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Thursday, 9 February 2012

तीसरी तिमाही में टाटा स्टील का मुनाफा 78 फीसदी घटने की आशंका!खस्ताहाल इस्पात उद्योग को ताजा झटका।


तीसरी तिमाही में टाटा स्टील का मुनाफा 78 फीसदी  घटने की आशंका!खस्ताहाल इस्पात उद्योग को ताजा झटका।

उद्योग जगत के तमाम सेक्टरों से घाटे की खबरें आ रही हैं। यूरोपीय मंदी की दस्तक तेज होती जा रही हैं।


एयरटेल का शुद्ध लाभ 22 फीसदी घटा

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

उद्योग जगत के तमाम सेक्टरों से घाटे की खबरें आ रही हैं। यूरोपीय मंदी की दस्तक तेज होती जा रही हैं।


तीसरी तिमाही में टाटा स्टील का मुनाफा 78 फीसदी  घटने की आशंका!खस्ताहाल इस्पात उद्योग को ताजा झटका।घरेलू मोर्चे पर कई तरह की दिक्कतों का सामना कर रही देश की सबसे बड़ी निजी पावर कंपनी टाटा पावर सार्क मुल्कों, अफ्रीका, तुर्की और मिडल ईस्ट में जनरेशन और डिस्ट्रिब्यूशन प्रॉजेक्ट के लिए विदेश में संभावनाएं खंगाल रही है।

देश की अर्थव्यवस्था से फिलहाल मंदी के बादल छंटते नजर नहीं आ रहे हैं। घरेलू विकास दर की रफ्तार तीन साल के न्यूनतम स्तर पर रहने का आकलन आया है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने चालू वर्ष को लिए विकास दर के अनुमान को सात फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 8.4 फीसदी थीबजट की तैयारी में लगे वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी के लिए  रात की नींद हराम करने के लिए  डरावने आंकड़े काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं। औद्योगिक संकट से कंपनियों को बाहर निकालने के लिए वे क्या कुछ कर पाते हैं,उद्योग  जगत की निगाह इसी पर टिकी रहेगी। 2012-13 बजट में जोर फिस्कल कंसॉलिडेशन पर होगा। 16 मार्च को पेश होने जा रहे बजट से टैक्स रियायतों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। सरकारी खर्च बेकाबू होने से उनके मंत्रालय को काफी आलोचनाएं सुननी पड़ी हैं। इससे वित्त मंत्रालय का परफॉर्मेंस भी दागदार हुआ है।


सीएसओ के इस अनुमान ने दिखा दिया है कि पिछले एक साल में विकास दर की रफ्तार बढ़ाने के लिए सरकार ने भले ही तमाम उपाय किए हों, लेकिन केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने ग्लोबल मंदी की मार से भारतीय अर्थव्यवस्था के डगमगाने के संकेत दे दिए हैं। याद रहे कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पिछले साल बजट में नौ फीसदी विकास दर रहने की संभावना जाहिर की थी, लेकिन एक साल में सरकार ने अपने अनुमानों में लगातार संशोधन करते हुए अब इसे सात फीसदी के नीचे ला दिया है। इससे पहले मध्यावधि आर्थिक समीक्षा में सरकार ने 7.5 फीसदी के इर्द-गिर्द का अनुमान लगाया था।

सीएसओ के अनुमान के विपरीत वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर में वृद्धि की उम्मीद जताई है। 6.9 फीसदी आर्थिक विकास दर के अनुमान में सुधार की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के अंतिम आंकड़े आने पर ही विकास दर की सही तस्वीर पेश की जा सकती है। महंगाई काबू में आने, बंपर फसल के अनुमान और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन के चलते आर्थिक विकास में तेजी आने की उम्मीद है।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना है कि औद्योगिक उत्पादन में कमी आने की वजह से जीडीपी दर पर दबाव है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय हालात का भी घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर दिख रहा है।

प्रणव मुखर्जी के मुताबिक महंगाई और विकास के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल भरा काम है।

हालांकि, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह का मानना है कि वित्त वर्ष 2012 में जीडीपी विकास दर 7 फीसदी रहेगी।

प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन, सी रंगराजन का कहना है कि उद्योग की हालत सुधर रही है। इसलिए जीडीपी दर 7 फीसदी से बेहतर रह सकती है।


