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Tuesday, 13 March 2012

बजट में सरकार द्वारा ऑटो सेक्टर को दी गई छूट को वापस लिए जाने की संभावना है। वहीं, डीजल गाड़ियों पर सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की तैयारी में हैं।





बजट में सरकार द्वारा ऑटो सेक्टर को दी गई छूट को वापस लिए जाने की संभावना है। वहीं, डीजल गाड़ियों पर सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने  की तैयारी में हैं।

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

भारी उद्योग मंत्रालय ने ऑटो सेक्टर को टैक्स में रियायत देने की मांग की है। पर मंदी के साये के बावजूद बजट से ऑटो सेक्टर को ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं है। बजट में सरकार द्वारा ऑटो सेक्टर को दी गई छूट को वापस लिए जाने की संभावना है। वहीं, डीजल गाड़ियों पर सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने  की तैयारी में हैं।क्योंकि उसे डीजल पर दी जा रही सालाना 67 हजार करोड़ की सब्सिडी पर काबू पाना है। दिल्ली में डीजल और पेट्रोल के बीच 24.73 रुपये प्रति लीटर का फर्क है और ऐसे में डीजल कारों की डिमांड बढ़ती जा रही है। कच्चे माल की कीमतें कम होने से ड्यूटी बढ़ने का असर कुछ कम होगा। साथ ही, कंपनियां गाड़ियों की कीमतें बढ़ा सकती हैं।घरेलू ऑटो कंपनियों का कहना है कि एक ओर तो सरकार देश में निर्मित डीजल कारों पर टैक्स बढ़ाना चाहती है, दूसरी ओर यूरोप से आयात होने वाली कारों पर ड्यूटी घटाने की तैयारी हो रही है, जिसे कि किसी भी हालत में उचित नहीं ठहराया जा सकता। कारें महंगी हो जाएंगी, जिसका खामियाजा घरेलू ऑटो सेक्टर को बिक्री में कमी के रूप में भुगतना होगा। इसी वजह से उद्योग लगातार इस तरह की कोशिशों का विरोध करता आ रहा है।  वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी आगामी बजट में वाहनों पर उत्पाद शुल्क में वृद्घि की घोषणा कर सकते हैं. बाजार में इस तरह की आशंका के चलते ही ऑटो सेक्टर के शेयरों में पिछले दो-तीन दिनों से जबरदस्त गिरावट दर्ज हो रही है। हालात यह है कि कुछ दिग्गज ऑटो कंपनियों के शेयर के भाव घटकर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच चुका है।

हालांकि हालत अब थोड़ी बेहतर होती दीख रही है, पर बजट में टैक्स बढ़ा तो फिर मंदी का संकट गहरा जाएगा, ऐसा विशेषज्ञों की आशंका है।ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा मोटर्स ने अपने तौर पर चीन में अपने जगुआर-लैंड रोवर (जेएलआर) वाहनों की असेंबलिंग का प्लांट लगाने की तैयारी पूरी कर ली है। फरवरी, 2012 के दौरान टाटा मोटर्स के वाहनों की कुल बिक्री में 18.80 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी ने इस दौरान 92,119 वाहनों की बिक्री दर्ज की। बीते साल के इसी माह में यह आंकड़ा 77,543 पर रहा था। कंपनी की यात्री वाहनों की घरेलू बिक्री 9.16 फीसदी बढ़कर 34,832 पर रही। नैनो की बिक्री भी 11.56 फीसदी बढ़कर 9,217 पर पहुंच गई। कंपनी के कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री में 26.01 फीसदी की इजाफा दर्ज किया गया।देश के ऑटो सेक्टर में बिक्री का माहौल सुधरता हुआ दिख रहा है। ऊंची ब्याज दरों व महंगे ईंधन के साथ ही बाजार की कठिन परिस्थितियों के बीच अधिकांश ऑटो कंपनियों ने, खास तौर पर घरेलू बिक्री के मामले में, अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की है। हालांकि, निर्यात के मोर्चे पर विपरीत परिस्थितियों के चलते कुछ कंपनियों की कुल बिक्री थोड़ी कमजोर भी पड़ी।

भारी उद्योग मंत्रालय ने बजट 2012-13 में ऑटो सेक्टर को टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा है। भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी को खत्म करना चाहते हैं। जीएसटी के अमल में आने तक पैसेंजर कारों पर 16 फीसदी की दर से एक्साइज ड्यूटी लागू करने की सिफारिश की गई है।सूत्रों की मानें तो भारी उद्योग मंत्रालय ने स्टील, इस्पात और एल्यूमिनियम पर कस्टम ड्यूटी खत्म करने की सिफारिश की है। गाड़ियों के डेप्रिसिएशन रेट को 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी करने की मांग की गई है। ऑटो मेकर्स को इनपुट सर्विसेज के दायरे में लाने की सिफारिश की है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक गाड़ियों के पार्ट्स को एक्साइज ड्यूटी के दायरे से बाहर करने की मांग है। साथ ही सीएनजी और एलपीजी किट को भी एक्साइज ड्यूटी के दायरे से बाहर करने के साथ कस्टम ड्यूटी घटाने की सिफारिश की गई है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद पर इनकम टैक्स में छूट दिए जाने की मांग की गई है।

