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Sunday, 20 January 2013

फिर बढ़ सकता है रेल किराया

फिर बढ़ सकता है रेल किराया

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

असर - डीजल महंगा होने से रेलवे पर बढ़ा 3,000 करोड़ रुपये का बोझ
नफा-नुकसान
रेलवे जैसे बड़े खरीदारों के लिए डीजल की कीमतों में 10.80 रुपये की बढ़ोतरी
पिछले साल रेलवे में 25 लाख किलो लीटर डीजल की खपत, हर साल 10 फीसदी वृद्धि
तंगी से फंसी रेलवे यदि नुकसान से बचना चाहेगी तो किराया बढ़ाना ही विकल्प
हाल में बढ़ा रेल किराया 22 जनवरी से लागू होगा, तत्काल दुबारा बढ़ोतरी मुश्किल

सरकारी तेल विपणन कंपनियों की ओर से डीजल के बल्क कस्टमर्स (बड़े खरीदारों) के लिए कीमत में प्रति लीटर 10.80 रुपये की वृद्धि करने से रेलवे पर अचानक 3,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ गया है। हालांकि रेलवे ने अचानक बढ़े खर्च के लिए किराये में वृद्धि संबंधी कोई नियम तो नहीं बनाया है लेकिन रेल मंत्री पवन कुमार बंसल इस तरह का बोझ झेलने की भी प्रवृत्ति के खिलाफ हैं। रेलवे के अधिकारी किराया बढ़ाने के सवाल पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अभी नहीं तो कुछ महीने के बाद रेलवे का किराया फिर बढ़ सकता है। रेलवे ने करीब एक दशक बाद हाल ही में रेल किराए में बढ़ोतरी की है जो 22 जनवरी से प्रभावी होने वाला है। सरकार ने गुरुवार को डीजल की कीमतों को एक तरह से नियंत्रण मुक्त कर दिया है। इसी के साथ बल्क कस्टमरों को भी कोई सब्सिडी नहीं देने का निर्णय लिया। तेल कंपनियों के बल्क कस्टमरों में रेलवे का नाम नंबर वन पर है। पिछले साल रेलवे में 25 लाख किलो लीटर डीजल की खपत हुई थी। इसमें हर साल करीब 10 फीसदी की वृद्धि होती है। रेलवे को डीजल का मूल्य हर राज्य में अलग-अलग चुकाना होगा क्योंकि वैट में कुछ कुछ अंतर है। एक अधिकारी के मुताबिक अब डीजल का औसत मूल्य करीब 11 रुपये प्रति लीटर पड़ेगा क्योंकि 16 जनवरी को समाप्त हुए पखवाड़े में डीजल में 9.60 रुपये प्रति लीटर की अंडर रिकवरी हो रही थी।

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो फिलहाल किराया नहीं बढ़ सकता है, क्योंकि पिछले दिनों किराये में वृद्धि का जो फैसला लिया गया था, वह तो 22 जनवरी से लागू हो रहा है। यदि तुरंत किराया बढ़ाया गया तो इसकी तीव्र प्रतिक्रिया हो सकती है। हालांकि रेल मंत्री ने आगामी बजट में किराये में वृद्धि करने से मना किया है लेकिन अचानक मूल्य बढऩे की ओट में कुछ वृद्धि तो हो ही सकती है। यदि अप्रैल से भी किराया बढ़ा तो भी राहत है। उनके मुताबिक माल भाड़े में वृद्धि की गुंजाइश नहीं है क्योंकि भारत में माल भाड़ा कुछ ज्यादा ही है। इसे ठीक करने की बात हो रही है। ऐसा हो सकता है कि कुछ कमोडिटी पर फ्यूल सरचार्ज लगा दिया जाए। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि रेल मंत्री पवन कुमार बंसल इस तरह की बढ़ोतरी खुद झेलने की प्रवृति का समर्थन नहीं करते हैं। पत्रकारों के साथ बातचीत में भी वह कह चुके हैं कि जब जब रेलवे पर अधिभार बढ़ा, उस समय यदि किराये-भाड़े में बढ़ोतरी हुई होती तो अभी ऐसी स्थिति नहीं आती।

