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Monday, 25 March 2013

सीबीआई की तत्परता, समर्थन वापसी के दो दिन बाद ही छापे!अल्पमत सरकार के लिए बहुमत जुटाने के लिए और क्या क्या होता है देखते रहिय


सीबीआई की तत्परता, समर्थन वापसी के दो दिन बाद ही छापे!अल्पमत सरकार के लिए बहुमत जुटाने के लिए और क्या क्या होता है देखते रहिये।

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​

सीबीआई की तत्परता, समर्थन वापसी के दो दिन बाद ही छापे!द्रमुक द्वारा संप्रग सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के दो दिन बाद सीबीआई ने आज पार्टी प्रमुख एम करुणानिधि के पुत्र एमके स्टालिन के आवास समेत 19 स्थानों पर छापेमारी की। केंद्रीय जांच एजंसी सीबीआई से जांच कराने की मांग राज्यों में खूब सुनायी पड़ती है। हर मामले में सीबीआई जांच परंपरा सी बन गयी है।​​ सीबीआई जांच के दबाव में क्षत्रपों की नकेल साधने का आरोप भी नया नहीं है। आरोप लगाने वाले राजनेता भी हेलीकाप्टर सौदे में सीबीआई​ ​ जांच पर कोई सवाल खड़े नहीं करते जबकि इस मामले के फैक्ट शीट में महामहिम राष्ट्रपति का नाम है, जिन्होने बतौर तत्कालीन रक्षा​ ​ मंत्री इस सौदे को अंतिम रुप दिया था।वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए हुए 3,600 करोड़ रुपए के विवादित करार के बाबत रक्षा मंत्रालय को अगस्ता वेस्टलैंड और कथित बिचौलिये क्रिश्चियन मिचेल के बीच हुआ 'अनुबंध' हासिल हुआ है।सूत्रों ने बताया कि आंग्ल-इतालवी कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड ने यह बताने के लिए 'अनुबंध' दिया है कि करार में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई। कंपनी ने मंत्रालय से कहा है कि यह संकेत देने के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है कि मिचेल और अन्य लोग किसी गलत काम को अंजाम देने के लिए उसकी ओर से बहाल किए गए थे।आरोप है कि इतालवी नागरिक ग्विडो हेश्के को ब्रिटिश नागरिक मिचेल के साथ अगस्ता वेस्टलैंड की मूल कंपनी फिनमेकेनिका द्वारा बहाल किया गया था ताकि वे आंग्ल-इतालवी कंपनी के पक्ष में करार का रुख मोड़ सकें।इतालवी अभियोजकों के मुताबिक, अगस्तावेस्टलैंड के पक्ष में करार का रुख मोड़ने के लिए कथित तौर पर 362 करोड़ रुपए की रिश्वत अदा की गयी। भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी एवं तीन अन्य के खिलाफ दायर प्राथमिकी में मिचेल को भी नामजद आरोपी बनाया गया है।

अल्पमत सरकार के लिए बहुमत जुटाने के लिए और क्या क्या होता है देखते रहिये!

क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है। ममता दीदी ने इस नाजुक मौकेप र समर्थन का संकेत तो दे दिया , लेकिन मुलायम कठोर होने लगे हैं। देखना है कि सीबीआई के आगे और किस किस के खिलाफ​ ​ कब कब इस्तेमाल होता है, जिसके लिए हम लोग अभ्यस्त हैं।

माकपा ने कहा कि द्रमुक नेता एम के स्टालिन के आवास पर छापे की कार्रवाई पार्टी द्वारा संप्रग सरकार से समर्थन वापस लिये जाने के 24 घंटे के भीतर की गयी और संप्रग को समर्थन कर रही पार्टियों के लिए यह स्पष्ट संकेत है ।माकपा नेता सीताराम येचुरी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि द्रमुक के समर्थन वापसी के 24 घंटे के भीतर छापे मारे गये इसलिए सीबीआई को 'कांग्रेस ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन' ही कहा जा सकता है ।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी इस घटना से पल्ला झाड लिया । जब सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री को ही नहीं पता कि उनकी सरकार क्या कर रही है तो यह काफी दु:खद बात है ।येचुरी ने कहा कि सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों को भी नहीं पता है कि छापे का आदेश किसने दिया । छापे को वही रूकवा सकता है, जिसने इस तरह की कार्रवाई का आदेश दिया । उन्होंने चुटकी ली कि सीबीआई के छापे संप्रग सरकार को समर्थन कर रही पार्टियों के लिए स्पष्ट संकेत है ।सरकार की स्थिरता के बारे में एक सवाल के जवाब में येचुरी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वापसी के बाद ही यह अल्पमत वाली सरकार बन गयी थी । येचुरी इस सवाल को टाल गये कि क्या वाम दल सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे ।

