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Monday, 20 February 2012

किंगफिशर एअरलाइंस के कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं,40 उड़ानें रद्द !वेतन की मांग को लेकर अचानक हड़ताल!




किंगफिशर एअरलाइंस के कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं,40 उड़ानें रद्द !वेतन की मांग को लेकर अचानक हड़ताल!

जेट एयरवेज में काम करने वाले लोग जनवरी की सैलरी का अब तक इंतजार कर रहे हैं। दोनों कंपनियों में करीब 18,000 लोग काम करते हैं।

मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास


विमानन क्षेत्र की निजी कंपनी किंगफिशर के कर्मचारियों के आज बकाये वेतन की मांग को लेकर हडताल पर चले जाने के कारण इस एयरलाइंस को 40 उडाने रद्द करनी पडी जिसकी वजह से कई यात्रियों को मुश्किल का सामना करना पडा!मंदी की मार से जूझ रही जेट और किंगफिशर एयरलाइंस के स्टॉफ को वेतन के लाले पड़े हुए हैं। खबर है कि मंदी से हलकान हो चुकी ये दोनों एयरलाइंस अपने 18000 कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं कर रही है।

किंगफिशर एयरलाइंस से यात्रा कर रहे मुसाफिरों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों को तनख्वाह देने के पैसे नहीं । विमानों में ईंधन भरवाने के भी पैसे नहीं।कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें बीते तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों की हड़ताल का असर किंगफिशर की उड़ानों पर पड़ा है। अबतक 40 उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। इनमें से 16 उड़ानें मुंबई और 10 दिल्ली से थीं। उड़ान रद्द होने की वजह से सैकड़ों यात्री परेशान हैं। मशहूर लेखक चेतन भगत भी ऑस्ट्रेलिया में फंसे हुए हैं। उन्हें पर्थ से सिंगापुर जाना था लेकिन उड़ान रद्द होने की वजह से वो अभी तक पर्थ में ही फंसे हुए हैं। मालूम हो कि तीन महीने से किंगफिशर ने अपने स्टाफ को वेतन नहीं दिए हैं।जेट एयरवेज में काम करने वाले लोग जनवरी की सैलरी का अब तक इंतजार कर रहे हैं। दोनों कंपनियों में करीब 18,000 लोग काम करते हैं।

आर्थिक संकट से जूझ रही निजी विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस की कोलकाता से संचालित होने वाले सभी उडानों को आज से एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया है।

हालांकि खबर यह है कि  हांगकांग की एससी लॉवी किंगफिशर में 28 करोड़ डॉलर का निवेश कर सकती है। इस बारे में एयरलाइन के साथ उसकी बातचीत चल रही है। मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने यह जानकारी दी। अगर लॉवी किंगफिशर में निवेश करती है तो नकदी की कमी से जूझ रही किंग ऑफ गुड टाइम्स को नई जिंदगी मिल सकती है।लेकिन फिलहाल यह सौदा पटा नहीं है और किंगफिशर की माली हालत खस्ता होने की वजह से कर्मचारियों की शामत है।इसपर तुर्रा ​​यह कि खुले आसमान में गलाकाटू प्रतिद्वंद्विता की वजह से गाहे बगाहे किराए में कटौती करनी पड़ती है। लागत की परवाह किये बगैर।बहरहाल कॉस्ट बढ़ने और एविएशन माकेर्ट में प्राइसिंग की तीखी जंग से किंगफिशर के सामने नकदी का संकट पैदा हो गया है।जो उसके वजूद और कर्मचारियों की सेहत पर भारी पड़ रहा है।वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अगुआई वाले मंत्रिसमूह (जीओएम) ने मंगलवार को एयरलाइंस कंपनियों को जेट फ्यूल (एटीएफ) सीधे इम्पोर्ट करने की इजाजत दे दी,पर इसके लिए भी तो पैसे की दरकार है।

वित्तीय संकट से जूझ रही निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस का शुद्घ घाटा चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 75 फीसदी बढ़कर 444 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 254 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इस दौरान कंपनी की आय भी 5 फीसदी घटकर 1,547 करोड़ रुपये रही। लागत को कम करने के लिए कंपनी ने पिछली तिमाही में अपनी क्षमता में भी कटौती की है। इसके बावजूद कंपनी का खर्च 7 फीसदी बढ़कर 2,125 करोड़ रुपये रहा। इसके साथ ही कंपनी को अन्य मदों में भी 80 करोड़ रुपये का व्यय करना पड़ा, जिससे घाटा बढ़ा है।