जल्द घोषित होगी सेल के एफपीओ की तारीख

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) को लांच करने की तारीख की घोषणा जल्द ही करने जा रही है। इस एफपीओ के जरिए कंपनी की 10.82 फीसदी हिस्सेदारी का विनिवेश किया जाना है। इस विनिवेश प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सरकार ने विदेशी निवेशकों को लुभाने की कवायद भी तेज कर दी है। इस्पात सचिव डी. आर. एस. चौधरी ने भारतीय स्टील इंडस्ट्री की संभावनाओं को लेकर यहां आयोजित निवेशकों की एक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि सेल की 10 फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश की तारीख पर वित्त मंत्रालय जल्द ही फैसला करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि सेल का विनिवेश निकट भविष्य में ही होने जा रहा है। ऐसे में, यह बेहद महत्वपूर्ण है कि निवेशकों को देश के स्टील सेक्टर की पूरी तस्वीर के बारे में बताया जाए और उन्हें इस प्रक्रिया से जोड़ा जाए। बढ़ते राजकोषीय घाटे पर लगाम लगाने की कवायद के तहत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के विनिवेश का दांव खेला है और इसके लिए निवेशकों को आकर्षित करने के नए-नए तरीके आजमाए जा रहे हैं। सेल के विनिवेश से सरकार की झोली में तकरीबन 4,000 करोड़ रुपये तक की राशि आ सकती है।

कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने जुलाई, 2012 में ही सेल में सरकार की 10.82' हिस्सेदारी के विनिवेश की योजना को मंजूरी दे दी थी। यह विनिवेश ऑफर-फॉर-सेल (ओएफएस) रूट के जरिए किया जाना है। मौजूदा समय में सेल में सरकार की हिस्सेदारी 85.82 फीसदी के स्तर पर है। हालांकि, बाजार की खराब परिस्थितियों के चलते सेल के विनिवेश को अच्छा समय आने तक के लिए होल्ड पर रख लिया गया था। लेकिन, अब बाजारों में अच्छी रैली देखी जा रही है और सरकार अपने 30,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने के लिए सेल की शेयर सेल को जल्द ही अंजाम दे सकती है।भारत की स्टील उत्पादन क्षमता इस समय नौ करोड़ टन सालाना के करीब है। वर्ष 2020 तक इसके बढ़कर 20 करोड़ टन पर पहुंच जाने की संभावना है। इसके लिए 110 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।

चौधरी ने कहा कि ग्लोबल स्तर पर इंडस्ट्री में हुई 1.2-1.4 फीसदी की ग्रोथ की तुलना में बीते साल के दौरान भारतीय स्टील इंडस्ट्री की ग्रोथ पांच फीसदी की रही है।सिंगापुर में चौधरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सिंगापुर में तीन दिनों तक निवेशकों को आकर्षित करने की कवायद की। इसी तरह के प्रतिनिधिमंडल हांगकांग, यूरोप व अमेरिका में भी भेजे जाने की योजना है।

निवेश के लिए सोनिया ने दिया व्यावहारिकता पर जोर

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को आर्थिक सुधारों की जोरदार तरीके से वकालत करते हुए कहा कि देश के रोजगार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निवेश को आकर्षित करने के मोर्चे पर ‘व्यावहारिक’ बनने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देशभर में भूमि, वन, पानी, जीवनस्तर, आदिवासी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर कई आंदोलन चल रहे हैं। सोनिया ने पार्टीजनों का आह्वान किया कि वे इन मुद्दों पर आगे बढ़कर काम करें। सोनिया ने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 2004 से ‘वास्तविक तौर पर कई क्रांतिकारी कार्यक्रम पेश किए हैं और पार्टी के घोषणापत्र के अनुरूप ऐतिहासिक कानून लागू कर रही है। सोनिया ने कहा कि रोजगार न होने से व्यक्ति की आंकक्षाएं मरती हैं और इस स्थिति से निराशा, अपराध और हिंसा को बढ़ावा मिलता है।’ उन्होंने कहा कि देश को दक्ष रोजगार पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश को विशेषकर अर्ध शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल वाले रोजगार पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। सोनिया ने पार्टी के चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए कहा, ‘इसके लिए हमें निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यावहारिक होने की जरूरत है और सिर्फ यही रास्ता है जिससे देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य हासिल हो सकता है।’