ऑटोमोटिव सेक्टर में पहले से ही भारत के बजाय यूरोपीय संघ का पलड़ा भारी है। 2010-11 में ईयू से भारत में 3.4 अरब डॉलर मूल्य की पूरी तरह से निर्मित यानी सीबीयू व असेंबलिंग के लिए एकदम तैयार यानी सीकेडी कारों का आयात हुआ है। जबकि, समान अवधि में भारत से यूरोप में महज 1.7 अरब डॉलर मूल्य की कारों का निर्यात हुआ है।पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी डीजल कारों पर सीधे - सीधे 80 हजार रुपये की पेनल्टी टैक्स लगाने का आइडिया पेश कर रहे हैं। ऑटो इंडस्ट्री कनफ्यूज्ड है कि 4 लाख की किसी कार पर वही पेनल्टी कैसे लग सकती है जो 20 लाख की लग्जरी कार पर लगेगी। उसे उम्मीद है कि सरकार इस बात को समझेगी। लेकिन इससे भी ज्यादा उसकी ख्वाहिश है कि ईंधन को लेकर सरकार एक लॉन्गटर्म रोडमैप लेकर आए।


डीजल कारों पर टैक्स बढ़ाने के सरकार के संभावित कदम से आशंकित घरेलू ऑटो सेक्टर ने इस मामले पर अपनी लामबंदी तेज कर दी है। अभी तक तो अलग-अलग कंपनियां अपने तौर पर सरकार के इस कदम का विरोध कर रही थीं। लेकिन, ऑटो कंपनियों का शीर्ष संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) डीजल कारों पर टैक्स बढ़ाने की कोशिश के विरोध में खुलकर सामने आ गया।सियाम ने कहा है कि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में ज्यादा रियायतें देने से भारत को कुछ हासिल नहीं होने वाला है। सियाम के मुताबिक, आयात शुल्क में कटौती से घरेलू ऑटो निर्माताओं को कोई लाभ नहीं मिलेगा। यह अपने आप में विरोधाभासी स्थिति है कि एक तरफ तो हम भारत में बड़ी व डीजल कारों के उत्पादन को हतोत्साहित करने वाले कदम उठा रहे हैं और दूसरी ओर यूरोप से एफटीए के तहत इसी तरह की कारों पर आयात शुल्क घटा रहे हैं।

सियाम ने कहा है कि हमें पता चला है कि यूरोपीय संघ के साथ एफटीए पर चल रही बातचीत में भारत ने सभी कारों के आयात पर शुल्क को मौजूदा 60 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया है। जबकि, यूरोप से एक तय संख्या में कारों का आयात तो महज 10-15 फीसदी के आयात शुल्क के तहत ही हो जाया करेगा। इस तरह के किसी भी कदम से ऑटो सेक्टर में घरेलू निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, वैल्यू एडिशन व रोजगार सृजन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

ऑटो कंपनियों ने बड़े ही उत्साह के साथ गुजरात में प्लांट लगाने का ऐलान किया था। लेकिन कंपनियों की यह योजना अब खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है।

लगातार घटती बिक्री की वजह से ऑटो सेक्टर पर मंदी का साया मंडराने लगा है। सूत्रों के मुताबिक मंदी के चलते कई कंपनियों के गुजरात प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिए हैं।

ऑटो सेक्टर में मंदी का असर दिखाई देने लगा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मारुति सुजुकी , होंडा सिएल और बजाज ऑटो समेत कई ऑटो कंपनियों ने गुजरात प्लांट की योजनाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है। सूत्रों के अनुसार मारुति सुजुकी ने मंदी की आशंका को देखते हुए गुजरात प्लांट के लिए जमीन भी नहीं ली है।

मारुति सुजुकी ने गुजरात प्लांट की घोषणा इसी साल अक्टूबर में की थी। वहीं सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर के बाद से कंपनी से गुजरात सरकार से कोई संपर्क नहीं किया है। गुजरात सरकार प्लांट लगाने के लिए ऑटो कंपनियों को जमीन सहित दूसरी सुविधाएं देने को तैयार है बावजूद इसके कंपनियां इस ओर रुख नहीं कर रही हैं।