেন৷‌ কিন্তু ‘বহিরাগত’ শঙ্কুদেব পন্ডা কেন? যাদবপুরের পঠন-পাঠন স্বাভাবিক করা নিয়ে রাজ্যপালের সঙ্গে তাঁর কথা হয়েছে বলে জানা গেছে৷‌ বৃহস্পতিবারও রাজ্যপাল-শিক্ষামন্ত্রীর বৈঠক হয়৷‌ আচার্য দ্রুত সমস্যা মিটিয়ে ফেলার পরামর্শ দেন পার্থবাবুকে৷‌ এদিকে এদিন যাদবপুর-কাণ্ডের প্রতিবাদে রাস্তায় নামলেন বিভিন্ন বিশ্ববিদ্যালয়ের অধ্যাপক, প্রাক্তন উপাচার্য, শিক্ষক ও শিক্ষাকর্মীরাও৷‌ ওয়েবকুটার ডাকে প্রতিবাদ মিছিলে সামিল হয়েছিলেন অন্যান্য বিশ্ববিদ্যালয়ের অধ্যাপক ও প্রাক্তন উপাচার্যরা৷‌ ভিনরাজ্য থেকে আসা কয়েকজন অধ্যাপককেও এদিন এই প্রতিবাদ মিছিলে পা মেলাতে দেখা গেছে৷‌ একজন উপাচার্যের বিরুদ্ধে এদিন অন্য উপাচার্য ও অধ্যাপকদের রাস্তায় নেমে প্রতিবাদে গর্জে উঠতে দেখলেন যাদবপুরের মানুষ৷‌ রবিবার বিকেল ৪টে নাগাদ ঢাকুরিয়ার দক্ষিণাপণের সামনে থেকে এই মিছিল শুরু হয়৷‌ মিছিলের সামনের সারিতে ছিলেন বিশ্ববিদ্যালয়ের প্রাক্তন উপাচার্য অশোকনাথ বসু, ছিলেন বিদ্যাসাগর বিশ্ববিদ্যালয়ের প্রাক্তন উপাচার্য আনন্দদেব মুখোপাধ্যায়, ওয়েবকুটার নেতা শ্রুতিনাথ প্রহরাজ, হরিয়ানা বিশ্ববিদ্যালয়ের অধ্যাপক ইকবাল সিং সিন্ধু প্রমুখ৷‌ যাদবপুরের ৮বি বাস স্ট্যান্ডে মিছিল শেষ হওয়ার পর অংশগ্রহণকারীরা সেখানে একটা সভা করেন৷‌ সভায় অধ্যাপক ও প্রাক্তন উপাচার্যরা তাঁদের ক্ষোভ উগরে দেন৷‌

উপাচার্যকে গোলাপ

এদিন যাদবপুর সংহতি মঞ্চের তরফ থেকে একদল ছাত্র প্রতিনিধি উপাচার্য অভিজিৎ চক্রবর্তীর সল্টলেকের বাড়িতে যান৷‌ ঘটনার সুবিচার চেয়ে তাঁরা অভিনব প্রতিবাদ করেন৷‌ উপাচার্যের দ্রুত আরোগ্য কামনা করে একটি চিঠি এবং ৪০টি গোলাপ ফুল দিয়ে তৈরি একটা ফুলের তোড়া তাঁর বাড়িতে দিয়ে আসেন৷‌ তাঁরা জানান, ৩৭ জন পড়ুয়া গ্রেপ্তার এবং ৩ জন ছাত্র হাসপাতালে ভর্তি হয়েছিল৷‌ তাই উপাচার্যকে এই ফুলের তোড়া দেওয়া হয়৷‌ আর এত ঘটনার পরও উপাচার্য মুখ খোলেননি বা পদত্যাগ করেননি৷‌ তাই তিনি অসুস্হ হয়েছেন বলেই আমাদের মনে হয়েছে৷‌ তাই স্যরের দ্রুত আরোগ্য কামনা করে আমরা তাঁকে একটি চিঠি দিয়েছি৷‌ আমরা চাই উনি দ্রুত সুস্হ হয়ে তাড়াতাড়ি পদত্যাগ করুন৷‌ এদিন সন্ধ্যায় উপাচার্যের বাসভবনের সামনে হুমকি দেওয়া কিছু পোস্টারকে কেন্দ্র করে চাঞ্চল্য ছড়ায়৷‌ তাতে উপাচার্যকে কটূক্তি করা হয়েছে৷‌ অভিযোগ উপাচার্যের বাড়িতে কেউ বা কারা ঢিল ছোঁড়ে৷‌ গালিগালাজ করে৷‌

প্রতিবাদে প্রাক্তন উপাচার্য, আজ সিদ্ধাম্ত ছাত্রদের

গৌতম চক্রবর্তী জানাচ্ছেন, রবিবার বিশ্ববিদ্যালয় বন্ধ থাকলেও বিশ্ববিদ্যালয়ের মধ্যে ছাত্র-ছাত্রীরা জড়ো হয়ে নিজেদের মধ্যে আলোচনা চালিয়ে যান৷‌ তবে রাজ্যপালের সঙ্গে দেখা করে ছাত্ররা তাঁদের দাবি জানিয়ে আসলেও যাদবপুরের অচলাবস্হা কাটবে কিনা, তা ঠিক হবে আজ সোমবার বেলা ১২টার পর ছাত্রদের নিজেদের মধ্যে বৈঠকের পর৷‌ ছাত্র সংগঠন ফেটসুর সাধারণ সম্পাদক চিরঞ্জিত ঘোষ বলেন, আন্দোলন কোন পথে যাবে, ক্লাস বয়কট তুলে নেওয়া হবে কিনা– এ সবই ঠিক হবে সোমবারের দুপুরের বৈঠকে৷‌ রাজ্যপালের কাছে যে-সব ছাত্র প্রতিনিধি গিয়েছিলেন তাঁরা বৈঠকে যোগ দিয়ে আন্দোলনরত ছাত্র-ছাত্রীদের কাছে গোটা পরিস্হিতি জানাবেন৷‌ তা নিয়ে আমাদের মধ্যে পর্যালোচনা হবে৷‌ তার পরই সিদ্ধাম্ত নেওয়া হবে পরবর্তী পদক্ষেপ নিয়ে৷‌ তার আগে পর্যম্ত ছাত্র-ছাত্রীরা যে সিদ্ধাম্ত নিয়েছেন সেটাই তাঁরা মেনে চলবেন৷‌ অন্য দিকে এদিন যাদবপুর বাস স্ট্যান্ডে ওয়েবকুটার সভায় প্রাক্তন উপাচার্য অশোকনাথ বসু বলেন, কয়েক বছর ধরে যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের উপাচার্য পদ সামলেছি৷‌ ছাত্রদের অনেক সমস্যার সম্মুখীন হতে হয়েছে৷‌ কখনও পুলিস ডেকে ছাত্র-ছাত্রীদের নির্মমভাবে মারার কথা ভাবিনি৷‌ আলোচনার মাধ্যমেই সমস্যার সমাধান হয়েছে৷‌ এই উপাচার্য যা করেছেন তা অন্যায়৷‌ কেউ অন্যায় করলে তার প্রতিবাদ তো করতেই হবে৷‌ বিদ্যাসাগর বিশ্ববিদ্যালয়ের উপাচার্য আনন্দদেব মুখোপাধ্যায় বলেন, যাদবপুরে পড়াশোনা করার সময় অনেক উপাচার্যকে দেখেছি৷‌ ত্রিগুণা সেনের মতো উপাচার্যকে একবার বলতে শুনেছি বিশ্ববিদ্যালয়ে পুলিস ঢুকতে দেব না৷‌ যদি পুলিস ঢোকে তবে আমার বুকের ওপর দিয়ে ঢুকবে৷‌ আমি নিজেও বহুবার ছাত্রদের ঘেরাওয়ের আন্দোলনে পড়েছি৷‌ কিন্তু কখনও পুলিস ডেকে রাতের অন্ধকারে তাদের মারধর করে ঘেরাওমুক্ত হওয়ার কথা ভাবিনি৷‌ শ্রুতিনাথ প্রহরাজ বলেন, ছাত্রদের ওপর অত্যাচার করে তাদেরই দোষী করার চেষ্টা চলছে৷‌ ভিনরাজ্যের অধ্যাপক ইকবাল সিং সিন্ধু বলেন, যাদবপুরের ঘটনা শুধু এই রাজ্যের মধ্যে সীমাবদ্ধ নেই৷‌ সারা দেশে ছড়িয়ে পড়েছে৷‌ গোটা দেশের মানুষ প্রতিবাদ করছেন৷‌ আমি তাতেই সামিল হয়েছি৷‌ ছাত্র সংগঠন ডি এস ও-র তরফ থেকে অবশ্য এই দিন যাদবপুর, নাকতলা, টালিগঞ্জ, ঢাকুরিয়া প্রভৃতি জায়গায় অটো প্রচার করা হয়েছে৷‌ যাদবপুর-কাণ্ডে সাধারণ মানুষকে প্রতিবাদের জন্য আবেদন করা হয়েছে৷‌

উপাচার্যের পদত্যাগ চাইলেন বৃন্দা

বাঁকুড়া থেকে আলোক সেন জানাচ্ছেন: যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের ভি সি-র পদত্যাগ চাইলেন সি পি এমের পলিটব্যুরো সদস্য বৃন্দা কারাত ও দলের রাজ্য সম্পাদকমণ্ডলীর সদস্য অমিয় পাত্র৷‌ যাদবপুর-কাণ্ডের প্রতিবাদে রবিবার মহামিছিলের ডাক দিয়েছিল জেলা সি পি এম৷‌ বিকেলে লালবাজার থেকে বিশাল মিছিল শহর পরিক্রমা করে আসে মাচানতলায়৷‌ সেখানে বৃন্দা কারাত বলেন, ওই বিশ্ববিদ্যালয়ের ভি সি গভীর রাতে আলো নিভিয়ে পুলিসকে লেলিয়ে দিয়ে ছাত্র-ছাত্রীদের ওপর যে ধরনের অত্যাচার করিয়েছেন, তার কোনও ক্ষমা নেই৷‌ তাঁকে পদত্যাগ করতে হবে৷‌ অমিয় পাত্র বলেন, শনিবার যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের ছাত্র-ছাত্রীরা প্রতিবাদের ইতিহাস গড়েছেন৷‌ তিনি বলেন, ওই প্রতিবাদ কোনও একটা ঘটনার জন্য নয়৷‌ এই সরকার ক্ষমতায় আসার পর যেভাবে গণতন্ত্রকে ধ্বংস করছে, রাজ্য জুড়ে দমন-পীড়ন চালাচ্ছে, ওই প্রতিবাদ তারও বহিঃপ্রকাশ৷‌