सोनिया का यह बयान ऐसे समय आया है जबकि बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर काफी हो हल्ला मच रहा है। अपने संबोधन में सोनिया ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपयोगिता साबित की है। संप्रग की अध्यक्ष ने गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों पर जोर देते हुए कि पिछले एक दशक में आर्थिक वृद्धि दर प्रभावशाली रही है। उन्होंने कहा,‘इसका गरीबी को खत्म करने में प्रमुख असर है, लेकिन असमानता तथा गरीबी के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है।’ उन्होंने कहा कि यही वजह है कि गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को टिकाऊ बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विकास के विस्तार के बावजूद देश में कई हिस्से अभी भी पिछड़े हैं और पार्टी को इन क्षेत्रों में सुधार में आगे रहना होगा। सोनिया ने इस बात पर क्षोभ जताया कि कई राज्यों में पार्टी इसे राजनीतिक समर्थन में तब्दील नहीं कर पाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चिंतन शिविर में विचार-विमर्श तथा पुख्ता सुझाव उभरकर सामने आएंगे।

गुजरात: महंगे पीएनसी-सीएनजी से परेशान लोग

गुजरात में सभी लोग पीएनजी और सीएनजी के बढ़ते दाम से परेशान है। बढ़ोतरी ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले 1 साल में पीएनजी और सीएनजी की कीमतों में 25-50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। कंपनियों का कहना है की कीमत बढाना उनकी मजबूरी है। अहमदाबाद के सुमित सोनी अपने माता पिता और भाइयो के साथ सुयंक्त्त परिवार में रहते है और उनके घर में एक छोटी सी कार भी है। पेट्रोल की बढती कीमतों से परेशान हो कर उन्होंने अपनी गाडी में 1.5 साल पहले सीएनजी किट लगवाया था। मगर अब शहर में सीएनजी भी सस्ती नहीं रही है। अभी कुछ दिन पहले ही अहमदाबाद में सीएनजी पंप चलाने वाली अदानी गैस ने इसके दाम में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी की है। अब सुमित अपनी कार बेचने की सोच रहे हैं। गुजरात में अदानी के अलावा जीएसपीसी, साबरमती गैस और गुजरात गैस जैसी कंपनियां भी सीएनजी पंप चलाती हैं। इसमें से जीएसपीएल और अदानी ने 15 जनवरी को सीएनजी, पीएनजी और कमर्शियल गैस की कीमतों में 15-25 फीसदी की बढ़ोतरी की है।

हालत ये है कि जो सीएनजी दिसंबर 2011 को 46.5 रुपये पर थी, वो आज 60 रुपये के पार चली गई है। इसी तरह पीएनजी की कीमत 24.25 रुपये से बढ़कर करीब-करीब 34 रुपये हो गई है। इस बेतहाशा बढ़ोतरी के चलते न ही केवल गाड़ी चलाने वाले बल्कि, घर में पाइप गैस से खाने बनाने वाली भी खासे परेशान हैं।

GST से आर्थिक वृद्धि और राजस्व में होगा सुधार’

