सर्वस्वहारा तबके के वर्गहितों के मुताबिक कोई राजकरण का कहीं कोई वजूद ही
नहीं है।जाहिर है कि अंबेडकरी झंडेवरदार अपने वर्गहितों के खिलाफ स्थाई
बंदोबस्त के तहत जमीदारों के कारिंदे और लठैत ही बन सकते हैं,नेता नहीं।
पलाश विश्वास
सच लेकिन यही है।
सर्वस्वहारा तबके के वर्गहितों के मुताबिक कोई राजकरण का कहीं कोई वजूद ही
नहीं है।जाहिर है कि अंबेडकरी झंडेवरदार अ
Tuesday, 25 March 2014
हर दल से कार्यक���्ता टूटकर भाजपा में शामिल होन��� लगे, कांग्रेस�� वोट बैंक भी भा��पा के हिस्से मे
हर दल से कार्यकर्ता टूटकर भाजपा में शामिल होने लगे, कांग्रेसी वोट बैंक भी
भाजपा के हिस्से में
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
सारे देश में जैसे लोग टूटकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं,वैसा बंगाल में भी हो
रहा है।फर्क यह है कि सांसद विधायक या बड़े नेता बंगाल में दूसरे दलों से
भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं।कोई बड़ा धमाका नहीं होने के कारण खबर भी
नहीं बन रही ह
भाजपा के हिस्से में
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
सारे देश में जैसे लोग टूटकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं,वैसा बंगाल में भी हो
रहा है।फर्क यह है कि सांसद विधायक या बड़े नेता बंगाल में दूसरे दलों से
भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं।कोई बड़ा धमाका नहीं होने के कारण खबर भी
नहीं बन रही ह
Monday, 24 March 2014
अकेले जूझते पत��रकारों की सुरक���षा का क्या इंत��ाम किया है चुनाव आयोग ने
अकेले जूझते पत्रकारों की सुरक्षा का क्या इंतजाम किया है चुनाव आयोग ने?
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
पत्रकारिता में खतरा अब पेड न्यूज के जमाने में सबसे ज्यादा है। जो पेड हैं,
उन्हें खबरों के लिए ज्यादा जोखिम उठानी होती नहीं है क्योंकि खबरे उनके प्लेट
में यूं ही सज जाती हैं कि जैसे वे पाठकों के लिए परोसने खातिर पेड किये
जाते हैं।असली अग्निपरीक्षा तो प
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
पत्रकारिता में खतरा अब पेड न्यूज के जमाने में सबसे ज्यादा है। जो पेड हैं,
उन्हें खबरों के लिए ज्यादा जोखिम उठानी होती नहीं है क्योंकि खबरे उनके प्लेट
में यूं ही सज जाती हैं कि जैसे वे पाठकों के लिए परोसने खातिर पेड किये
जाते हैं।असली अग्निपरीक्षा तो प
बहुजनों सावधान!भाजपा-कांग्रे�� में नहीं है बु��ियादी फर्
बहुजनों सावधान!भाजपा-कांग्रेस में नहीं है
बुनियादी फर्क
एच एल दुसाध
सोलहवीं लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है.पार्टियां प्रार्थी चयन और गठबंधन
की तैयारियों में जुट चुकी हैं.राजनीतिक विश्लेषक भी अगली सरकार की सम्भावना
तलाशने में जुट गए हैं.अब तक सामने आये तमाम पूर्वानुमान ही भाजपा को अगली
सत्ता का प्रमुख दावेदार बता रहे हैं.इससे उत्साहित भाजपा एक बार फि
बुनियादी फर्क
एच एल दुसाध
सोलहवीं लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है.पार्टियां प्रार्थी चयन और गठबंधन
की तैयारियों में जुट चुकी हैं.राजनीतिक विश्लेषक भी अगली सरकार की सम्भावना
तलाशने में जुट गए हैं.अब तक सामने आये तमाम पूर्वानुमान ही भाजपा को अगली
सत्ता का प्रमुख दावेदार बता रहे हैं.इससे उत्साहित भाजपा एक बार फि
उठो,जमीन से निक���ने का वक्त है य���
उठो,जमीन से निकलने का वक्त है यह
पलाश विश्वास
उठो,जमीन से निकलने का वक्त है यह।