भाजपा के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने द्रमुक नेता एम के स्टालिन के घर सीबीआई के छापों की कार्रवाई बंद होने पर केन्द्र की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सवाल किया कि यदि सीबीआई सिर्फ अपना काम कर रही थी तो छापे रूकवाने की क्या आवश्यकता थी।सिंह ने छापों के समय को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गुरूवार को ही कहा कि सरकार ने सीबीआई को ऐसा करने का आदेश नहीं दिया था।बकौल जेटली, यदि सरकार ने छापे रूकवाये हैं तो यह सीबीआई के कार्य में हस्तक्षेप है। यदि सरकार वास्तव में हस्तक्षेप कर रही है तो वह इन आरोपों के लिए जवाबदेह है कि सीबीआई का दुरूपयोग किया जा रहा है।उन्होंने आगे कहा, सीबीआई यदि कानून के मुताबिक कार्य कर रही है तो सरकार को हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है। यदि प्रधानमंत्री के बयान को माना जाए तो यह सीबीआई द्वारा तलाशी की सामान्य घटना थी। सरकार को इसे रोकने का कोई अधिकार नहीं है।

विपक्ष ने सरकार की निन्दा करते हुए कहा कि वह राजनीतिक बैर निकाल रही है, क्योंकि छापे उस समय डाले गये, जब द्रमुक ने संप्रग सरकार से समर्थन वापस ले लिया।

भाजपा नेता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि ये छापे साबित करते हैं कि सरकार सीबीआई का दुरूपयोग करती है। सरकार सत्ता में बने रहने के लिए कुछ भी करने को तैयार है । उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को संसद में उठाएगी।

द्रमुक नेता एमके स्टालिन के यहां सीबीआई छापे को लेकर उपजे राजनीतिक विवाद के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है और वह इस घटना से खिन्न हैं। सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हम सभी इस घटनाक्रम से खिन्न हैं। सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। हम ब्यौरे का पता लगाएंगे। ऐसा नहीं होना चाहिए था। छापे का समय काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।द्रमुक ने दो दिन पहले ही संप्रग सरकार से समर्थन वापस लिया है। उसके मंत्रियों ने कल ही इस्तीफा दिया है। पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल और कमलनाथ सहित संप्रग में कांग्रेस के मंत्रियों ने सीबीआई छापों की निन्दा की है। केन्द्र सरकार ने इस कार्रवाई से खुद को अलग कर लिया है। उसका कहना है कि उसे इसकी जानकारी नहीं है। सीबीआई द्वारा छापे की कार्रवाई पूरी किये जाने की खबरों के बीच द्रमुक ने कहा कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है।  


देश की सरकार पर मंडरा रहे सबसे बड़े संकट के बीच उसके तीन मंत्रियों ने देश को भरोसा दिलाया है कि उसके पास बहुमत है यानी सरकार के बने रहने पर कोई खतरा नहीं है। उधर कल से लेकर अब तक के बीच समाजवादी पार्टी के स्टैंड में बड़ा बदलाव आया है। समाजवादी पार्टी ने अपना पैंतरा बदल दिया है और अब समर्थन पर वो गोलमोल जवाब दे रही है।

बेनी ने कहा था, कमीशन लेते रहो-समर्थन देते रहो मुलायम!

इस्पात मंत्री और कांग्रेस नेता बेनी प्रसाद वर्मा के बयान को लेकर संसद ठप है तो सरकार पर भी संकट का बादल छाए हुए हैं। वर्मा कह रहे हैं कि उन्होंने कोई विवादास्पद बयान नहीं दिया लेकिन गौंडा की सभा में 16 मार्च को उन्होंने जो कुछ कहा, उसे आप भी पढ़िएः-

'...कांग्रेस तुमको नहीं पूछने वाली है। समर्थन दे रहे हो इसलिए पैसा लेते रहो। खूब कमीशन खाओ...परिवार में लुटाओ...विदेश में जमा करो। बेनी प्रसाद वर्मा ये नहीं करेंगे। और अपराध और बेईमानी तो तुम्हारा पेशा है। सबसे बड़ा अभिशाप है इस प्रदेश के लिए मुलायम सिंह यादव। मायावती भी लुटेरी थीं लेकिन ये लुटेरा और गुंडा दोनों है। कैसे बचाओगे अपने प्रदेश को। आतंकवादियों से इसके रिश्ते हैं। बेनी प्रसाद वर्मा को मरवा डालोगे तो सौ बेनी प्रसाद पैदा होंगे। अभी तुम्हारा आखिरी कार्यकाल है। तुम क्या डराना चाहते हो। कांग्रेस तो पहाड़ थी उससे हम नहीं डरे, तो तुम तो अभी चुहिया हो'।



सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव बेनी प्रसाद वर्मा के इस्तीफे पर अड़े हैं। सरकार के लिए राहत की बात ये है कि मायावती कांग्रेस के साथ हैं।इस बीच एनसीपी ने संसद में श्रीलंकाई तमिलों को लेकर प्रस्ताव लाने का विरोध किया है। वहीं सरकार ने भरोसा दिया है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में संशोधन पर वो विचार कर रही है। इस मुद्दे पर सरकार और सहयोगियों के बीच बातचीत जारी है। सरकार ने प्रस्ताव कड़े करने का समर्थन किया है। आज शाम तक प्रस्ताव पर फैसला आ सकता है। वित्तमंत्री पी चिदंबरम के मुताबिक उनकी राजनीतिक पार्टियों से बातचीत जारी है और वो सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वित्तमंत्री चिदंबरम ने ये भी कहा है कि श्रीलंका को लेकर यूएन को देने वाले प्रस्ताव में सरकार संशोधन लाएगी।वहीं संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने विपक्ष के आरोप का जवाब देते हुए कहा है कि यूपीए सरकार को कोई खतरा नहीं है और न ही उनकी सरकार कमजोर है। हालांकि समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव के बयान पर जवाब देने के बदले कमलनाथ ने चुप्पी साध ली। आईबीएन7 से सुबह ही एक खास बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव ने कांग्रेस पर गठबंधन धर्म न निभाने के आरोप के साथ प्रधानमंत्री पर भी सवाल उठाए थे।इस बीच समाजवादी पार्टी ने संसद के दोनों सदनों में केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के विवादित बयान को लेकर जमकर हंगामा किया है। वर्मा ने मुलायम सिंह यादव पर आतंकियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया था। उधर मुलायम के पुत्र मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि सरकार को फिलहाल समर्थन जारी है लेकिन आखिरी फैसला मुलायम करेंगे। हालांकि उऩ्होंने ये भी कहा कि वो लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हैं।

द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि ने अपने पुत्र एमके स्टालिन के खिलाफ सीबीआई के छापों पर मच रहे हंगामे के बीच गुरुवार को इस बारे में सधी प्रतिक्रिया दी कि क्या केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध है। उन्होंने कहा कि वह केंद्रीय मंत्रियों के बयानों को समझ सकते हैं कि छापे संप्रग सरकार की जानकारी के बिना पड़े ।साथ ही, करुणानिधि ने एक अलग बयान में कहा कि संप्रग से समर्थन वापसी का फैसला गहन विचार विमर्श के बाद सर्वसम्मति से लिया गया जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। उन्होंने इन खबरों को खारिज किया कि स्टालिन ने फैसले पर जोर दिया था। द्रमुक के 88 वर्षीय नेता ने स्टालिन के खिलाफ सीबीआई छापों पर प्रतिक्रिया देते हुए यहां संवाददाताओं से कहा कि द्रमुक को प्राय: राजनीतिक प्रतिशोध के लिए निशाना बनाया जाता रहा है। यह इस तरह की कार्रवाइयों में से हो सकती है या फिर नहीं भी हो सकती है।उन्होंने हालांकि, संकेत दिया कि उनका मानना है कि कार्रवाई सरकार की जानकारी के बिना की गई जैसा कि केंद्रीय मंत्रियों ने दावा किया है। करुणानिधि ने एक सवाल के जवाब में कहा कि यदि केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि छापे (सरकार की) जानकारी के बिना पड़े तो मैं नहीं कह सकता कि मैं इस पर विश्वास नहीं कर सकता। छापों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए द्रमुक के कोषाध्यक्ष स्टालिन ने कहा कि यह कार्रवाई 'राजनीतिक प्रतिशोध' है क्योंकि यह पार्टी के संप्रग से हटने के दो दिन बाद हुई और वह कानूनी ढंग से मामले का सामना करने को तैयार हैं।