किंगफिशर एयरलाइंस पर करीब 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। कंपनी कर्ज का बोझ कम करने के लिए संभावित साझेदार की तलाश कर रही है। साथ ही कंपनी कर्जदाताओं, लीज पर विमान देने वाली कंपनियों आदि के साथ भी बातचीत कर रही है।

पिछली तिमाही की शुरुआत में कंपनी ने कहा था कि वह किफायती कारोबारी मॉडल से बाहर निकलेगी और फुल सर्विस परिचालन पर ध्यान केंद्रित करेगी। बढ़ते घाटे के बारे में कंपनी ने कहा कि विमानन ईंधन की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के चलते लागत में इजाफा हुआ है।

दिसंबर तिमाही में किंगफिशर एयरलाइंस के साथ ही जेट एयरवेज और स्पाइसजेट को भी घाटा उठाना पड़ा है। सभी कंपनियों ने बढ़ती ईंधन लागत को घाटे की वजह बताई है। विमानन कंपनियों को विमानन ईंधन सीधे आयात की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में जरूरी कार्रवाई के लिए वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखा है।

भारी वित्तीय संकट में डूबी निजी क्षेत्र की विमान सेवा किंगफिशर एयरलाइन्स ने दुनिया की तीन बड़ी विमान कंपनियों के समूह 'वन वर्ल्ड एलायंस' में शामिल होने की योजना फिलहाल टाल दी है।तो दूसरी ओर  किंगफिशर एयरलाइंस को कर्ज देने वाले बैंकों ने शर्तें अब और कड़ी कर दी है। किंगफिशर के सबसे बड़े देनदार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एयरलाइन को प्रमोटरों से लोन गारंटी के एवज में दिए गए 100 करोड़ रुपये वापस लेने का निर्देश दिया है।

विजय माल्या और उनकी कंपनी यूबी होल्डिंग ने किंगफिशर एयरलाइन को मिले 7,000 करोड़ रुपये के कर्ज के लिए बैंक गारंटी देने के एवज में 100 करोड़ का कमीशन एयरलाइन के खाते से निकाला था। रिजर्व बैंक ने प्रोमोटरों के गारंटी के बदले में एयरलाइन से पैसा निकालने के इस तरीके को गलत बताते हुए इस पर एतराज भी जताया है।

सूत्रों के मुताबिक नए कर्ज के लिए गारंटी देने के मामले में विजय माल्या कमीशन न लेने के लिए तैयार हो गए हैं। लेकिन यह अब तक साफ नहीं हो पाया है कि पुराने हिसाब-किताब को कब तक और कैसे निपटाया जाएगा।


परेशानियां किंगफिशर एअरलाइंस का पीछा छोड़ती नहीं दिखतीं   किंगफिशर एयरलाइंस की देशभर में 40 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो गई है। इस वजह से यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल कोलकाता एयरपोर्ट पर तैनात किंगफिशर के कर्मचारी वेतन की मांग को लेकर अचानक हड़ताल पर चले गए। इसके बाद दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और दूसरे शहरों के कर्मचारी भी उनके समर्थन में आज हड़ताल पर हैं।किंगफिशर एअरलाइंस की मुंबई-दिल्ली-वाराणसी वाया खजुराहो की उड़ान आईटी 623 शनिवार को साढ़े सात घंटे विलंबित रहने के चलते इसकी वाराणसी से खजुराहो के लिए उड़ान निरस्त कर दी गई। विमान के एअरपोर्ट पर पहुंचने का समय दोपहर 12.20 बजे है जबकि उसका आगमन रात्रि आठ बजे हुआ। एअरलाइंस सूत्रों के मुताबिक विमान के विलंबित होने के पीछे संचालन की खामियां रहीं।

सूत्रों के मुताबिक किंगफिशर सीईओ संजय अग्रवाल ने यह कहते हुए कर्मचारियों को सेलरी नहीं दी कि पहले से ही अप्रत्याशित पेमेंट से जूझ रही है, ऐसे में उसके पास कर्मचारियों का पिछला बकाया वेतन देने के लिए धन नहीं है। किंगफिशर ने कुछ माह पहले अपनी माली हालत को खराब बताते हुए सरकार से बेल आउट पैकेज की मांग की थी। लेकिन किन्ही कारणों से उसे बेलआउट नहीं मिला था। इसके बाद किंगफिशर में काफी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी भी हुई लेकिन हालात ज्यों के त्यों हैं। मालूम हो किंगफिशर की खस्ता हालत के लिए ईंधन के बढ़ते दाम और इसके मालिक विजय माल्या की बजट संतुलन में असफलता को माना जा रहा है।

