एनसीटीसी मामले में मोदी ने केंद्र की आलोचना की
| Sunday, 19 February 2012 19:11 |
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र की स्थापना के प्रस्ताव के विरोध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है, ''एकतरफा आदेश सिर्फ गलतफहमी पैदा करेगा।'' अपने पत्र में सरकार ने सिंह से अनुरोध किया है कि गृह मंत्रालय द्वारा जारी एनसीटीसी आदेश को वापस लिया जाए और व्यापक विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू की जाए। सरकार ने कहा, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण और आश्चर्यजनक है कि सुरक्षा से संबंधित एनसीटीसी आदेश बिना उचित विचार-विमर्श के जारी किया गया, जबकि सुरक्षा राज्य से जुड़ा मुद्दा है।'' सरकार ने लिखा, ''भारत के संविधान के तहत 'जन व्यवस्था' और 'पुलिस' के राज्य का विषय होने के मद्देनजर गृह मंत्रालय की यह कार्रवाई राज्यों के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण है।'' त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने कहा कि वक्त का तकाजा है कि राज्य और केंद्र सहयोग करें लेकिन एनसीटीसी का आदेश सिर्फ गलतफहमी पैदा करेगा। एनसीटीसी मुद्दे पर केंद्र पर हमला तेज करते हुए मोदी ने कहा कि यद्यपि संप्रग सरकार का दावा है कि सुरक्षा केंद्र और राज्यों की साझा जिम्मेदारी है लेकिन जब कानून बनाने की बारी आई तो उसने राज्यों से सलाह-मशविरा करना भी मुनासिब नहीं समझा। मोदी गृह मंत्री पी चिदंबरम के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे जिसमें कहा गया था कि सुरक्षा केंद्र और राज्यों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ''विगत कुछ वर्षों में संप्रग सरकार भारत के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है और इसके कारण देश को खतरनाक हालात का सामना करना पड़ सकता है।'' मोदी ने कहा कि अपनी ताजा पहल के तहत किसी भी राज्य सरकार से पूछे या चर्चा किए बिना रातों रात उन्होंने :केंद्र ने: राज्यों से कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी छीनने का प्रयास किया है। सरकार ने आतंकी समूहों के खिलाफ अभियानों में समन्वय करने के लिए आतंकवाद निरोधक निकाय को एक मार्च से शुरू करने का फैसला किया है। एनसीटीसी को गिरफ्तारी और तलाशी लेने की शक्तियां हैं। इन अभियानों के लिए उसकी एक अलग शाखा होगी। हालांकि, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा समेत विभिन्न राज्योंं ने इस कदम का विरोध किया है। |

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