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Tuesday, 3 April 2012

ममता के सामने झुकी सरकार, एनसीटीसी पर बुलाएगी मुख्यमंत्रियों की बैठक


ममता के सामने झुकी सरकार, एनसीटीसी पर बुलाएगी मुख्यमंत्रियों की बैठक

Tuesday, 03 April 2012 17:45
कोलकाता, तीन अप्रैल (एजेंसी) एनसीटीसी के मुद्दे पर दिल्ली में मुख्यमंत्रियों के साथ आगामी पांच मई को अलग से चर्चा करने पर सरकार ने सहमति जता दी है।
सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस के दबाव के आगे एकबार फिर झुकते हुए सरकार ने ममता बनर्जी की मांग के अनुरूप राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र :एनसीटीसी:के मुद्दे पर दिल्ली में मुख्यमंत्रियों के साथ आगामी पांच मई को अलग से चर्चा करने पर सहमति जता दी है।
सचिवालय सूत्रों ने यहां बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निर्देश पर गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर उनके सुझाव पर सहमत होने की सूचना दे दी है। पत्र में कहा गया है कि आगामी पांच मई को मुख्यमंत्रियों की अलग से बुलाई जाने वाली बैठक में एनसीटीसी मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
केंद्र ने इससे पहले राज्यों के मुख्यमंत्रियों की आंतरिक सुरक्षा पर 16 अप्रैल को बैठक बुलाई थी। इसमें एजेंडा में शामिल 10 मुद्दों में एनसीटीसी का मुद्दा भी शामिल था।
उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी द्वारा 30 मार्च को प्रधानमंत्री 
को दिए गए सुझाव पर सहमति जताते हुए एजेंडा में शामिल नौ मुद्दों पर अब 16 अप्रैल को चर्चा की जाएगी।
चिदंबरम द्वारा बनर्जी को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आगामी पांच मई को एनसीटीसी के मुद्दे पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्रियों की अलग से बैठक बुलाई जाएगी।
बनर्जी ने इससे पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय से 16 अप्रैल को मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के बारे में पत्र मिला है। बैठक के एजेंडे में एनसीटीसी समेत 10 मुद्दों को शामिल किया गया है।
तृणमूल प्रमुख ने कहा था कि ऐसी स्थिति में एनसीटीसी से ध्यान खत्म हो जाएगा। इसलिए उन्होंने सुझाव दिया था कि बैठक में एनसीटीसी चर्चा का एकमात्र मुद्दा होना चाहिए ताकि सभी राज्य अपनी राय सही तरीके से व्यक्त कर सकें और अन्य मुद्दों पर बाद में चर्चा हो सकती है।
बनर्जी ने प्रधानमंत्री के साथ अपनी पिछली मुलाकात में भी कहा था कि उन्होंने उनसे अनुरोध किया है कि वह राज्यों से विचार-विमर्श किए बिना और आम सहमति बनाए बिना एनसीटीसी मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ें।