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Saturday, 21 January 2012

वोडाफोन को 11,000 करोड़ की छूट, खुर्शीद से मिले प्रणव:वोडाफोन को राहत, सरकार को 3000 करोड़ का फटका,कर कानून बदलने की शुरू हो सकती है कवायद!


वोडाफोन को 11,000 करोड़ की छूट, खुर्शीद से मिले प्रणव:वोडाफोन को राहत, सरकार को 3000 करोड़ का फटका,कर कानून बदलने की शुरू हो सकती है कवायद!




उच्चतम न्यायालय ने आज एक दूरगामी महत्व के निर्णय में बंबई उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज कर दिया दिया जिसमें वोडाफोन को दूरसंचार कंपनी हचिसन से भारत में उसके मोबाइल सेवा कारोबार को खरीदने के सौदे को लेकर 11,000 करोड़ रुपए का आयकर अदा करने का आदेश दिया गया था।

वोडाफोन पर टैक्स देनदारी के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने देश में आयकर कानूनों को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। विदेश में पंजीकृत कंपनियों के सौदों को आयकर विभाग के दायरे से बाहर मान लेने के बाद अब सरकार पर अपने मौजूदा कानून बदलने का दबाव बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में सरकार से ऐसे फेरबदल को कहा है।

वोडाफोन के फैसले से विदेश में पंजीकृत कंपनियों के लिए शेयर खरीद-फरोख्त सौदों को भारत में आयकर की देनदारी से बचने का रास्ता खुल जाएगा। भले ही देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिहाज से यह राहत भरा फैसला हो, लेकिन सरकार के लिए इसे राजस्व के बड़े नुकसान के तौर पर भी देखा जा रहा है। यही वजह है कि फैसला आने के तुरंत बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बैठक बुलाकर मामले की त्वरित समीक्षा की। बाद में कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के साथ मिलकर मुखर्जी ने उनकी राय ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इस फैसले की समीक्षा के लिए एक दस सदस्यीय समिति भी गठित कर दी है। समिति भविष्य के लिए रणनीति भी सुझाएगी।
जानकारों की राय में यह मामला विदेश में पंजीकृत विदेशी कंपनियों के बीच तक ही सीमित नहीं रहेगा। अगर सरकार अपने कानून में बदलाव करती है तो उसका असर उन भारतीय कंपनियों पर भी होगा जो विदेश में जाकर वहां पंजीकृत कंपनियों के जरिए अधिग्रहण कर रही हैं। माना जा रहा है कि सरकार नए प्रत्यक्ष कर कानून में इस तरह के प्रावधान कर सकती है।
वैसे, उद्योग जगत मोटे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश है। फिक्की के महासचिव डा राजीव कुमार ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह फैसला विदेशी निवेशकों में भरोसा पैदा करेगा। कारपोरेट सौदों से जुड़े जानकारों का मानना है कि जो विदेशी कंपनियां इस तरह के सौदों के बाद कर विवादों में उलझी हैं, उन्हें इस फैसले का फायदा मिलेगा। इनमें फोस्टर को खरीदने वाली एबी मिलर्स, शांता बायोटेक का अधिग्रहण करने वाली सनोफी एवेंटिस, क्राफ्ट फूड का कैडबरी सौदा और वेदांता का केयर्न इंडिया को खरीदने का सौदा शामिल है।


