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Friday, 27 January 2012

ग्लोबल बैंकों की भारतीय शाखाओं में व्यापक छंटनी​

ग्लोबल बैंकों की भारतीय शाखाओं में व्यापक छंटनी​

​मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


​यूरोजोन में आर्थक संकट का साया भरतीय बैंक सेक्टर पर गहराता जा रहा है।  ग्लोबल बैंकों की भारतीयशाखाओं में बड़े पैमाने पर छंटनी ​​ रही है। सिटि बैंक, बैंक आफ अमेरिका,एचएसबीसी,मेरिल लिंच और बार्कले में छंटनी का दौर जारी है।इन बैंकों की साख गिरती जारही है और ​​मूल  अमेरिकी बैंकों में नकदी का संकट है। ऩतीजतन भारत में इन बैंकों
ने कारोबार का दायरा घटाना शुरू कर दिया है।​
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक दो वर्ष पूर्व यूनान से शुरू हुआ ऋण संकट अभी तक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। यूरोपीय नेता इस संकट से
निबटने के लिए जी जान से जुटे हैं, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा है। ऋण संकट शुरू होने के बाद से बाजार में अविश्वास का माहौल है। लंदन के कई बड़े निवेशक बैंकों ने अपने परिचालन खर्चों में व्यापक कटौती शुरू कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि इस कदम से बैंकों में बड़े पैमाने पर छंटनी होना तय है।



मुंबई में मिसी खबरों के मुताबिक सिटी बैंक ने सौ कर्मचारियों की सेवाएं खत्म कर दी है जबकि एचएसबीसी में बीसियों करमचारियों को दरवाजा दिखाया जा रहा है। सिटी बैंक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ३०,००० कर्मचारियों की छंटनी का फैसला हुआ है।​


​इन बैंकों के प्रबंधन की दलील है कि सौदों में ढिलाई और घरेलू बैंकों की जबर्दस्त प्रतिद्वंदिता की वजह से यह कदम उठाना पड रहा है।मीडिया की खबरों में कहा गया है कि बैंक ऑफ अमेरिका पुनर्गठन योजना पर काम कर रहा है, जिससे हजारों और नौकरियां जा सकती हैं। सूत्रों का कहना है कि 'प्रोजेक्स न्यू बीएसी' के तहत व्यापक पुनर्गठन प्रक्रिया में हजारों और नौकरियां जा सकती
हैं। कुछ छंटनी का आंकड़ा 10,000 (बैंक के कुल कर्मचारियों के 3.5 प्रतिशत) तक पहुंच सकता है।
​​


ग्लोबल बैंकों की इस कार्रवाई के विपरीत भारतीय बैंकों में बड़े पैमाने पर नई भर्तियां हो रही हैं।मसलन पंजाब​ ​ नेशनल बैंक और युको बैंकों में करीब ४५ हजार नये लोगों की सेवाए इसी वित्तीय वर्ष में ली जानी है।


ूरोप के दो बड़े बैंकों में वैश्विक स्तर पर 11,500 कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। इसके पीछे प्रमुख वजह यूरोप के आरबीएस और सोसियटे जेनराले की पुनर्गठन की पहल है। यूरोपीय ऋण संकट के बीच बैकिंग विशेष तौर पर निवेश बैंकिंग गतिविधियों में मुश्किलों के कारण रोजगार में कटौती हो सकती है।

ब्रिटेन के अखबार फाइनेंसियल टाइम्स खबर के मुताबिक रायल बैंक आफ स्काटलैंड (आरबीएस) के 10,000 बैंकरों की नौकरी जाने का खतरा है क्योंकि इस सरकारी बैंक ने निवेश बैंकिंग से हाथ खींचने की विस्तृत योजना तैयार कर ली है। एक अलग खबर में अखबार ने कहा कि सोसियटे जेनराले अपने कापरेरेट और निवेश बैंक में 1,580 कर्मचारियों की छंटनी करने की योजना बना रहा है।

रॉयल बैंक आफ स्काटलैंड (आरबीएस) ने कहा कि अगले तीन साल में वह 3,500 से अधिक नौकरियां समाप्त करेगा। ब्रिटेन के इस सरकारी स्वामित्व वाले बैंक ने व्यापार के पुनर्गठन तथा निवेश बैंकिंग परिचालन में संकुचन के कारण यह फैसला किया है।

आरबीएस के बयान में कहा गया है कि वह अपनी कुछ गतिविधियों को बंद करेगा जबकि कुछ का आकार घटाएगा। बैंक की कैश इक्विटीज, कॉरपोरेट ब्रोकिंग, इक्विटी केपिटल मार्केट तथा विलय-अधिग्रहण बाजार से निकलने की योजना है। आरबीएस ने पिछले साल 2000 छंटनियां की थीं।




इस बीच गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने 2012 में वैश्विक श्रम
बाजार की निराशाजनक तस्वीर पेश की है। आईएलओ ने कहा है कि अगले 10 साल में
60 करोड़ नई नौकरियों का सृजन किए जाने की जरूरत है।


आईएलओ के महानिदेशक जुआन सोमाविया ने वैश्विक रोजगार रुख, 2012 रिपोर्ट में कहा है कि सरकारों के तमाम प्रयासों के बावजूद रोजगार का संकट कायम है। दुनियाभर में प्रत्येक तीन से एक श्रमिक या अनुमानत: 1.1 अरब लोग या तो बेरोजगार हैं या फिर गरीबी में जीवनयापन कर रहे हैं।

सोमाविया ने कहा, वास्तविक अर्थव्यवस्था में रोजगार का सृजन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों को आपसी सहयोग से निर्णयक तरीके से काम करते हुए निजी निवेश के रास्ते में आ रहे भय और अनिश्चितता को दूर करना चाहिए। इससे निजी क्षेत्र वैश्विक रोजगार सृजन का मुख्य इंजन फिर से चालू कर सकेगा।

आईएलओ ने कहा है कि 2011 में 15 से 24 साल के 7.48 करोड़ युवा बेरोजगार थे। 2007 के बाद से इस आंकड़े में 40 लाख से अधिक का इजाफा हुआ है।

यूरो क्षेत्र के ऋण संकट, ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में ठहराव और वित्तीय क्षेत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम और सख्त होने की आशंका में लंदन के वित्तीय क्षेत्र से 27 हजार नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
 
आर्थिक
स्थितियों का अध्ययन करने वाली संस्था सेंटर फॉर इकोनामिक एंड बिजनेस
रिसर्च (सीईबीआर) ने 2011 के लिए लंदन शहर में नौकरियों के पूर्वानुमान को
घटाकर 2,88,000 कर दिया है। वर्ष 1998 के बाद का यह न्यूनतम स्तर है।


सीईबीआर ने लंदन शहर में अप्रैल 2011 में 2,000 और 2012 में 3,000 अतिरिक्त नौकरियों के अवसर आने का अनुमान लगाया था, लेकिन अब वह इसमें गिरावट की बात कर रही है।