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Tuesday, 14 February 2012

: शिरडी के साईं बाबा भारत के दूसरे धनवान भगवान हो गए! भक्तों ने शिर्डी में आने वाले चढ़ावे का रिकॉर्ड तोड़ दिया!



शिरडी के साईं बाबा भारत के दूसरे धनवान भगवान हो गए! भक्तों ने शिर्डी में आने वाले चढ़ावे का रिकॉर्ड तोड़ दिया!

कमाई के मामले में भारत के मंदिर देश की किसी छोटी कंपनी को भी काफी पीछे छोड़ रहे हैं।

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास



भक्तों ने शिर्डी में आने वाले चढ़ावे का रिकॉर्ड तोड़ दिया!भारत के मंदिर अब तक दुनिया के लिए श्रद्धा का केंद्र रहे हैं, पर अब ये अकूत धन-संपत्ति के केंद्र भी बनते जा रहे हैं। शिरडी के साईं बाबा को कोई चमत्कारी तो कोई दैवीय अवतार मानता है लेकिन कोई भी उन पर यह सवाल नहीं उठाता कि वह हिंदू थे या मुसलमान ।

साईं बाबा (२८ सितंबर, १८३५१५ अक्‍तूबर, १९१८), एक भारतीय संत एवं गुरू हैं जिनका जीवन शिरडी में बीता। उन्होंने लोक कल्याणकारी कार्यों को किया तथा जनता में भक्‍त‍ि एवं धर्म की धारा बहाई। इनके अनुयायी भारत के सभी प्रांतों में हैं एवं इनकी मृत्यु के लगभग ९०० वर्षों के बाद आज भी इनके चमत्कारों को सुना जाता है ।


श्री साईं बाबा जाति-पांति तथा धर्म की सीमाओं से ऊपर उठ कर एक विशुद्ध संत की तस्‍वीर प्रस्‍तुत करते हैं ।"सबका मालिक एक है" के उद्घोषक शिरडी के साईं बाबा ने संपूर्ण जगत को सर्वशक्तिमान ईश्वर के स्वरूप का साक्षात्कार कराया ।उन्होंने मानवता को सबसे बड़ा धर्म बताया और कई ऐसे चमत्कार किए जिनसे लोग उन्हें भगवान की उपाधि देने लगे । आज साईं बाबा के भक्तों की संख्या को लाखों-करोड़ों में नहीं आंका जा सकता"सबका मालिक एक है" के उद्घोषक शिरडी के साईं बाबा ने संपूर्ण जगत को सर्वशक्तिमान ईश्वर के स्वरूप का साक्षात्कार कराया.उन्होंने मानवता को सबसे बड़ा धर्म बताया और कई ऐसे चमत्कार किए जिनसे लोग उन्हें भगवान की उपाधि देने लगे।आज साईं बाबा के भक्तों की संख्या को लाखों-करोड़ों में नहीं आंका जा सकता ।


शिरडी के साईं बाबा भारत के दूसरे धनवान भगवान हो गए हैं। साईं के भक्तों ने शिरडी में आनेवाले चढ़ावे का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। दिसंबर 2011 के अंतिम सप्ताह से जनवरी के पहले पखवाड़े तक देश-विदेश से आए साईं के भक्तों ने कुल 14 करोड़ 60 लाख का चढ़ावा दान में दिया। जबकि तिरुपति स्थित बालाजी मंदिर देश में सबसे अधिक चढ़ावा और दान पानेवाला मंदिर है। जबकि तिरुपति स्थित बालाजी मंदिर देश में सबसे अधिक चढ़ावा और दान पाने वाला मंदिर है।

तीसरे नंबर पर माता वैष्णों देवी का मंदिर है जिसकी सालाना आय 500 करोड़ रुपए है जबकि सिद्धि विनायक मंदिर को 46 करोड़ रुपए सालाना दान में मिलते हैं। आपको बता दें कि भारत के मंदिरों में लोग खुलकर दान करतें हैं अभी हांलहि में पद्माभस्वामी मंदिर के तहखाने से 1 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति मिली है।

