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Friday, 28 February 2014

Of Caste Massacre and Judicial Impunity: Bloodstains in Bathani Tola and Laxmanpur

Of Caste Massacre and Judicial Impunity: Bloodstains in Bathani Tola and
Laxmanpur Bathe

Anand Teltumbde

Naveen Babu Memorial Lecture 2014

At the outset let me thank DSU for giving me this opportunity to pay my
homage to comrade Yalavarthi Naveen Babu, who was martyred at the young age
of 35 in Andhra Pradesh. I

personally knew Naveen as a young man bubbling with revolutionary zeal and
energy as an

editor of Kalam, the organ of the AIRSF formed in 1990 and an organizer of
the International

Seminar on Nationality Struggles in Delhi in February 1996, which I
attended. The last I met with him was in Chennai just a few months before
his martyrdom. I complement DSU for

instituting this memorial lecture, which would help young students in JNU
to see how one of their own had lived and died for the cause of Indian
revolution.

If Naveen had been living today, he would have been in forefront in
protesting a

जाति का उन्मूल��: कल, आज और कल

जाति का उन्मूलन: कल, आज और कल<http://www.junputh.com/2014/02/blog-post_14.html>
<https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg0IZ0R5UlQfdf83L4dmmhyiLlZ4t4tOIeswjclud-sPuI8m12Sd6n3eqg3qv3r1elJNSUpljnm_6oZ_OXx84UOg7Sdxt1XPvBtdXtv0oyJVc6WQcb8eEiiR6tulQkh7FV3R2sx2MXrwxKp/s1600/Anand-Teltumbde.jpg>*आनंद
तेलतुम्‍बड़े *

*आनंद तेलतुम्बड़े हमारे समय के सबसे महत्‍वपूर्ण चिंतकों में एक हैं। पिछले
दिनों उनके कहे-लिखे पर काफी विवाद खड़ा किया गया है। प्रस्‍तुत लेख उन्‍होंने
''समयांतर'' के लिए लिखा था जिसका अनुवाद अभिषेक श्रीवास्‍तव ने किया है। यह
समयांतर के फरवरी अंक में प्रक

ममता को मोदी का विकल्प बनाने क�� तैयारियों पर जोरों से जुटे अन���न

[image: ममता को मोदी का विकल्प बनाने की तैयारियों पर जोरों से जुटे अन्ना]
ममता को मोदी का विकल्प बनाने की तैयारियों पर जोरों से जुटे अन्ना
[image: HASTAKSHEP]

कोलकाता/ नई दिल्ली। तीसरे मोर्चे की कवायद से अलग-थलग पड़ गयी बंगाल की
मुख्यमंत्री *ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश
करने के लिये गांधीवादी नेता अन्ना हजारे पूरी ताकत के साथ जुट गये हैं।*हाला

परिवार वाद ही आ���े चलकर जातिवाद में विकसित होत��� है,बहस तलब- जाति उन्मूलन को बु���ियादी एजेण्डा बना

[image: परिवार वाद ही आगे चलकर जातिवाद में विकसित होता है]
परिवार वाद ही आगे चलकर जातिवाद में विकसित होता है
*बहस तलब- जाति उन्मूलन को बुनियादी एजेण्डा बनाये बगैर हम न वर्ग जाति
वर्चस्व टल्ली लगाकर तोड़ सकते हैं और न पूँजी निर्देशित राज्यतन्त्र को बदलने
की कोई पहल कर सकते हैं*
*यदि देश के सारे गरीब एक हो गये तो ?*

पलाश विश्वास


बहस की शुरुआत करें, इससे पहले एक सूचना

इन चीखों का जवा��� चाहिए हमें

[image: इन चीखों का जवाब चाहिए हमें]
इन चीखों का जवाब चाहिए हमें

*क्रान्ति का स्वर हाशिये पर है, भ्रांतियाँ वर्चस्व को मजबूती दे रही हैं*

*पलाश विश्वास*

उत्तराखण्ड स‌े अबकी स‌ुधा राजे ने आवाज दी है, जो बहस तलब है

*जब गली में चीखती आवाज़ें गूँजी तुम नहीं उठे।*

*जब घर में सिसकने की आवाजें गूँजी तुम नहीं उठे।।*

*जब खुद तुम्हारे हृदय में चीखने के स्वर गूँजे तब भी तुम न

अमरकांत जी के अ���सान के बहाने ब��ी हुई पृथ्वी की शोकगाथ

अमरकांत जी के अवसान के बहाने बची हुई पृथ्वी की शोकगाथा

पलाश विश्वास

<https://www.facebook.com/alokputul>

पृथ्वी अगर मुक्त बाजार संस्कृति से कहीं बची है तो इलाहाबाद में।पिछले दिनों
हमारे फिल्मकार मित्र राजीव कुमार ने ऐसा कहा था। दूसरे फिल्मकार मित्र और
उससे ज्यादा हमारे भाई संजय जोशी से जब उनकी पुश्तैनी सोमेश्वर घाटी पर फिल्म
बनाने की बात कही हमने तो दिल्ली में बस गये संजू ने

अमरकांत जी के अ���सान के बहाने ब��ी हुई पृथ्वी की शोकगाथ

अमरकांत जी के अवसान के बहाने बची हुई पृथ्वी की शोकगाथा
पलाश विश्वासएक जरुरी नोटः आज स‌ुबह पुराने मित्र उर्मिलेश के फोन स‌े नींद खुली।मुझे स‌्मृतिभ्रंश की वजह स‌े इस आलेख में तथ्यात्मक गलतियों की आशंका ज्यादा थीं।
आज स‌ुबह दुबारा इसके टुकड़े मोबाइल पाठकों के लिए फेसबुक पर दर्ज कराते हुए छिटपुट गलतियां नजर भी आयीं। यथासंभव दुरुस्त करके यह आलेख कुछ देर