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Monday, 7 May 2012

शांति निकेतन को विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने की कवायद


शांति निकेतन को विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने की कवायद

Monday, 07 May 2012 11:57
नयी दिल्ली, 7 मई (एजेंसी) गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांति निकेतन को यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने की कवायद शुरू की गई है। जुलाई महीने में पेरिस में होने वाली यूनेस्को की बैठक में इसके लिए नामांकन पेश करने का प्रयास किया जा रहा है।  
नोबेल पुरस्कार विजेता टैगोर से जुड़ा विश्व प्रसिद्ध संस्थान पिछले वर्ष विश्व धरोहर घोषित किये जाने की दौड़ में था लेकिन अंतिम सूची में स्थान नहीं बना सका । विश्व भारती विश्वविद्यालय एक बार फिर इसे विश्व धरोहर की सूची के संभावितों में शामिल करवाने के प्रयास में लगा हुआ है। 
यूनेस्को नियमों के मुताबिक किसी भी विश्व धरोहर स्थल को एकीकृत कमान के अधीन होना चाहिए। शांति निकेतन के बारे में कहा गया है कि वह इस मापदंड को पूरा नहीं करता है।  
संस्कृति मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि भारत और बांग्लादेश इस वर्ष संयुक्त रूप से रवीं्रदनाथ टैगोर की 150वीं जयंती मना रहे हैं, ऐसे समय में अगर टैगोर से जुड़े इस स्थल को विश्व धरोहर धोषित किया जाता है तो समारोह का महत्व और बढ़ जायेगा।
पिछले साल की विफलता के बाद संस्कृति मंत्रालय द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर इस प्रसिद्ध विश्वविद्यालय की प्रणाली को और दुरूस्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि यह यूनेस्को के मापदंडोंं पर खरा उतर सके। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी ने कहा कि यह उसके अधीन आने वाला स्थल नहीं है, हालांकि एएसआई ऐसे स्थलों के लिए शीर्ष एजेंसी है ।
अधिकारी ने कहा कि पुन: मनोनीत करने का प्रस्ताव मिलने पर एएसआई की सलाहकार समिति इसके विभिन्न पहलुओं पर विचार कर आगे बढ़ायेगा।   
विश्वविद्यालय की वर्तमान प्रणाली के संबंध में अभी भी कई मुद्दे सुलझाये जाने हैं, अधिकारियों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि संशोधन रिपोर्ट समय पर तैयार हो जायेगी। 
उन्होंने कहा कि इस संबंध में काम को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है और इस विषय पर फिर से आवेदन करने का काम पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि अगर सब कुछ ठीक रहा तो जुलाई 2012 में पेरिस में यूनेस्को की बैठक में शांति निकेतन को विश्व धरोहर घोषित किया जा सके। 
उल्लेखनीय है कि रवीं्रदनाथ टैगोर ने 1901 में शांति निकेतन की स्थापना की थी जो कोलकाता से 158 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में स्थित है।   
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 20 जनवरी 2010 को यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किये जाने के लिए शांति निकेतन का मनोनयन किया था । लेकिन यह विश्व धरोहर नहीं बन पायी। 
शिक्षा के विशिष्ठ मॉडल, अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और स्थापत्य का नमूना होने के साथ कला एवं साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए इसे विश्व धरोहर घोषित किये जाने का आग्रह किया गया था। नामांकन में कहा गया था कि शांति निकेतन का मानवता और सांस्कृतिक आदान प्रदान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और संस्थान ने 20वीं शताब्दी में धार्मिक एवं क्षेत्रीय बाधाओं को दूर करते हुए लोगों को जोड़ने का कार्य किया है। इसको ध्यान में रखते हुए इसे विश्व धरोहर घोषित किया जाना चाहिए।