श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट (शिरडी) का प्रशासन महाराष्ट्र सरकार की ओर बनाई गई एक मैनेजिंग कमिटी देखती है। इसका गठन 2004 में किया गया था। आज की तारीख में कमिटी के पास 51.71 करोड़ रुपये से ज्यादा के किसान विकास पत्र हैं। भारत सरकार के आठ पर्सेंट रिटर्न वाले सेविंग बॉन्ड हैं, जिनकी वैल्यू 48 करोड़ रुपये से ज्यादा ठहरती है।महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के भी 8 करोड़ के बॉन्ड हैं। इसके अलावा विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में इसके 3.19 अरब रुपये से भी ज्यादा की रकम जमा है। यही नहीं ट्रस्ट कॉर्पस फंड के रूप में इसके पास 47.82 करोड़ से ज्यादा की रकम है।  

साईं संस्थान ट्रस्ट के ट्रस्टी के. सी. पांडेय ने बताया कि इस साल साईं भक्तों ने दान में 11 करोड़ का चढ़ावा नकद, 1.25 करोड़ का सोना और 13.5 करोड़ की चांदी चढ़ाई है।शिरडी के साईं बाबा मंदिर में हर साल लाखों भक्त आते हैं और यहां अब बड़े पैमाने पर चढ़ावा चढ़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर के पास 466 करोड़ रुपए के फिक्स्ड डिपॉडिट और 40.84 करोड़ रुपए के किसान विकास पत्र तथा 22 करोड़ रुपए के सरकारी बांड हैं। यानी कुल 529 करोड़ रुपए की रकम। महाराष्ट्र असेंबली में पेश इसके वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर के पास 31 मार्च 2011 तक 500 करोड़ रुपए के फिक्स्ड डिपॉजिट और सरकारी बांड थे।मंदिर के पास 28 करोड़ रुपए का सोना और 4 करोड़ रुपए की चांदी है। इनके अलावा कई तरह के रत्न वगैरह भी हैं। मंदिर का प्रबंधन यहां से प्राप्त धन को कल्याणकारी कार्यों में लगाता रहता है।

इनवेस्टमेंट के बाद अब जरा जूलरी की भी बात करें। मंदिर ट्रस्ट के पास 24.41 करोड़ से ज्यादा की गोल्ड और 3.26 करोड़ से ज्यादा की सिल्वर जूलरी है। 6.12 लाख से ज्यादा कीमत के चांदी के सिक्के और 1.28 करोड़ से ज्यादा के सोने के सिक्के हैं। सोने के ताबीज 1.12 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के हैं। यह जानकारी ट्रस्ट के ऑडिटर शरद एस. गायकवाड़ ने अपनी सालाना ऑडिट रिपोर्ट 2009-10 में दी है। इस रिपोर्ट को दिसंबर में राज्य विधानसभा में पेश किया गया था। मंदिर ने 2009-10 के दौरान 94.67 करोड़ से ज्यादा की सरप्लस इनकम कमाई, जबकि 2008-09 में यह आंकड़ा 87.22 करोड़ से ज्यादा का था। इनकम के सोर्स में किराया, बैंक अकाउंट से मिला ब्याज, निवेश और दान सभी शामिल है।



पिछले साल की तुलना में इस साल इन मंदिरों की दौलत में अच्छा खासा इजाफा हुआ है। कमाई के मामले में भारत के मंदिर देश की किसी छोटी कंपनी को भी काफी पीछे छोड़ रहे हैं। हर बार की तरह इस बार भी देश का सबसे ज्यादा दौलतमंद मंदिर तिरुपति बालाजी रहा। इस मदंरि को पिछले साल कुल 1700 करोड़ रुपए का चढ़ावा मिला। जबकि अन्य संसाधनों से मंदिर की कुल आय 650 करोड़ रुपए थी। इस मंदिर की कुल संपत्ति 5200 करोड़ रुपए है।इन मंदिरों की संपत्ति मुकेश और अनिल अंबानी की दौलत से भी ज्यादा आंकी जाती है। इन मंदिरों में अधिकांश मंदिर दक्षिण भारत में स्थित है पहले दक्षिण भारत में स्थित तिरुमाला तिरुपति मंदिर को भारत का सबसे दौलतमंद मंदिर समझा जाता था लेकिन हालहि में केरल के श्री पदनाभस्वामी मंदिर से अकूत दौलत निकलने के बाद यह मंदिर देश का सबसे रईस मंदिर बन गया है इस मंदिर की जायदाद एक लाख करोड़ से ज्यादा आंकी जा रही है जिसमें सोने की ज्वेलरी, कीमती धातु, आर्टिकल सोने के सिक्के आदि शामिल है।   

