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Saturday, 12 May 2012

अब शंख पर सवार नजर नहीं आयेंगे अम्बेडकर

अब शंख पर सवार नजर नहीं आयेंगे अम्बेडकर

अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाले लोगों को बेशक भारी जीत हासिल हो गयी, लेकिन भारतीय संविधान की जो रोजाना हत्या हो रही है और संसदयी गणतंत्र को जैसे बाजार लील रहा है, उसका क्या? लोकसभा और राज्यसभा में दलित सांसदों ने हंगामा किया...

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तक से अंबेडकर के विवादास्पद कार्टून को हटाने का फैसला कर केंद्र ने अपने चुनावी समीकरण दुरुस्त​ ​कर् लिए  हैं. इस मामले में पहले से महाराष्ट्र में आंदोलन जारी है पर कपिल सिब्बल के कानों में जूं नहीं रेंगी, लेकिन संसद में जब इस मामले​​ के जरिये तमाम दलों को अंबेडकर और उनके अनुयायियों को आंदोलित करने का प्रयास दिखा तो तुरत फुरत सिबल ने माफी मांग ली और कार्टून हटाने का निर्देश दे दिया.
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शंकर का कार्टून : विवादों की जड़
गौरतलब है कि नेशनल काउन्सिल ऑफ़ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीआरटी) की ग्यारहवीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की पुस्तक के एक कार्टून में अम्बेडकर शंख पर सवार हैं और उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू हांक रहे हैं. शंकर नाम के कार्टूनिस्ट द्वारा किताब के 18वें पेज पर बनाये इस कार्टून को लेकर विवाद हा रहा  है और कार्टून के तमाम मायने निकाले जा रहे हैं और अंबेडकर के लिए इसे अपमानजनक कहा जा रहा है.इस प्रतीक को लेकर सबसे पहले महाराष्ट्र के दलित नेता और आरपीआइ के प्रमुख रामदास अठावले ने प्रेस वार्ता की थी और आन्दोलन की चेतावनी दी थी. 

अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाले लोगों को बेशक भारी जीत हासिल हो गयी, लेकिन भारतीय संविधान की जो रोजाना हत्या हो रही है और संसदयी गणतंत्र को जैसे बाजार लील रहा है, उसका क्या? लोकसभा और राज्यसभा में दलित सांसदों ने हंगामा किया. बसपा सहित विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि ऐसी कार्टून वाली सभी किताबों के वितरण को रोक देने का निर्देश दिया गया है तथा दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी. 

अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पुनिया ने कपिल सिब्बल से इस्तीफा मांगा है. उन्होंने कपिल सिब्बल के व्यवहार पर असंतोष जताते हुए कहा कि दो दिन पहले कांग्रेस सांसदों ने कपिल सिब्बल से मिलकर इस कार्टून के बारे में शिकायत की थी, और कार्रवाई की मांग की थी. पूनिया ने कहा कि कपिल सिब्बल किसी की नहीं सुनते. 

सभी नेताओं ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इसे अम्बेडकर का अपमान बताते हुए कार्टून को हटाने की मांग की. ​संप्रग के महत्वपूर्ण घटक तृणमूल कांग्रेस ने भीमराव अंबेडकर पर एनसीईटारटी की किताब में कार्टून छपने के मुद्दे को अपराध और शर्मनाक बताया. पार्टी ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कडी कार्रवाई की मांग की है. तृणमूल नेता और पर्यटन राज्य मंत्री सुल्तान अहमद ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ यह बहुत शर्मनाम मामला है, जिसने भी इसे प्रकाशित किया हो ..... यह न सिर्फ सरकार बल्कि समूचे देश की छवि को धूमिल करता है.' 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक शंख ब्राम्हणवाद का प्रतिक है. शंख पर एक दलित नेता अंबेडकर का बैठना और उन्हें एक ब्राह्मण नेता नेहरू द्वारा हांका जाना जाहिर करता है कि अंबेडकर ने जो किया वह ब्राम्हणवाद के इशारे पर किया या ब्राम्हणवाद के लिए किया. दलितों के संघर्ष को मुखर और आंदोलित करने और भारतीय संविधान को बनाने में अंबेडकर का बड़ा योगदान माना जाता है. हालाँकि कुछ विद्वानों का यह भी मत है कि जैसा संविधान अंबेडकर बनाना चाहते थे, मौजूदा संविधान उसका प्रहसन मात्र है. 

भारतीय संविधान के निर्माता भीमराव अंबेडकर का विवादास्पद कार्टून एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तक में प्रकाशित होने के मुद्दे पर आज संसद में जमकर हंगामा हुआ. मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल का माफी मांगना और यह दलील भी किसी काम न आई कि इस कार्टून को पुस्तक से हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं. भारी हंगामे के कारण लोकसभा की बैठक दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी जबकि राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई.

एनसीईआरटी द्वारा 11वीं कक्षा के लिए प्रकाशित राजनीति शास्त्र में पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित इस कार्टून का मुद्दा लोकसभा में कांग्रेस सदस्य एवं अनुसचित जाति जनजाति समिति के अध्यक्ष पी एल पूनिया ने उठाया. उन्होंने कहा कि इस कार्टून का प्रकाशन सिब्बल की बड़ी भूल है. उधर बसपा सुप्रीमो मायावती ने धमकी दी कि इस पुस्तक के प्रकाशन में शामिल लोगों के खिलाफ यदि सरकार दो से तीन दिन में कड़ी कार्रवाई नहीं करती तो संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी जाएगी. लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान ने भी इस घटना की कडी निन्दा करते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को न सिर्फ निलंबित किया जाए बल्कि उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए.