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Thursday, 10 May 2012

उद्योग जगत को और राहत की उम्मीद

उद्योग जगत को और राहत की उम्मीद


मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने गार के दांत तो तोड़ दिये, जो दिखाने के लिए थे। काला धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सिविल सोसाइटी के हो हल्ले से निजात पाने के लिए ऐसा किया गाया था। पर अन्ना ब्रिगेड की हवा निकल जाने से इसकी जरुरत भी नहीं है अब। उद्योग जगत को और राहत की उम्मीद है और इसके लिए माहौल बनाने का काम चालू है। रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती की संभावना से इंकार करते हुए मंदी का जोखिम जारी रहने की बात भी कर दी है। जाहिर है कि विकास दर कायम रखने के लिए बाजार की सेहत के लिए प्रणव दादा को अभी और कुछ कर गुजरना होगा। क्योंकि जीएएआर से राहत तो मिली लेकिन एफआईआई की बिकवाली जारी है और बाजार का सेंटीमेंट इसी के चलते कमजोर है।सरकार जल्द पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पर फैसला ले सकती है। बजट पास हो गया है और अब उसे सिर्फ राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है। वित्त सचिव आर एस गुजराल की मानें तो बजट को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही सरकार एलपीजी, डीजल और पेट्रोल के दामों पर फैसला ले सकती है। आज सेंसेक्स और निफ्टी करीब 0.5 फीसदी गिर गए। बाजार के लिए बुरी बात ये भी थी कि आज गिरने वाले शेयर दोगुने से ज्यादा रहे।आज के कारोबार में रियल्टी, मेटल, बैंकिंग, पावर, पीएसयू, ऑयल एंड गैस और ऑटो कंपनियों के शेयरों में बिकवाली हावी रही। लेकिन एफएमसीजी, हेल्थकेयर और आईटी कंपनियों के शेयरों ने बाजार की गिरावट को थामने की कोशिश की। बीएसई के एफएमसीजी इंडेक्स में 2.5 फीसदी से ज्यादा की मजबूती देखने को मिली है।सरकार ने आज कहा कि काले धन पर श्वेत पत्र तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और संसद के मौजूदा सत्र में ही इसे 22 मई के पहले सदन के पटल पर रख दिया जाएगा। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने वित्त विधेयक 2012 पर हुई बहस में तेल घाटे पर चिंता व्यक्त की और कहा कि सरकार अब सबसिडी देने की स्थिति में नहीं है। केन्द्र और राज्यों को मिलकर टैक्सों पर विचार करना चाहिए। वाणिज्यिक वाहनों की चेसिस, बालपेन की स्याही और सौर ऊर्जा संयंत्रों में काम आने वाले सामान पर शुल्क रियायत की वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की घोषणा के बाद लोकसभा ने आज वित्त विधेयक 2012 को पारित कर दिया। इसके साथ ही लोकसभा ने चालू वित्त वर्ष के आम बजट को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी।

अगले राष्ट्रपति पद के लिए प्रणव के हक में बाजार की लाबिंइंग का खासा असर होने लगा है।बाजार की अभिलाषा को अभिव्यक्ति देते हुए लोकसभा में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने तेल घाटे पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार तेल पर सब्सिडी देने की हालत में नहीं है। सरकारी घाटे को कम करना जरूरी है।राष्ट्रपति पद को लेकर प्रणब मुखर्जी की उम्मीदवारी के कयासों को उस वक्त और समर्थन मिला जब वित्त मंत्री ने खुद लोकसभा में भाषण देते हुए यह कहा दिया कि शायद मैं यहां न रहूं!इस पर पूरे विपक्ष ने स्वागत करते हुए कहा कि 'फेयरवेल बजट' है, जिस पर दादा ने हंसते हुए कहा कि उनका यह मतलब नहीं था।राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब मुखर्जी के पक्ष में संसद से लेकर सियासी गलियारों में ऐसा माहौल बन गया है कि कांग्रेस के लिए भागना मुश्किल हो रहा है। सभी दलों से राष्ट्रपति के लिए मिल रहे समर्थन से प्रणब मुखर्जी अभिभूत हैं। सोमवार को वित्त विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने प्रणब मुखर्जी की शान में जमकर कसीदे काढ़े थे। उन्होंने प्रणब को 'होने वाले राष्ट्रपति' के रूप में ही संबोधित किया था, जिसका कि पूरे विपक्ष ने समर्थन किया था। मंगलवार को बारी प्रणब की थी और उन्होंने भी यशवंत सिन्हा का आधा दर्जन बार नाम लेते हुए उनकी प्रशंसा की। साथ ही कर ढांचे में सुधार पर वह कुछ ऐसा संकेत दे गए कि वह आगे वित्तमंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि 'कर ढांचे में मैंने सुधार के जो प्रस्ताव दिए हैं, उनका लाभ आप आगे देखेंगे। आगे शायद मैं न भी रहूं तो भी आप इसके फायदे देख सकेंगे।विपक्षी बेंच की तरफ से सबने एक साथ हंसते हुए कहा कि 'दादा यह फेयरवेल बजट।' इस पर मुस्कराते हुए प्रणब ने कहा कि 'मेरा मतलब बढ़ती उम्र से है।'अभी कांग्रेस ने अपने पत्ते खोले नहीं हैं और इस बारे में पूछे गए सवालों पर कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी कुछ जवाब नहीं दे सके। दादा के पक्ष में बनती आम सहमति पर उनका कहना था कि 'दादा हैं ही काबिलेतारीफ शख्सियत, लिहाजा उनकी तारीफ हो रही है। हम विपक्ष का शुक्रिया अदा करते हैं।' हालांकि राष्ट्रपति पर दावेदारी पर अल्वी का कहना था कि अभी जुलाई तक दो माह का वक्त है, नेतृत्व सही समय पर फैसला करेगा।

इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि आने वाले समय में मुद्रास्फीतिक दबाव को देखते हुए ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश कम है। केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने फिक्की की एक बैठक के मौके पर संवाददाताओं से कहा, 'हमने अप्रैल में ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू किया। लेकिन यदि आप हमारे मुद्रास्फीति के अनुमान को देखें तो मध्यम से दीर्घावधि में मुद्रास्फीतिक दबाव बरकरार है। सुबीर गोकर्ण के मुताबिक दुनियाभर में इकोनॉमी अभी अनिश्चितता के दौर में है। उनके मुताबिक अभी भी मंदी का जोखिम बना हुआ है।सुबीर गोकर्ण का कहना है कि महंगाई दर कुछ घटी है लेकिन फिर भी महंगाई दर में बढ़ोतरी का खतरा बरकरार है। इसके अलावा वित्तीय घाटा बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है। लिहाजा इन स्थितियों में फिलहाल ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश कम है।डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी बढ़ गई है। आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 71 पैसे की भारी गिरावट लेकर 53.85 के स्तर पर बंद हुआ है। आज डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे की भारी गिरावट के साथ 53.54 के स्तर पर खुला था। वहीं कल डॉलर के मुकाबले रुपया 23 पैसे की कमजोरी लेकर 53.14 पर बंद हुआ था। बैंकों और आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये में कमजोरी आई है। यूरोप में बदले आर्थिक समीकरण से यूरो के मुकाबले डॉलर मजबूत होता जा रहा है।

रस्सी जल गयी है पर ऐंठन नहीं गयी।वोडाफोन टैक्स मामले पर वित्त मंत्री के कड़े रुख के बाद अब वित्त सचिव आर एस गुजराल ने भी साफ कर दिया है कि वोडाफोन को टैक्स में किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी।वित्त सचिव के मुताबिक बजट के तहत कंपनी को कानूनी तौर पर पूरा टैक्स भरना होगा। साथ ही वोडाफोन जैसे दूसरे मामलों पर भी टैक्स छूट नहीं मिलेगी। वोडाफोन पर 20,000 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है।बयान बाजी चाहे जो हो विदेशी निवेशकों की आस्था लौटाने के लिए देर सवेर सरकार को वोडापोन मामले में कुछ करना ही पड़ेगा। टूजू स्पेक्च्म मामले में राहत के लिए राष्ट्रपति पद के गैर वाजिब इस्तेमाल की खूब आलोचना हो रही थी, इसलिए सुप्रीम कोर्ट से व्याख्या मांगने का मामला ही खत्म कर दिया। जैसे पुणे में अवसर बिताने के लिए सेना की जमीन के इस्तेमाल का फैसला वापस हो गया। पर फिर वही बात, सरकारी दांत दिखाने के और , और खाने के और। निजी बिजली कंपनियों को कोयला आपूर्ति सुनिश्चत करने के लिए जारी राष्ट्रपति की डिक्री अभी वापस नहीं हुई है।बहरहाल सरकार ने नई टेलिकॉम नीति की रुपरेखा तय कर दी है। नई टेलिकॉम नीति के मुताबिक न सिर्फ ग्राहकों को बेहतर और सस्ती सुविधाओं का प्रस्ताव है बल्कि टेलिकॉम कंपनियों और टेलिकॉम उपकरण बनाने वाली कपनियों के भी फायदे की काफी बाते हैं।नई टेलिकॉम नीति में स्पेक्ट्रम की ट्रेडिंग और शेयरिंग की छूट का प्रस्ताव है। हर तरह की सर्विस के लिए स्पेक्ट्रम इस्तेमाल की छूट होगी। साल 2015 तक ब्रॉडबैंड की दरें सस्ती की जाएंगी। नई टेलिकॉम पॉलिसी में फ्री रोमिंग का भी प्रस्ताव है।नई टेलिकॉम पॉलिसी में कंपनियों की वित्तीय मदद के लिए पॉलिसी बनाई जाएगी। साथ ही क्वॉलिटी सर्विस के लिए जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।गौरतलब है कि देश की तमाम मोबाइल ऑपरेटर कंपनियों ने चेतावनी दी है कि वे मोबाइल कॉल रेट को दोगुना कर सकती हैं। इन कंपनियों के सीईओ ने मंगलवार को टेलिकॉम मंत्री कपिल सिब्बल से मुलाकात की और कहा कि अगर स्पेक्ट्रम नीलामी में ट्राई की अनुशंसा स्वीकार की गई तो इस तरह का कदम उठाना पड़ सकता है। जिन कंपनियों के प्रमुखों ने सिब्बल से मुलाकात की उनमें भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया, आइडिया सेल्युलर, यूनिनॉर और विडियोकॉन आदि हैं। मुलाकात के बाद भारती एयरटेल के सीईओ संजय कपूर ने रिपोर्टरों से कहा, जो सुझाव दिए गए हैं अगर उनको माना गया तो कुछ सर्कल ऐसे होंगे जिनमें सौ फीसद तक कीमतों में बढ़ोतरी होगी।

दूसरी ओर सरकार अनाज रखने की जगह की भारी कमी से परेशान होकर सब्सिडी देकर अनाज निर्यात करने पर विचार कर रही है। सरकार की इस योजना से करीब 8,000 करोड़ रुपये तक का सब्सिडी का बोझ झेलना पड़ सकता है। प्रधानमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार सी रंगराजन की अगुवाई वाली कमेटी इस मुद्दे पर अपनी सिफारिश देने वाली है।स्टोरेज की कमी से परेशान सरकार सब्सिडी देकर 100 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी सकती है। सरकार को विदेश में गेहूं करीब 7.86 रुपये प्रति किलो सस्ता पड़ेगा। लेकिन सरकारी स्टॉक से गेहूं निर्यात करने पर सब्सिडी देनी होगी जिससे 100 लाख टन गेहूं के निर्यात पर 7,735 करोड़ रुपये का सब्सिडी बोझ पड़ेगा।माना जा रहा है कि सरकार की नीति में निजी कंपनियों को भी गेहूं के निर्यात में रियायत दी जा सकती है। हफ्ते भर में रंगराजन कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और अंतिम फैसला जल्द ही लिया जाएगा।

वित्त विधेयक में काले धन पर लगाम लगाने के कई प्रावधानों को लेकर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की भले ही आलोचना की जा रही हो, लेकिन उन्होंने काले धन पर अगले कुछ दिनों के भीतर ही श्वेतपत्र लाने का एलान कर दिया है। वित्तामंत्री ने लोकसभा में वित्ता विधेयक, 2012-13 पर जारी परिचर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान ही काले धन पर श्वेतपत्र जारी किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विदेश में काला धन रखने वालों के नाम बताना आसान नहीं होगा।सरकार ने मंगलवार को कहा कि कालेधन पर श्वेत पत्र तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और संसद के मौजूदा सत्र में ही इसे सदन के पटल पर रख दिया जायेगा। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बहस का उत्तर देते हुए कहा कि कालेधन पर श्वेत पत्र तैयार किया जा रहा है और संसद के मौजूदा सत्र में ही इसे पेश कर दिया जायेगा।

जमीन-जायदाद के दाम अनाप-शनाप ढंग से यूं ही नहीं बढ़ रहे। इसमें जमकर काला धन झोंका जा रहा है। आर्थिक खुफिया एजेंसियों ने इसकी सूचना वित्त मंत्रालय को दी है। उनका कहना है कि किसी अन्य क्षेत्र की तुलना में सबसे ज्यादा काला धन रीयल एस्टेट में घूम रहा है। केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (सीईआईबी), आयकर (खुफिया) और उत्पाद शुल्क खुफिया महानिदेशालय जैसे विशेष विभागों ने आयकर (जांच) व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को रीयल एस्टेट क्षेत्र में आ रहे धन पर पैनी नजर रखने के लिए सतर्क किया है। साथ ही विशेष अभियान चलाने को कहा है। कुछ समय पहले वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक खुफिया परिषद (ईआईसी) की बैठक में सीईआईबी ने बताया कि 2011 के दौरान अघोषित आय का सबसे अधिक हिस्सा (40 प्रतिशत) रीयल एस्टेट क्षेत्र में पाया गया। इसके बाद 27 प्रतिशत मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में देखने को मिला। छुपाई गई बेहिसाब आय का पता आयकर विभाग की जांच इकाई ने लगाया। रीयल एस्टेट व कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में ऐसी छिपी आय 1,400 करोड़ रूपये से अधिक रही। मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में यह 1,100 करोड़ रूपये से अधिक थी। सीईआईबी आर्थिक खुफिया डाटा जुटाने की नोडल एजेंसी है। यह आयकर, ईडी, सीबीआई और आईबी जैसी एजेंसियों के साथ संपर्क में रहती है। सीईआईबी ने बताया कि रीयल एस्टेट क्षेत्र में आयकर कानूनों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आयकर कानून के अंतर्गत कटौती के गलत दावे किए जाते हैं। इसके अलावा अघोषित नकद लेनदेन होते हैं। पैसा कई हाथों से होकर निकलता है। इसमें अवैध विदेशी फंड भी जमकर लगता है।

मुखर्जी ने बताया कि श्वेतपत्र में काले धन से संबंधित हर जानकारी होगी। लेकिन यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि उस धन के मालिक के नाम को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। सिर्फ उन्हीं मामलों में नाम सार्वजनिक किए जाएंगे, जिनमें मुकदमा दर्ज किया जाएगा। विदेशी बैंकों में धन रखने वालों के नाम सरकार उस देश की सरकार की अनुमति से ही सार्वजनिक कर सकती है।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि देश में कितना काला धन है, इसके आकलन की जिम्मेदारी जिन संस्थानों को दी गई है उनकी रिपोर्ट जुलाई-अगस्त तक आ जाएगी। यह काम देश के तीन प्रमुख संस्थान कर रहे हैं। इन्हें दिसंबर, 2012 तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया था। वित्ता विधेयक पर बहस के दौरान भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी ने यह जानना चाहा था कि काले धन पर सरकार की रिपोर्ट कब तक आएगी।

