जाति का उन्मूलन: कल, आज और कल<http://www.junputh.com/2014/02/blog-post_14.html>
<https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg0IZ0R5UlQfdf83L4dmmhyiLlZ4t4tOIeswjclud-sPuI8m12Sd6n3eqg3qv3r1elJNSUpljnm_6oZ_OXx84UOg7Sdxt1XPvBtdXtv0oyJVc6WQcb8eEiiR6tulQkh7FV3R2sx2MXrwxKp/s1600/Anand-Teltumbde.jpg>*आनंद
तेलतुम्बड़े *
*आनंद तेलतुम्बड़े हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण चिंतकों में एक हैं। पिछले
दिनों उनके कहे-लिखे पर काफी विवाद खड़ा किया गया है। प्रस्तुत लेख उन्होंने
''समयांतर'' के लिए लिखा था जिसका अनुवाद अभिषेक श्रीवास्तव ने किया है। यह
समयांतर के फरवरी अंक में प्रक
Friday, 28 February 2014
ममता को मोदी का विकल्प बनाने क�� तैयारियों पर जोरों से जुटे अन���न
[image: ममता को मोदी का विकल्प बनाने की तैयारियों पर जोरों से जुटे अन्ना]
ममता को मोदी का विकल्प बनाने की तैयारियों पर जोरों से जुटे अन्ना
[image: HASTAKSHEP]
कोलकाता/ नई दिल्ली। तीसरे मोर्चे की कवायद से अलग-थलग पड़ गयी बंगाल की
मुख्यमंत्री *ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश
करने के लिये गांधीवादी नेता अन्ना हजारे पूरी ताकत के साथ जुट गये हैं।*हाला
ममता को मोदी का विकल्प बनाने की तैयारियों पर जोरों से जुटे अन्ना
[image: HASTAKSHEP]
कोलकाता/ नई दिल्ली। तीसरे मोर्चे की कवायद से अलग-थलग पड़ गयी बंगाल की
मुख्यमंत्री *ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश
करने के लिये गांधीवादी नेता अन्ना हजारे पूरी ताकत के साथ जुट गये हैं।*हाला
परिवार वाद ही आ���े चलकर जातिवाद में विकसित होत��� है,बहस तलब- जाति उन्मूलन को बु���ियादी एजेण्डा बना
[image: परिवार वाद ही आगे चलकर जातिवाद में विकसित होता है]
परिवार वाद ही आगे चलकर जातिवाद में विकसित होता है
*बहस तलब- जाति उन्मूलन को बुनियादी एजेण्डा बनाये बगैर हम न वर्ग जाति
वर्चस्व टल्ली लगाकर तोड़ सकते हैं और न पूँजी निर्देशित राज्यतन्त्र को बदलने
की कोई पहल कर सकते हैं*
*यदि देश के सारे गरीब एक हो गये तो ?*
पलाश विश्वास
बहस की शुरुआत करें, इससे पहले एक सूचना
परिवार वाद ही आगे चलकर जातिवाद में विकसित होता है
*बहस तलब- जाति उन्मूलन को बुनियादी एजेण्डा बनाये बगैर हम न वर्ग जाति
वर्चस्व टल्ली लगाकर तोड़ सकते हैं और न पूँजी निर्देशित राज्यतन्त्र को बदलने
की कोई पहल कर सकते हैं*
*यदि देश के सारे गरीब एक हो गये तो ?*
पलाश विश्वास
बहस की शुरुआत करें, इससे पहले एक सूचना
इन चीखों का जवा��� चाहिए हमें
[image: इन चीखों का जवाब चाहिए हमें]
इन चीखों का जवाब चाहिए हमें
*क्रान्ति का स्वर हाशिये पर है, भ्रांतियाँ वर्चस्व को मजबूती दे रही हैं*
*पलाश विश्वास*
उत्तराखण्ड से अबकी सुधा राजे ने आवाज दी है, जो बहस तलब है
*जब गली में चीखती आवाज़ें गूँजी तुम नहीं उठे।*
*जब घर में सिसकने की आवाजें गूँजी तुम नहीं उठे।।*
*जब खुद तुम्हारे हृदय में चीखने के स्वर गूँजे तब भी तुम न
इन चीखों का जवाब चाहिए हमें
*क्रान्ति का स्वर हाशिये पर है, भ्रांतियाँ वर्चस्व को मजबूती दे रही हैं*