किंगफिशर एयरलाइन्स की उड़ानें रद्द होने का सिलसिला रविवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। आयकर विभाग द्वारा कंपनी के कुछ खातों पर रोक लगाए जाने के बीच कंपनी को कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

मुंबई से किंगफिशर एयरलाइन्स की 16 उड़ानें और दिल्ली से चार उड़ानें रद्द कर दी गईं। वहीं, कोलकाता से किंगफिशर की उड़ानें शुक्रवार रात्रि से ही रूकी पड़ी हैं। कंपनी कोलकाता से प्रतिदिन कम से कम सात उड़ानों का परिचालन करती है।

बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने की रपटें आने के बाद नागर विमानन महानिदेशालय ने निरस्त हुई उड़ानों और उड़ान में विलंब का ब्यौरा एकत्र करना शुरू कर दिया है और इन आधार पर कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाए या नहीं, इस पर वह निर्णय करेगा।

नागर विमानन महानिदेशक ईके भारत भूषण ने बताया कि हमें बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने की सूचना मिली है। वे उड़ान रद्द करने की सूचना देने को बाध्य हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर ये रपटें सही हैं तो इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें बाधित होना नियमों का उल्लंघन हैं। हम सभी केन्द्रों से सूचना एकत्र कर रहे हैं। एक बार यह मिल जाने पर हम निर्णय करेंगे कि हमें क्या करना है।

भूषण ने कहा कि डीजीसीए द्वारा अन्य सभी विमानन कंपनियों को संदेश भेजकर कहा गया है कि किंगफिशर द्वारा उड़ानें रद्द होने की वजह से हवाईअड्डों पर फंसे यात्रियों को वे अपने विमानों में जगह दें।

कंपनी ने उड़ानें रद्द होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति अगले चार दिन तक जारी रहेगी। कंपनी द्वारा उड़ानें रद्द करने के पीछे दिए गए कारणों में पक्षियों के विमानों से टकराने की वजह भी शामिल है। किंगफिशर एयरलाइन्स को 2010-11 में 1027 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था और नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी पर 7057.08 करोड़ रुपये का ऋण है।

मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार किंगफिशर एअरलाइंस को संकट से बाहर निकालने के रास्ते खोजेगी। इससे पहले एअरलाइन के मालिक विजय माल्या ने सवाल उठाया था कि क्या यह निजी एअरलाइंस का कर्तव्य है कि वह घाटे वाले मार्गों पर विमान उड़ाएं।उधर, बेलआउट पैकेज देने की खबरों पर विपक्ष की आलोचना के बाद तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री व्यालार रवि ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। इसके बाद फिर नये नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने  आर्थिक संकट से जूझ रही निजी क्षेत्र की उड़ान सेवा प्रदाता कम्पनी किंगफिशर को किसी भी तरह की सहायता देने से इनकार करते हुए कहा कि सरकारी कम्पनी एयर इंडिया को पुनर्गठित करने की जरूरत है।

एयर इंडिया और किंगफिशर एयरलाइंस जैसी संकटग्रस्त विमानन कंपनियों को राहत प्रदान करने के लिए सरकार ऎसे नीतिगत पैकेज पर काम कर रही है, केंद्र सरकार का दावा है कि एयर इंडिया और किंगफिशर एयरलाइंस जैसी संकटग्रस्त विमानन कंपनियों को राहत देने के लिए सरकार ऐसे नीतिगत पैकेज पर काम कर रही है, जिससे इस उद्योग को वित्तीय संकट से उबारा जा सके। इस तरह के पैकेज को तैयार करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मुनाफे में चल रही इंडिगो सहित सभी एयरलाइंस से अपनी वित्तीय स्थिति का डाटा देने को कहा है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि सरकार एयरलाइन उद्योग की मदद के लिए तरीका और रास्ता ढूंढेगी। हालांकि, इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा था कि निजी क्षेत्र की एयरलाइंस का प्रबंधन कुशलता के साथ किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विमानन उद्योग की दिग्गज हस्तियों ने उनसे मुलकात कर उद्योग के समक्ष पेश आ रही दिक्कतों से उन्हें अवगत कराया था। यह फैसला इसलिए भी लिया गया है कि बैंकों के एक गठजोड़ ने एयर इंडिया के लिए 18,000 करोड़ रुपए की ऋण पुनर्गठन योजना को मंजूरी दी है और साथ ही उसे 2,200 करोड़ रुपए का नया कर्ज देने पर भी सहमति बनी है।