उम्मीद से खराब जीडीपी आंकड़ों की वजह से बाजार में तेजी कम हो रही है। एशियाई बाजारों से कमजोरी के संकेत मिलने से घरेलू बाजारों ने भी गिरावट के साथ शुरुआत की है। सेंसेक्स 59 अंक गिरकर 17648 और निफ्टी 25 अंक गिरकर 5343 पर खुले हैं। पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को करीब 500 ऐसी कंपनियों के नाम बताने का निर्णय किया है, जिन्होंने सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) नियमों का उल्लंघन कर पैसे जुटाए हैं। सेबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नियामक इन कंपनियों के निदेशकों के नाम भी मंत्रालय को बताएगी ताकि इन कंपनियों और व्यक्तियों को किसी नई कंपनी के साथ जुडऩे से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।

मेटल शेयरों में 0.75 फीसदी से ज्यादा की गिरावट है। आईटी, तकनीकी, ऑयल एंड गैस शेयर 0.5-0.25 फीसदी कमजोर हैं। बैंक, कैपिटल गुड्स और सरकारी कंपनियों के शेयर भी फिसले हैं।

हिंडाल्को 4 फीसदी से ज्यादा टूटा है। स्टरलाइट इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, सेसा गोवा 1.5-1.25 फीसदी गिरे हैं।

ओएनजीसी, इंफोसिस, टाटा मोटर्स, एसबीआई, टाटा पावर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी, हीरो मोटोकॉर्प, आईटीसी, भारती एयरटेल 1-0.5 फीसदी कमजोर हैं।



खजाने को लेकर सरकार बड़ी मुश्किल में है। 2011-12 में सब्सिडी लक्ष्य से काफी ज्यादा रह सकता है और टैक्स रेवेन्यू में कमी आई है। सरकार दूसरे जरियों से भी खजाने में पैसा नहीं डाल पाई है। दिसंबर 2011 में संसद के शीतकालीन सत्र में प्रणब ने कहा था कि सब्सिडी बिल बजट अनुमान से एक लाख करोड़ रुपये ज्यादा रह सकता है। 2011-12 के बजट में सब्सिडी के करीब 1.4 लाख करोड़ रहने का अंदाजा लगाया गया था। सरकार विनिवेश और टैक्स से ज्यादा पैसा नहीं जुटा पाई है। वह टेलिकॉम स्पेक्ट्रम की नीलामी भी नहीं कर सकी है। सिर्फ इनडायरेक्ट टैक्स का लक्ष्य हासिल होता दिखाई दे रहा है।

बहरहाल वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की पहले ही नींद उड़ गई है। वजह है सरकार का बढ़ता सब्सिडी बिल। शायद ही सरकार की ओर से पहले खुलकर इस सचाई को स्वीकार किया गया है। प्रणब के कबूलनामे के बाद यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के ड्रीम प्रॉजेक्ट खाद्य सुरक्षा बिल की राह और कठिन हो गई है। कई सूबे खुलकर और गैर-कांग्रेसी केंद्रीय मंत्री इशारों-इशारों में पहले ही खाद्य सुरक्षा बिल का विरोध कर चुके हैं।

नई दिल्ली में कल पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम और स्टोरेज पर आयोजित एक समारोह में प्रणब ने कहा, 'वित्त मंत्री होने के नाते जब मैं सोचता हूं कि कितनी ज्यादा सब्सिडी देनी है तो मेरी नींद उड़ जाती है।' उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल लागू करने की भारी जिम्मेदारी सरकार ने उठाई है, लेकिन आसमान छूते सब्सिडी के आंकड़ें चिता बढ़ा रहे हैं। यह सब्सिडी बिल को खतरनाक स्तर पर पहुंचा देगा। मैं इस चिंता में सो नहीं पा रहा हूं।'


