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Tuesday, 2 April 2013

मारुती मजदूरों का बढ़ा समर्थन



मारुती मजदूरों का बढ़ा समर्थन

मंत्रियों और सरकार को न कुछ दिखाई देता है, न कुछ सुनायी देता है. मारुति मैनेजमेंट ने पुलिस के साथ मिलकर झूठे केस में षड्यंत्रपूर्ण ढंग से फंसाकर 147 मजदूरों को जेल भेज दिया है और 65 मजदूरों के गैर ज़मानती वारंट जारी करवा दिए ...

मंत्रियों और सरकार को न कुछ दिखाई देता है, न कुछ सुनायी देता है. मारुति मैनेजमेंट ने पुलिस के साथ मिलकर झूठे केस में षड्यंत्रपूर्ण ढंग से फंसाकर 147 मजदूरों को जेल भेज दिया है और 65 मजदूरों के गैर ज़मानती वारंट जारी करवा दिए ...
मारुति सुजुकी मजदूरों की गिरफ्तारी और उन पर ढाये जा रहे जुल्मों के खिलाफ हरियाणा के कैथल में चल रहे आमरण अनशन को लगातार समर्थन मिल रहा है. अनशन के पांचवे दिन जन संघर्ष मंच हरियाणा, इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी नौजवान सभा, मनरेगा मजदूर यूनियन, बिगुल मजदूर दस्ता, निर्माण कार्य श्रमिक यूनियन, नैक्डोर, पीयूडीआर, समता मूलक महिला संगठन, स्त्री मजदूर संगठन, लाल झंडा भट्टा मजदूर संगठन, लोक स्वराज संगठन, छात्र संगठन एसओएसडी आदि संगठनों ने आन्दोलन को समर्थन दिया.
maruti-violence
मारुती मजदूरों को समर्थन देने वाले संगठनों ने जब कैथल श्रम उपायुक्त से मिलने की कोशिश की, तो उन्होंने इंकार कर दिया. इस व्यवहार से क्षुब्ध प्रतिनिधियों ने श्रम उपयुक्त कार्यालय के सामने ही धरने पर बैठने का निर्णय लिया. धरने पर बैठे लोगों ने अनशनकारी मजदूरों को धरनास्थल से उठाने व उन पर व अन्य मजदूरों पर जान से मारने की धमकी देने तथा प्लाट पर अवैध कब्ज़ा करने जैसे झूठे मुक़दमे लगाने की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतान्त्रिक रूप से मजदूरों के हकों की लड़ाई पर हमला है.
जब विभिन्न जन संगठन और मजदूर उपायुक्त कार्यालय पर 3 घंटे तक डटे रहे, तब जाकर उपायुक्त को मजबूरन नीचे आना पड़ा. दबाव में उन्होंने अनशनकारी मजदूरों पर बने मुकदमों को जाँच के दौरान रद्द करने का आश्वासन दिया. साथ ही एसपी को निर्देश दिया कि वह मामले की जाँच कर मुक़दमे को रद्द करें. जनता के सामने श्रम उपायुक्त ने मजदूरों को कार्यालय के सामने बैठने की अनुमति दी.
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मंत्री रणदीप सुरजेवाला व सरकार पुलिस की मदद से भूख हड़ताल तुड़वाने की कुटिल चाल चल रहे हैं, परन्तु मजदूर अपने मांगों पर अडिग हैं. मंत्रियों व सरकार को न कुछ दिखाई देता है, न कुछ सुनायी देता है. मारुति मैनेजमेंट ने पुलिस के साथ मिलकर झूठे केस में षड्यंत्रपूर्ण ढंग से फंसा कर 147 मजदूरों को जेल भेज दिया है और 65 मजदूरों के गैर ज़मानती वारंट जारी करवा दिए.
मजदूरों की मांग है कि हरियाणा सरकार घटना की झूठी रिपोर्ट को ख़ारिज कर नए सिरे से निष्पक्ष व उच्चस्तरीय न्यायिक जाँच करवाए. वक्ताओं ने सरकार व मंत्री रणदीप सुरजेवाला को चेतावनी देते हुए कहा कि समय रहते मारुति मजदूरों की जायज मांगों को माना जाए व उनकी समस्या का समाधान निकला जाए. आमरण अनशन पर बैठे मजदूरों का अनशन खुलवाया जाए, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. ऐसा न होने पर जन संगठन, ट्रेड यूनियन, छात्र, कर्मचारी व महिला संगठन इस आन्दोलन को प्रदेश स्तर पर ले कर जायेंगे. प्रदर्शनकारियों ने आम जनता से भी संघर्षरत मारुति मजदूरों का साथ देने का आह्वान किया.