साईं संस्थान ट्रस्ट के ट्रस्टी के सी पांडेय ने 'एनबीटी' को बताया कि इस साल साईं भक्तों ने दान में 11 करोड़ का चढ़ावा नकद, 1.25 करोड़ का सोना और 13.5 करोड़ की चांदी चढ़ाई है। पिछले साल (2011) में कुल मिलाकर 250 करोड़ रुपये साईं भक्तों ने चढ़ाए थे। पांडेय ने जानकारी दी कि साईं संस्थान ट्रस्ट अब तक विभिन्न अकाउंट में 500 करोड़ रुपये की रकम इन्वेस्ट कर चुका है, जबकि मंदिर ट्रस्ट के पास कुल 300 किलो सोना और करीब 3 हजार किलो चांदी है।

ट्रस्टी के सी पांडेय ने बताया कि 1992 में स्थापित साईं संस्थान ट्रस्ट का कुल 200 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट है। इसे हॉस्पिटल, शिरडी के आसपास नई इमारतों और सड़कों के निर्माण, धर्मादा और सामजिक कामों, मेडिकल कैंप, जरूरतमंदों रोगियों की मदद इत्यादि पर खर्च किया जाता है। उन्होंने बताया की इसी योजनाओं के तहत शिर्डी में एक सुपर स्पेशिऐलिटी हॉस्पिटल और 350 करोड़ के खर्च से 'प्रसादालय' (डायनिंग हॉल) का निर्माण किया जा चुका है।

शिरडी में साईंबाबा के समाधि मन्दिर का परिसर बहुत बड़ा है और वहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ भी बहुत है इसी बात को ध्यान में रखकर प्रसाद वितरण के लिए एक अलग ही भवन है।

यहाँ लगभग 10 काउंटर है प्रसाद वितरण के लिए। कुछ काउंटरों से कूपन खरीदे जाते है और दूसरे काउंटरों पर उन कूपनों को देकर प्रसाद लिया जाता है। प्रसाद में लड्डू है जिनका मूल्य 5 रूपए है।

प्रसाद के रूप में दर्शन के बाद भोजन की भी व्यवस्था है। भोजन के कूपन के लिए अलग काउंटर है और इन कूपनों का मूल्य भी 5 रूपए है। इन काउंटरों पर लाइन भी लम्बी थी और यहाँ भिखारी भी बहुत नज़र आए। श्रद्धालु कूपन खरीद कर भिखारियों को दे रहे थे जिसका अर्थ होता है उन्होनें एक ग़रीब व्यक्ति को भोजन करवाया।

भीतर बहुत बड़ा भोजनालय है जहाँ भोजन की व्यवस्था है।

सवेरे 7 बजे से 10 बजे तक नाश्ते की भी व्यवस्था है। यहाँ बहुत से श्रद्धालु नाश्ता करना पसन्द करते है। नाश्ते के एक पैकेट में 5 पूड़ियाँ और सब्जी की तरह बनाए गए हरे मूँग होते है जो बहुत स्वादिष्ट होते है।

इसके अलावा बाहर आँगन में आइसक्रीम, श्रीखंड आदि और शिरडी के मशहूर बड़े अमरूद की दुकाने भी है।

वैसे मन्दिर के आस-पास अच्छे रेस्तरां है। बड़े-छोटे दोनों रेस्तरां है और ढाबे भी है। यहाँ अलग-अलग राज्यों के भोजन भी है जैसे गुजराती थाली, आन्ध्रा का भोजन, उत्तर भारतीय भोजन, महराष्ट्रीय भोजन आदि। महाराष्ट्र के प्रसिद्ध पोहे और साबूदाना वड़ा भी है।
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Palash Biswas
Pl Read:
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