*पलाश विश्वास*
उत्तराखण्ड से अबकी सुधा राजे ने आवाज दी है, जो बहस तलब है
*जब गली में चीखती आवाज़ें गूँजी तुम नहीं उठे।*
*जब घर में सिसकने की आवाजें गूँजी तुम नहीं उठे।।*
*जब खुद तुम्हारे हृदय में चीखने के स्वर गूँजे तब भी तुम न
अमरकांत जी के अ���सान के बहाने ब��ी हुई पृथ्वी की शोकगाथ
अमरकांत जी के अवसान के बहाने बची हुई पृथ्वी की शोकगाथा
पलाश विश्वास
<https://www.facebook.com/alokputul>
पृथ्वी अगर मुक्त बाजार संस्कृति से कहीं बची है तो इलाहाबाद में।पिछले दिनों
हमारे फिल्मकार मित्र राजीव कुमार ने ऐसा कहा था। दूसरे फिल्मकार मित्र और
उससे ज्यादा हमारे भाई संजय जोशी से जब उनकी पुश्तैनी सोमेश्वर घाटी पर फिल्म
बनाने की बात कही हमने तो दिल्ली में बस गये संजू ने
पलाश विश्वास
<https://www.facebook.com/alokputul>
पृथ्वी अगर मुक्त बाजार संस्कृति से कहीं बची है तो इलाहाबाद में।पिछले दिनों
हमारे फिल्मकार मित्र राजीव कुमार ने ऐसा कहा था। दूसरे फिल्मकार मित्र और
उससे ज्यादा हमारे भाई संजय जोशी से जब उनकी पुश्तैनी सोमेश्वर घाटी पर फिल्म
बनाने की बात कही हमने तो दिल्ली में बस गये संजू ने
अमरकांत जी के अ���सान के बहाने ब��ी हुई पृथ्वी की शोकगाथ
अमरकांत जी के अवसान के बहाने बची हुई पृथ्वी की शोकगाथा
पलाश विश्वासएक जरुरी नोटः आज सुबह पुराने मित्र उर्मिलेश के फोन से नींद खुली।मुझे स्मृतिभ्रंश की वजह से इस आलेख में तथ्यात्मक गलतियों की आशंका ज्यादा थीं।
आज सुबह दुबारा इसके टुकड़े मोबाइल पाठकों के लिए फेसबुक पर दर्ज कराते हुए छिटपुट गलतियां नजर भी आयीं। यथासंभव दुरुस्त करके यह आलेख कुछ देर
पलाश विश्वासएक जरुरी नोटः आज सुबह पुराने मित्र उर्मिलेश के फोन से नींद खुली।मुझे स्मृतिभ्रंश की वजह से इस आलेख में तथ्यात्मक गलतियों की आशंका ज्यादा थीं।
आज सुबह दुबारा इसके टुकड़े मोबाइल पाठकों के लिए फेसबुक पर दर्ज कराते हुए छिटपुट गलतियां नजर भी आयीं। यथासंभव दुरुस्त करके यह आलेख कुछ देर
Thursday, 27 February 2014
इतिहास पर उनका ���र सुवचन हास्यास्पद है।अर्थशास्त्र पर उनके स���रे तथ्य गलत है��। विदेशनीति पर उनक
इतिहास पर उनका हर सुवचन हास्यास्पद है।अर्थशास्त्र पर उनके सारे तथ्य गलत
हैं। विदेशनीति पर उनकी सिंहदहाड़ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक। चीन
के खिलाफ जो मोर्चा उन्होंने खोल दिया है,वह न केवल नेहरु की ऐतिहासिक भूल की
आत्मघाती पुनरावृत्ति है,बल्कि वाजपेयी की राजनयिक उपलब्धियों का गुड़ गोबर
हैं।
पलाश विश्वास
Navbharat Times Online <https://www.facebook.com/navbharattimes>
राजनाथ सिंह द
हैं। विदेशनीति पर उनकी सिंहदहाड़ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक। चीन
के खिलाफ जो मोर्चा उन्होंने खोल दिया है,वह न केवल नेहरु की ऐतिहासिक भूल की
आत्मघाती पुनरावृत्ति है,बल्कि वाजपेयी की राजनयिक उपलब्धियों का गुड़ गोबर
हैं।
पलाश विश्वास
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राजनाथ सिंह द
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