सीबीआई छापे भी विरधियों को ध्वस्त करान का अचूक रामवाण है। यह फिर एक दफा साबित हो गया।लग्जरी कार की आयात में हुई गड़बड़ी के एक मामले में आज सीबीआई ने करुणानिधि के बेटे एम के स्टालिन के घर पर छापेमारी की। इस मामले में स्टालिन आरोपी नहीं हैं। इस पूरे मामले में छापे के वक्त को लेकर सीबीआई की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।जैसे ही डीएमके प्रमुख करुणानिधि के बेटे एम के स्टालिन के घर पर सीबीआई छापे की खबर फैली। चेन्नई में उनके घर के बाहर समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। गुरुवार सुबह-सुबह सीबीआई चेन्नई जोन की एक टीम एम के स्टालिन के घर आ धमकी। सीबीआई की टीम ने बुधवार शाम को ही इस मामले में डीआरआई की शिकायत पर केस दर्ज किया था।हालांकि सीबीआई को डीआरआई से इस मामले की शिकायत इसी साल फरवरी में मिली थी। ऐसे में सीबीआई के छापे की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सीबीआई ऩे इस मुद्दे पर सफाई दी है। दरअसल सीबीआई स्टालिन के घर उस हमर गाड़ी की तलाश में गई थी जो कि स्टालिन के बेटे उदयनिधि के नाम है, लेकिन सीबीआई को वो गाड़ी नहीं मिली। ये गाड़ी 2007 में विदेश से मंगाई गई थी। उदयनिधि की ये गाड़ी भी डीआरआई की उसी शिकायत का हिस्सा थी जिसमें तमिलनाडु में आयात के बाद आई 33 लग्जरी गाड़ियों पर आयात नियमों के उल्लंधन का आरोप लगा था।

आरोप के मुताबिक आयात नियम के इस उल्लंघन की वजह से सरकार को 48 करोड़ का चूना लगा। सीबीआई ने इसी सिलसिले में चेन्नई और उसके आसपास के 18 जगहों पर छापेमारी कर 17 लग्जरी गाडि़यो को बरामद किया, इसमें लीमोजिन जैसी महंगी गाड़ियां भी शामिल हैं। सीबीआई ने इस मामले में लग्जरी कार के एक इंपोर्टर एलेक्स सी जोसेफ और एक वरिष्ठ डीआरआई अधिकारी मुरूगनन्दन को आरोपी बनाया है।

सीबीआई ने इनके खिलाफ आपराधिक साजिश,धोखाधड़ी, और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। दरअसल सीबीआई के छापे टाइमिंग को लेकर सवालों के घेरे में हैं। डीएमके नेता स्टालिन के घर पर सीबीआई छापा पड़ते ही सियासी बवाल खड़ा हो गया। हालत ये हुई कि खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सफाई देनी पड़ी। पीएम ने कहा कि सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है। लेकिन इन दावों को न स्टालिन मानने को तैयार हैं और न ही विपक्ष। हालांकि करुणानिधि के तेवर जरूर नरम पड़ गए हैं।

डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि के बेटे एम के स्टालिन के घर पर पड़े सीबीआई छापे का शोर फौरन दिल्ली आ पहुंचा। मामला तमिलनाडु का है, सो अपना मंत्रालय ना होते हुए भी वित्त मंत्री पी चिदंबरम सफाई के लिए आगे आए। उन्होंने सीबीआई के कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इन छापों के गलत मतलब निकाले जाएंगे। लेकिन स्टालिन पर चिदंबरम की सफाई का कोई असर नहीं हुआ। उऩ्होंने कहा कि वो इसका कानूनी जवाब देंगे। स्टालिन ने छापा मारने वाले अफसरों की गिरफ्तारी की मांग की।

हालांकि छापों के बाद डीएमके प्रमुख करुणानिधि के सुर नरम पड़ते दिखाई दिये। उन्होंने कहा कि उन्हें छापों की जानकारी ना होने के सरकार के बयान पर यकीन है। लेकिन इस पूरे विवाद ने विपक्ष को सरकार पर हमले का मौका दे दिया। विपक्ष ने सरकार पर सीबीआई के सियासी इस्तेमाल का आरोप लगाया। आय से अधिक संपत्ति मामले का मुकद्दमा झेल रही मायावती ने भी अपनी मिसाल देते हुए कहा कि सरकारें सीबीआई का इस्तेमाल करती हैं। बवाल इस कदर बढ़ा कि खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सफाई देनी पड़ी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम इन छापों से हैरान हैं। मुझे यकीन है कि सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है। ऐसा नहीं होना चाहिए था। हम इसका पता लगाएंगे। ऐसे वक्त पर छापे दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी नाराज़गी जताते हुए पीएमओ में राज्य मंत्री नारायणसामी से इस पर बात की। दरअसल इस पूरे विवाद की खास वजह ये है कि छापे डीएमके के यूपीए सरकार से समर्थन वापसी के दो दिन बाद पड़े हैं। एफआईआर में स्टालिन का नाम ना होने के बावजूद सीबीआई उनके घर पहुंची।