सनद रहे कि सोमवार को वित्त विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते समय वित्तामंत्री ने काले धन पर लगाम लगाने संबंधी दो प्रमुख घोषणाओं को वापस ले लिया था। दोहरे कराधान समझौते की आड़ में कर बचाने वाले सौदों को कर दायरे में लाने के लिए प्रस्तावित नियम जीएएआर [जनरल एंटी-एवाइडेंस रूल्स] को लागू करने की अवधि एक वर्ष बढ़ा दी गई है। साथ ही आभूषण कारोबार में काला धन की रोक के लिए बजट प्रस्ताव में दो लाख रुपये से अधिक के आभूषणों की नकद खरीद पर कर लगाने के प्रावधान को भी बदल दिया गया है।

तेल कंपनियों की बिगड़ती माली हालत और पेट्रो मूल्यवृद्धि के राजनीतिक विरोध के बीच तालमेल बिठाने के लिए एक नया फार्मूला तैयार किया जा रहा है।

इसके तहत तेल कंपनियों को पेट्रोल की कीमत बढ़ाने की इजाजत देने और ऊंची आय वाले वर्ग (अमीरों) को सब्सिडी वाली रसोई गैस की आपूर्ति से वंचित रखा जा सकता है। राजनीतिक वजहों से सरकार डीजल की खुदरा कीमत में फिलहाल कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहती है।

पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी इस फार्मूले को मंत्रियों के अधिकारप्राप्त समूह (ईजीओएम) के समक्ष रखेंगे। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित यह समूह संसद के मौजूदा सत्र की समाप्ति के तुरंत बाद बैठक करने वाला है। इसमें तेल कंपनियों को 1 जून, 2012 से पेट्रोल मूल्यवृद्धि की इजाजत मिल सकती है। ईजीओएम की बैठक में रेड्डी यह प्रस्ताव रखेंगे कि डीजल की खुदरा कीमत में हस्तक्षेप को पेट्रोल और रसोई गैस पर सरकार के फैसले की प्रतिक्रिया को देखते हुए रोका जा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि पेट्रोलियम मंत्री राजनीतिक हालात को देखते हुए एक प्रायोगिक प्रस्ताव तैयार करने के पक्ष में हैं। अगर डीजल को महंगा नहीं किया जाए तो अन्य उत्पादों में मूल्यवृद्धि के फैसलों का राजनीतिक दलों की तरफ से बड़ा विरोध नहीं होगा। वैसे, तेल कंपनियों को पेट्रोल की कितनी कीमत बढ़ाने की इजाजत मिले यह फैसला ईजीओएम में ही होगा। तेल कंपनियों को अभी पेट्रोल पर 9 रूपये प्रति लीटर का अनुमानित घाटा हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोलियम मंत्रालय का दूसरा प्रस्ताव संपन्न तबके को सब्सिडी वाली गैस की आपूर्ति को चरणबद्ध तरीके से रोकने को लेकर होगा। मंत्रालय इस बात से उत्साहित है कि हाल ही में स्थाई संसदीय समिति ने इस बात की पुरजोर वकालत की है कि अमीरों से रसोई गैस की पूरी कीमत वसूली जानी चाहिए। मंत्रालय की तरफ से जिस चरणबद्ध योजना का प्रस्ताव पेश करने पर विचार हो रहा है, उसमें सबसे पहले एमपी, एमएलए व आधिकारी वर्ग के कर्मचारियों को सब्सिडी वाली रसोई गैस की आपूर्ति बंद की जाएगी। दूसरे चरण में 50 हजार रुपये प्रति माह से अधिक आय वालों से रसोई गैस की पूरी कीमत वसूली जाएगी। अभी दिल्ली में रसोई गैस की कीमत ग्राहकों से 400 रूपये प्रति सिलेंडर वसूलने के बावजूद तेल कंपनियों को 570 रूपये का घाटा हो रहा है।