किंगफिशर के सीईओ संजय अग्रवाल ने ई-मेल के जरिए एंप्लॉयीज को दिसंबर की सैलरी में हुई देर के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ' कुछ बड़े पेमेंट तत्काल करने जरूरी थे। ' कंपनी ने पिछली बार एंप्लॉयीज को नवंबर की सैलरी दी थी। एयरलाइंस पर 7,000 करोड़ से ज्यादा का लोन है।

किंगफिशर के एक सीनियर एंप्लॉयी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया, ' सीईओ कह रहे हैं कि हमें अभी सैलरी नहीं मिलेगी। इससे पहले खुद चेयरमैन (माल्या) सैलरी देने वादा कर चुके हैं। अगर चेयरमैन वादे से पीछे हट सकते हैं तो हम किस पर भरोसा करें। ' जनवरी में कंपनी के चेयरमैन और प्रमोटर विजय माल्या ने कहा था कि दिसंबर की सैलरी जनवरी आखिर तक दे दी जाएगी।

जेट एयरवेज ने यह नहीं बताया है कि जनवरी की सैलरी कब तक मिलेगी। हालांकि, कंपनी 15 फरवरी (बुधवार) को सैलरी दे सकती है। जेट के प्रवक्ता ने इस बारे में ईटी के ई-मेल का जवाब नहीं दिया। किंगफिशर को भेजे ई-मेल का भी जवाब नहीं मिला। चर्चा यह भी है कि इंडिगो 15 फरवरी तक एयरलाइंस से जुड़ने वाले किंगफिशर के पायलटों को जॉइनिंग बोनस ऑफर कर रही है।

सैलरी में देरी के बाद किंगफिशर के कुछ पायलटों ने एयर सेफ्टी का मुद्दा उठाया है। डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने हाल में किंगफिशर का फाइनैंशल ऑडिट किया था। वह देख रहा था कि कहीं फाइनैंशल दिक्कतों का असर सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर तो नहीं पड़ रहा है।

किंगफिशर को हाल में पार्टनर एयरलाइंस को टिकट सेल्स के बकाए का भुगतान नहीं करने पर आईएटीए के जेनेवा क्लीयरेंस हाउस से सस्पेंड (अब इसे रद कर दिया गया है) कर दिया गया था। वहीं, जनवरी में किंगफिशर के करीब 180 पायलटों ने मैनेजमेंट को लिखा था कि अगर जल्द जनवरी की सैलरी नहीं दी गई तो वे काम पर नहीं आएंगे।


एयर इंडिया सहित सभी सात एयरलाइंस ने इस सप्ताहांत जरूरी सूचना उपलब्ध करा दी है। मंत्रालय ने एयरलाइन कंपनियों से जो सूचनाएं मांगी हैं उनमें कुल वित्तीय स्थिति, उन पर वित्तीय संस्थानों का बकाया राशि और कार्यशील पूंजी की जरूरत शामिल हैं।

सरकार ने नागरिक उड्डयन सचिव नसीम जैदी की अध्यक्षता में एक कार्यसमूह का गठन किया है, जो इन आंकड़ों की समीक्षा करेगा और एयरलाइंस की समस्याओं को जानेगा। सूत्रों ने बताया कि इस मुद्दे पर जल्द ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा एवं बैंक विभाग के बीच विचार-विमर्श होगा। उन्होंने बताया कि इस विचार-विमर्श का मकसद उद्योग के लिए कुल नीतिगत उपाय करना है, क्योंकि सरकार निजी क्षेत्र की एयरलाइंस को संकट से बाहर निकालने के लिए सीधी वित्तीय मदद उपलब्ध नहीं करा सकती।

इंडिगो, एयर इंडिया, जेट एयरवेज, जेटलाइट, किंगफिशर, स्पाइसजेट और गो एयर ने मंत्रालय द्वारा मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराई हैं। एशिया पैसिफिक एविएशन ने अनुमान लगाया है कि मार्च 2012 में समाप्त होने वाले वर्ष में देश की सभी एयरलाइंस को 2.5 से 3 अरब डॉलर का नुकसान होगा। इसमें आधा से ज्यादा नुकसान अकेले एयर इंडिया को उठाना पड़ेगा।


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Palash Biswas
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