सरकार के लिए खतरे की घंटी
वृष्टि बेनीवाल / नई दिल्ली January 20, 2012

उच्चतम न्यायालय के लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वोडाफोन के पक्ष में दिए गए फैसले से सरकार को 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कर राजस्व का नुकसान हो सकता है। वोडाफोन प्रकरण में आए इस फैसले के आधार पर भविष्य में इस तरह के अन्य सौदों पर भी निर्णय लिया जाता है तो सरकार के राजस्व घाटे में और इजाफा हो सकता है, लेकिन सरकार भावी सौदों पर इस फैसले के नकारात्मक असर को कम करने के लिए कर कानूनों में संशोधन कर सकती है।
प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के प्रावधानों के तहत संभावित निवेशकों को वोडाफोन मामले से लाभ नहीं मिल सकता, क्योंकि डीटीसी के चलते सीमापार सौदों से होने वाली आय से भारत में भी कर की देनदारी बनेगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि डीटीसी लागू होने में देरी के कारण इस बीच वित्त मंत्रालय आगामी बजट में आयकर अधिनियम में भविष्य में होने वाले सभी लेनदेन से संबंधित प्रावधान भी शामिल कर सकता है।
डेलॉयट हैस्किंस ऐंड सेल्स की साझीदार नीरू आहूजा ने कहा, 'जहां इस फैसले ने सरकार को एक बड़े राजस्व से वंचित कर दिया, वहीं यह जीत आगे कुछ ही देर तक कायम रह सकती है। बजट 2012 में कर कानूनों में जनरल ऐंटी अवॉयडेंस रूल्स (जीएएआर) और कुछ संशोधन को जोड़े जाने का अनुमान है।'
प्राइसवाटरहाउसकूपर्स के कार्यकारी निदेशक संदीप लड्डा ने कहा कि डीटीसी में इस तरह के लेनदेन से संबंधित एक प्रस्ताव शामिल है, इसलिए विधेयक के लागू होने के बाद इस आदेश का लंबे समय तक औचित्य नहीं रहेगा। अन्स्र्ट ऐंड यंग के कर साझेदार हितेश शर्मा ने कहा, 'अभी ऐसे कई क्षेत्र हैं जिन पर आगे गौर किया जाएगा। कानून में ऐसा संशोधन भी किया जा सकता है जो पुराने सौदों पर भी लागू होगा।' विदेश में सौदों पर 10 से 20 फीसदी कर लगाया जाता है। आइडिया सेल्युलर-एटीऐंडटी (15 करोड़ डॉलर), जीई-जेनपैक्ट (50 करोड़ डॉलर), मित्सुई-वेदांत (98.1 डॉलर) , सैबमिलर-फॉस्टर्स, सनोफी अवेंतिस-शांता बायोटेक (77 करोड़ डॉलर) इस तरह के अन्य विवादित मामले हैं।
इस फैसले से वित्त मंत्रालय की भी मुश्किलें बढ़ी हैं जो पहले से ही इस साल राजस्व में कमी की आशंकाओं से जूझ रहा है। इस फैसले के तुरंत बाद वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और मंत्रालय के आला अधिकारियों से मुलाकात की। इस आदेश के परीक्षण के लिए कर िवभाग के आला अधिकारियों का एक कोर समूह भी बनाया गया है।
बैठक के बाद खुर्शीद ने संवाददाताओं से कहा, 'सरकार को अपने महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों के राजस्व की जरूरत है और वास्तव में सब कुछ कानून के मुताबिक ही हुआ है। हम सभी पहलुओं पर गौर करेंगे।' केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन एम सी जोशी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि सरकार इस आदेश को पढऩे के बाद ही आगे की रणनीति बनाएगी।
http://hindi.business-standard.com/hin/storypage.php?autono=55070

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम फैसला देते हुए कहा कि विदेशी जमीन पर हुए सौदों पर भारत में टैक्स नहीं लग सकता। इसके साथ ही उसने देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन को बहुत बड़ी राहत दे दी है।

वोडोफोन कर मामले में उच्चतम न्यायालय का वोडाफोन कंपनी के पक्ष में आया फैसला और उसके राजस्व पर असर से चिंतित वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। खुर्शीद ने दिल्‍ली में बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा फिलहाल हम सिर्फ इतना जानते हैं कि यह सर्वसम्मत फैसला आया है जो आयकर विभाग के खिलाफ गया है।

उन्‍होंने कहा हमें इसका परीक्षण करना है। हमें निश्चित तौर पर सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए राजस्व की जरूरत है और जिस दूसरी चीज की जरूरत है वह है कानून में सुनिश्चितता। हमें दोनों क्षेत्रों का ही परीक्षण करना होगा। इस फैसले से सरकारी खजाने को 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। ऐसे समय जब सरकार पहले ही आर्थिक क्षेत्र की नरमी से तंगी में यह नुकसान परेशानी बढ़ाने वाला होगा।

उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर दिया और आयकर विभाग से कहा कि वह अगले दो महीने में वोडाफोन इंटरनेशनल होल्डिंग्स द्वारा जमा 2,500 करोड़ रुपए चार फीसद ब्याज के साथ लौटाए। उच्चतम न्यायालय ने अपनी रजिस्‍ट्री से भी कहा कि वोडाफोन द्वारा जमा 8,500 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी अगले चार हफ्तों में वापस करे।