देश के प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल फिक्की ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को शीघ्राति शीघ्र राजनीतिक सहमति की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि इसके लागू होने से मौजूदा आर्थिक सुस्ती दूर करने में मदद मिलेगी सरकारों के राजस्व में भी सुधार होगा। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल महासंघ (फिक्की) की नवनियुक्त अध्यक्ष नैना लाल किदवई का मानना है कि जीएसटी अच्छी तरह लागू हो जाए तो सकल घरेलू उत्पाद में दो प्रति की वृद्धि हो सकती है। फिक्की अध्यक्ष ने कहा,‘सभी दलों को सहमति से बढचढ कर जीएसटी लागू कराना चाहिए। यह देशहित में है, इससे जनता पर कर बोझ नहीं बढ़ेगा बल्कि कर अपवंचना पर अंकुश लगेगा और राजस्व वसूली में सुधार होगा।’

किदवई ने कहा कि जीएसटी आने से सकल घरेलू उत्पाद में डेढ़ से लेकर दो प्रतिशत तक वृद्धि होगी और सभी को इसका फायदा होगा। उन्होंने जीएसटी लगने से जनता पर कर का बोझ बढेने की आशंका को खारिज किया और कहा कि इससे राजस्व वसूली में सुधार होगा तथा राजकोषीय संतुलन कायम करने के प्रयासों में मदद मिलेगी।

वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे को 5.3 प्रतिशत के दायरे में रखने के भरसक प्रयास किये जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष के दौरान देश दुनिया में सुस्त गतिविधियों के चलते भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर छह प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। अप्रैल-मार्च 2011.12 में आर्थिक वृद्धि 6.5 प्रतिशत थी।

किंगफिशर एयरलाइंस से बैंकों ने मांगे 1000 करोड़ रुपये

किंगफिशर एयरलाइंस को कर्ज देने वाले बैंकों ने उससे तुरंत 800-1000 करोड़ रुपये चुकाने को कहा है। साथ ही एयरलाइन से ये भी पूछा गया है कि कंपनी में पूंजी कब तक डाली जाएगी। शुक्रवार को किंगफिशर एयरलाइंस की कर्ज देने वाले बैंकों के साथ बैठक थी जिसमें किंगफिशर को अपना रिवाइवल प्लान सौंपना था लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाई।हालांकि बैठक में किंगफिशर के सीईओ संजय अग्रवाल और सीएफओ राजीव मौजूद थे और उन्होंने बैंकों पर पूंजी देने का काफी दबाव भी बनाया लेकिन बैंकों ने तुरंत कोई कर्ज देने से साफ इनकार कर दिया। बैठक में बैंकों ने एयरलाइन से आधा कर्ज चुकाने को कहा जिसमें कर्मचारियों की बकाया सैलरी, एयरपोर्ट्स और तेल कंपनियों का बकाया भी शामिल है।अब इस महीने के आखिर में किंगफिशर और बैंकों की एक और बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। किंगफिशर पर बैंकों का करीब 7500 करोड़ रुपये बकाया है।

गरीबी को समझना जरूरीः आरबीआई गवर्नर

मौद्रिक नीति की 29 जनवरी को आने वाली तिमाही समीक्षा से पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को एक प्रकार से खारिज कर दिया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने शनिवार को गरीबी तथा ऊंची खाद्य मुद्रास्फीति की बात की, जिससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना खत्म होने के नजरिए से देखा जा रहा है। सुब्बाराव ने कहा कि समाज का निचला वर्ग अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करता है। यह वर्ग ऊंची खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर अधिक चिंतित है। सुब्बाराव ने यहां सुरेश तेंदुलकर स्मृति व्याख्यान में कहा, 'हम गरीब तथा गरीबी के बारे में अपनी समझ में सुधार करना होगा।'

रिजर्व बैंक ने अप्रैल, 2012 से ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने इस माह पेश होने वाली समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती का संकेत दिया था। उन्होंने कहा कि सभी जिंसों विशेष रूप से फूड और कपड़ों के दाम बढ़ चुके हैं। महंगाई का समाज के सभी तबकों विशेष रूप से गरीबों पर अधिक असर दिखाई दे रहा है।

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