सीएनबीसी आवाज़ अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2012 की तीसरी तिमाही में टाटा स्टील का मुनाफा 78 फीसदी घटकर 224 करोड़ रुपये रह सकता है। वहीं वित्त वर्ष 2011 की तीसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 1,030 करोड़ रुपये रहा था।देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष 2011-12 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 22 प्रतिशत घटकर 1011 करोड़ रुपये रहा। ब्याज में वृद्धि, करों तथा 3जी नेटवर्क शुरू करने में हुए खर्च के कारण कंपनी का लाभ घटा है। भारत में अधिक कर दरों की वजह से दिसंबर तिमाही के लिए कंपनी का कर प्रावधान 560 करोड़ रुपये रहा जो एक साल पहले की समान अवधि में 340 करोड़ रुपये था। यह लगातार आठवीं तिमाही है जब कंपनी के मुनाफे को तगड़ी चोट लगी है। हालांकि भारती एयरटेल के सीईओ (इंटरनेशनल) और ज्वाइंट एमडी, मनोज कोहली का कहना है कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी के अफ्रीकी कारोबार का प्रदर्शन अच्छा रहा है। मनोज कोहली के मुताबिक तीसरी तिमाही में एयरटेल अफ्रीका का राजस्व 7 फीसदी और मार्जिन 7.6 फीसदी बढ़ा है।पर हकीकत यह है कि  कंपनी को अफ्रीकी कारोबार से 5.2 करोड़ डॉलर का घाटा हुआ है, जबकि पिछली तिमाही में घाटा 9.5 करोड़ डॉलर का था।

वित्त वर्ष 2012 की तीसरी तिमाही में ओएनजीसी का मुनाफा 5 फीसदी घटकर 6741 करोड़ रुपये रहा। वहीं वित्त वर्ष 2011 की तीसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 7083 करोड़ रुपये रहा था। चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में ओएनजीसी की बिक्री 2.4 फीसदी घटकर 18123 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी की बिक्री 18586 करोड़ रुपये रही थी। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में ओएनजीसी ने ऑयल सब्सिडी 12536 करोड़ रुपये अलग रखे हैं।

ऑटो सेक्टर की प्रमुख कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने भी शुद्ध मुनाफे में गिरावट दर्ज की है। वित्त साल 2011-12 की दिसंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 9.8 फीसदी गिरकर 662.15 करोड़ रुपए रहा। बीते वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी का नेट प्रॉफिट 734.68 करोड़ रुपए रहा था। तो  बजट एयरलाइंस स्पाइसजेट ने दिसंबर तिमाही में 39.26 करोड़ रुपए का नुकसान झेला है। कंपनी को जेट फ्यूल की कीमतों में उथल-पुथल और महंगे डॉलर की वजह से नुकसान उठाना पड़ा। कंपनी ने बीएसई को दी जानकारी में कहा है कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 94.44 करोड़ रुपए का प्रॉफिट हुआ था।


वित्त वर्ष 2011 की तीसरी तिमाही में नाल्को का मुनाफा 80 फीसदी घटकर 51 करोड़ रुपये रहा। वहीं वित्त वर्ष 2011 की तीसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 255 करोड़ रुपये रहा था। चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में नाल्को की बिक्री मामूली बढ़कर 1527 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी की बिक्री 1523 करोड़ रुपये रही थी।

डा. रेड्डी लेबोरेट्रीज लिमिटेड ने गत 31 दिसंबर को समाप्त तीसरी तिमाही में 108 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 262.77 करोड़ रुपये की तुलना में 58.89 प्रतिशत कम है। चालू वित्त वर्ष की इस अवधि में उसकी कुल आय 14.35 प्रतिशत बढ़कर 1631.86 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 1426.97 करोड़ रुपये रही थी।

खबर है कि दूरसंचार विभाग ने 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए कैबिनेट मसौदे को अंतिम रूप दे दिया है। दरअसल उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किए गए 122 लाइसेंस से खाली हुए स्पेक्ट्रम की नीलामी इसी मसौदे के अनुसार की जाएगी।  दूरसंचार नियामक ट्राई के अनुसार प्रत्येक सर्किल में औसतन 28 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध होगा। नीलामी में स्पेक्ट्रम की कीमत ज्यादा रहेगी या कम यह कंपनियों की संख्या पर निर्भर करेगा।  विभाग ने मसौदे में कहा है कि स्पेक्ट्रम की कीमत सही तरीके से तैयार की गई नीलामी प्रक्रिया के जरिये तय की जानी चाहिए और इसमें 'पुरानी और नई कंपनियों' को हिस्सा लेने की अनुमति मिलनी चाहिए।उच्चतम न्यायालय ने ट्राई को निर्देश दिया था कि वह आठ कंपनियों के स्पेक्ट्रम आवंटन रद्द होने के बाद उपलब्ध स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए नए सिरे से सिफारिशें दे। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर दूरसंचार विभाग अंतिम फैसला करेगा। ट्राई के सूत्रों ने बताया कि नीलामी पारदर्शी होगी और इसमें नई व पुरानी दूरसंचार कंपनियां हिस्सा ले सकेंगी। ट्राई के सूत्र ने कहा, 'अंतिम फैसला सलाह के बाद ही लिया जाएगा लेकिन नीलामी पारदर्शी और यूएएसएल धारक सभी कंपनियों के लिए होगी।' जल्द ही इस मसौदे को कैबिनेट के समक्ष भेजा जाएगा।