वोडाफोन इंटरनैशनल होल्डिंग को भारत के आयकर विभाग के साथ कानूनी लड़ाई में बड़ी सफलता मिली है । सर्वोच्च न्यायालय में वोडाफोन को राहत मिलने के साथ ही कंपनी के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) का रास्ता अब साफ हो गया है। वोडाफोन ने मई, २००७ में ११.२ अरब डॉलर के सौदे में नीदरलैंड और केमैन द्वीप की कंपनियों के जरिए हांगकांग के हचिसन समूह से हचिसन-एस्सार लिमिटेड में ६७ फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। आयकर विभाग ने कहा था कि इस सौदे के जरिए भारत में पूंजीगत लाभ कमाया गया इसलिए वोडाफोन को कर का भुगतान करना होगा। वोडाफोन-एस्सार की मूल कंपनी ब्रिटेन की वोडाफोन ग्रुप पीएलसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीफ करते हुए कहा कि इस फैसले से भारत में उनका विश्वास और बढ़ा है। वोडाफोन के वकील हरीश साल्वे और अभिषेक मनु सिंघवी थे।

कंपनी पर सरकार द्वारा किए गए भारी कर दावे की वजह से भारत सहित विदेश में भी निवेशक चिंतित थे। एसेंटिस कंसल्टिंग के सह संस्थापक और प्रधान विश्लेषक आलोक शिंदे ने कहा, 'हालांकि भारतीय इकाई का आईपीओ और मुख्य कंपनी पर कर का बोझ दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं। लेकिन यदि कंपनी आईपीओ लाती तो वह कर दावे से प्रभावित भी हो सकता था।' बहरहाल, चर्चा है कि वोडाफोन ने आईपीओ के लिए निवेश बैंकरों की नियुक्ति भी कर दी है। लेकिन इस बावत जानकारी मांगने पर कंपनी ने कुछ टिप्पणी करने से इनकार किया।
वोडाफोन पीएलसी के प्रवक्ता सिमोन गॉरडॉन ने कहा, 'यह (आईपीओ) कई कारकों पर निर्भर करता है।'

कैपिटल गेंस टैक्स मामले में वोडाफोन की आज बहुत बड़ी जीत हुई है। चीफ जस्टिस एस एच कपाडिया के नेतृत्व में कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने बहुमत से यह फैसला दिया कि टैक्स डिपार्टमेंट को इस तरह से टैक्स लेने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने 2-1 से यह फैसला दिया है और कहा कि टैक्स अधिकारी वोडाफोन से वसूले गए 2500 करोड़ रुपये 4 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटा दे। यह रकम करीब 3000 करोड़ रुपये बैठेगी। उसका कहना था कि जिस देश में यह सौदा हुआ है वहां भारत के टैक्स कानून लागू नहीं होते।



बांबे हाई कोर्ट ने वोडाफोन की याचिका जब सुनवाई के लिए ली थी तो उसने यह रकम जमा करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से वोडाफोन को 11,217 करोड़ रुपये की बचत हो गई है जो उसे भारत में इनकम टैक्स के रूप में देना पड़ता। कोर्ट का मानना है कि यह मामला टैक्स चोरी का नहीं बल्कि टैक्स प्लानिंग का है।



ब्रिटिश कंपनी वोडाफोन पीएलसी ने भारत में अपनी टेलीकॉम सेवा शुरू करने के लिए हचिसन से एक सौदा विदेशी जमीन पर किया था। इस पर इनकम टैक्स अधिकारियों ने उस पर टैक्स लगाया। कंपनी ने इसका विरोध किया और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।  



यह फैसला इसलिए भी अहम है कि कई कंपनियों ने विदेशों में सौदे किए हैं और उन पर भी भारी भरकम टैक्स की तलवार लटकी हुई थी। लेकिन इससे सरकार की चिंता बढ़ गई है कि इस तरह से बैक डोर से होने वाले सौदों से उसे काफी नुकसान होगा और उसके राजस्व में कमी होगी। इस फैसले से विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने में सहूलियत होगी। कई कंपनियां बाहर में आपसी गठबंधन करती हैं और उनके लिए यह बढ़िया खबर है।

उच्चतम न्यायालय ने आज एक दूरगामी महत्व के निर्णय में बंबई उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज कर दिया दिया जिसमें वोडाफोन को दूरसंचार कंपनी हचिसन से भारत में उसके मोबाइल सेवा कारोबार को खरीदने के सौदे को लेकर 11,000 करोड़ रुपए का आयकर अदा करने का आदेश दिया गया था।