गलत तरीके से बांटे गए 2जी लाइसेंस रद्द करने के आदेश को लागू करने से पहले टेलिकॉम विभाग कानूनी सलाह ले सकता है।

सूत्रों के मुताबिक अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसी तरह लागू किया जाता है तो रिलायंस कम्यूनिकेशंस और टाटा जैसी डुअल टेक्नोलॉजी कंपनियों का स्पेक्ट्रम भी रद्द हो सकता है। हालांकि, टेलिकॉम विभाग पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सफाई चाहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी 2008 के बाद बांटे गए 2जी लाइसेंस और स्पेक्ट्रम को रद्द करने का फैसला सुनाया है। फैसले के मुताबिक 10 जनवरी को जारी प्रेस नोट के तहत दिए गए लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।

रिलायंस कम्यूनिकेशंस को 10 जनवरी के बाद 14 सर्किल में स्पेक्ट्रम मिला था। वहीं, टाटा टेलि को 21 सर्किल में स्पेक्ट्रम मिला था।



चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में टाटा स्टील की बिक्री 5 फीसदी बढ़कर 30,084 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी की बिक्री 28,606 करोड़ रुपये रही थी।

अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2012 की तीसरी तिमाही में हिंडाल्कोका मुनाफा मामूली बढ़कर 459.4 करोड़ रुपये रह सकता है। वहीं वित्त वर्ष 2011 की तीसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 460.3 करोड़ रुपये रहा था।

चालू वित्त वर्ष की मौजूदा तिमाही में हिंडाल्को की बिक्री 6.8 फीसदी बढ़कर 6,319 करोड़ रुपये रह सकती है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी की बिक्री 5,917 करोड़ रुपये रहा था।

वित्त वर्ष 2012 की तीसरी तिमाही में एचपीसीएल को 700 करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2011 की तीसरी तिमाही में कंपनी को 211 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

वित्त वर्ष 2012 की तीसरी तिमाही में एचपीसीएल की बिक्री 25.5 फीसदी बढ़कर 42,550 करोड़ रुपये रह सकती है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी की बिक्री 33,902.5 करोड़ रुपये रही थी।

वित्त वर्ष 2012 की तीसरी तिमाही में एसीसी का मुनाफा 7.4 फीसदी घटकर 230.4 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2011 की तीसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 248.8 करोड़ रुपये रहा था।

चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में एसीसी की बिक्री 16.5 फीसदी बढ़कर 2,437 करोड़ रुपये रह सकती है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी की बिक्री 2,092 करोड़ रुपये रही थी।

वित्त वर्ष 2012 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में अंबुजा सीमेंट्स का मुनाफा 22 फीसदी बढ़कर 313.9 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2011 की तीसरी तिमाही में अंबुजा सीमेंट्स का मुनाफा 257.5 करोड़ रुपये रहा था।

चालू वित्त वर्ष की मौजूदा तिमाही में अंबुजा सीमेंट्स की बिक्री 28 फीसदी बढ़कर 2,283 करोड़ रुपये रह सकती है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी की बिक्री 1,788.5 करोड़ रुपये रही थी।

एयरटेल का शुद्ध लाभ 22 फीसदी घटा

दूसरी ओर देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष 2011-12 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 22 प्रतिशत घटकर 1,011 करोड़ रुपये रहा। ब्याज में वृद्धि, करों तथा 3जी नेटवर्क शुरू करने में हुए खर्च के कारण कंपनी का लाभ घटा है।

भारत में अधिक कर दरों की वजह से दिसंबर तिमाही के लिए कंपनी का कर प्रावधान 560 करोड़ रुपये रहा जो एक साल पहले की समान अवधि में 340 करोड़ रुपये था। यह लगातार आठवीं तिमाही है जब भारती एयरटेल के मुनाफे में कमी दर्ज की गई है। भारती एयरटेल ने एक बयान में कहा कि इससे पूर्व वित्त वर्ष 2010-11 की इसी तिमाही में कंपनी को 1,303 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। भारती ने कहा कि 3जी नेटवर्क शुरू करने के लिए अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान उसे 164 रुपये खर्च करने पड़े हैं। वहीं शुद्ध ब्याज लागत बढ़ कर 116 करोड़ रुपये रही।

हालांकि दिसंबर, 2011 तिमाही में कंपनी की आय 17 प्रतिशत बढ़कर 18,477 करोड़ रुपये रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 15,772 करोड़ रुपये थी। उधर, भारती एयरटेल का अफ्रीकी मार्जिन सुधर कर 26.7 फीसदी हो गया जो पूर्ववर्ती वर्ष की समान अवधि में 19.1 फीसदी पर था। इसी तरह अफ्रीकी परिचालन का नुकसान पूर्व के 524.9 करोड़ रुपये की तुलना में तीसरी तिमाही में घट कर 259.9 करोड़ रुपये रह गया।

कंपनी के सीईओ मनोज कोहली ने कहा कि पहली बार इस तीमाही के दौरान एयरटेल अफ्रीका ने सकारात्मक नकदी प्रवाह दर्ज की है। कंपनी ने 2010 में कुवैत की जइन की अफ्रीकी परिसंपत्ति का अधिग्रहण किया था। तिमाही के दौरान अफ्रीका से प्राप्त राजस्व में 16 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और वह लगभग 5,357 करोड़ रुपये रहा। कोहली ने कहा कि कंपनी मार्च 2013 तक अफ्रीका से 5 अरब डॉलर के राजस्व लक्ष्य और 2 अरब डॉलर एबिटा को हासिल करने के लिए एकसमान गति से आगे बढ़ रही है।

खाद्य सुरक्षा विधेयक

खाद्य सुरक्षा विधेयक पर राज्यों के एतराज के बाद बाद अब संप्रग सरकार के मंत्रियों ने विरोधी स्वर अलापना शुरू कर दिया है। इससे सोनिया के ड्रीम प्रोजेक्ट की राह और कठिन हो गई है। कृषि मंत्री शरद पवार ने बुधवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की खामियों का हवाला देते हुए दो टूक कहा कि इसे लागू करना संभव नहीं है। खाद्य मंत्री केवी थॉमस की राय भी कुछ ऐसी ही है। कांग्रेस के संकटमोचक और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का भी कहना है कि खाद्य सुरक्षा बिल लागू करने की भारी जिम्मेदारी सरकार ने उठाई है, लेकिन आसमान छूते सब्सिडी के आंकड़ें चिता बढ़ा रहे हैं। यह सब्सिडी बिल को खतरनाक स्तर पर पहुंचा देगा। मैं इस चिंता में सो नहीं पा रहा हूं। शरद पवार ने राज्यों-संघ शासित प्रदेशों के खाद्य एवं कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में कहा, पीडीएस में आमूलचूल बदलाव बिना प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा बिल लागू करना मुश्किल होगा। अगर बिल को मौजूदा प्रणाली के जरिए ही लागू करने की कोशिश की गई तो यह लक्ष्य प्राप्ति में विफल साबित होगा। मैं इस पर इसलिए जोर दे रहा हूं, क्योंकि यह मेरा कर्तव्य है।

खाद्य मंत्री के वी थामस ने भी पवार की बात को सही बताते हुए कहा, हमें इस कानून को लागू करने के लिए और उत्पादन करने और पीडीएस को मजबूत करने की जरूरत है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पीडीएस में सुधार की वकालत करते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों को मिलकर इस समस्या को दूर करने की जरूरत है। बढ़ते सब्सिडी बिल पर गंभीर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, चालू वित्त वर्ष में इसके 2.34 लाख करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है। मुखर्जी ने यह कहने से भी गुरेज नहीं किया, मैं इस चिंता में सो तक नहीं पा रहा हूं। प्रस्तावित विधेयक के तहत 63.5 फीसदी आबादी को सस्ती दर पर अनाज मुहैया कराया जाएगा। विधेयक को दिसंबर, 2011 में संसद में पेश किया गया। संसद की स्थायी समिति इस पर विचार कर रही है। खाद्य सुरक्षा बिल को लागू करने के लिए सालाना करीब 6 करोड़ 50 लाख टन खाद्यान्न खरीदना होगा। अभी औसतन 5 करोड़ 55 लाख टन खाद्यान्न खरीदा जाता है।

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Palash Biswas
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