पंतजलि के विज्ञापनी बहारमध्ये योग गुरु बाबा रामदेव प्रकट होकर अभयदान दे रहे
हैं टीवी न्यूज में,इलेक्शन से पहले जनता ने सिलेक्शन कर लिया है।बाबा सच कह
रहे होंगे।लेकिन योगगुरु के अनेक रंग बिरंगे अवतार मीडिया में सोशल मीडिया में
फर्जी मोदी सुनामी रचने के खेल में रमे हुए हैं।बंगा
पलाश विश्वास
उठो,जमीन से निकलने का वक्त है यह।
पंतजलि के विज्ञापनी बहारमध्ये योग गुरु बाबा रामदेव प्रकट होकर अभयदान दे रहे
हैं टीवी न्यूज में,इलेक्शन से पहले जनता ने सिलेक्शन कर लिया है।बाबा सच कह
रहे होंगे।लेकिन योगगुरु के अनेक रंग बिरंगे अवतार मीडिया में सोशल मीडिया में
फर्जी मोदी सुनामी रचने के खेल में रमे हुए हैं।बंगा
Thursday, 20 March 2014
Symptoms of Fascism ISP IV March 2014
*Symptoms of Fascism*
*Ram Puniyani*
Fascism, a phenomenon which emerged in Europe in Post First World War
period has haunted the humanity since then. Its brutality, its crushing of
democratic norms, its targeting of minorities, its megalomaniac projection
of power of the nation, its ultra nationalism, projection of its leader as
a 'strong' leader, the charisma built around such a leader are etched on
the memory of human race as a lesson as to what should not happen anywhere
in the world again. Since then two words, Fascism and Hitler have also
become part of the popular vocabulary, expressing the nature of the
dictatorial regime and a tyrannical dictator. At the same time these words
many times get diluted and used in a loose sense for any dictatorial
regime, any authoritarian leader or person. The socio political
characteristics of the political phenomenon are very specific and one has
to keep them in mind
*Ram Puniyani*
Fascism, a phenomenon which emerged in Europe in Post First World War
period has haunted the humanity since then. Its brutality, its crushing of
democratic norms, its targeting of minorities, its megalomaniac projection
of power of the nation, its ultra nationalism, projection of its leader as
a 'strong' leader, the charisma built around such a leader are etched on
the memory of human race as a lesson as to what should not happen anywhere
in the world again. Since then two words, Fascism and Hitler have also
become part of the popular vocabulary, expressing the nature of the
dictatorial regime and a tyrannical dictator. At the same time these words
many times get diluted and used in a loose sense for any dictatorial
regime, any authoritarian leader or person. The socio political
characteristics of the political phenomenon are very specific and one has
to keep them in mind
Tuesday, 18 March 2014
कामरेड करात का ���या फतवा सोशल म��डिया में अपनी राय दर्ज कराना अ���ुशासन भंग में ��ामिल! ফেসবুক, ট��যু
कामरेड करात का नया फतवा सोशल मीडिया में अपनी राय दर्ज कराना अनुशासन भंग में
शामिल!
ফেসবুক, ট্যুইটারের মতো সোস্যাল নেটওয়ার্কিং ও ব্লগিং সাইটে পার্টির নীতি
বিষয়ক ইস্যুতে ক্যাডাররা নিজেদের মতামত জানান, লেখালেখি করুন, তা বিলকুল
না-পসন্দ প্রকাশ কারাটের।
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
प्रकाश कारत को शायद अब यह समझ में नहीं रहा है कि जनसंवाद के जरिये पार
शामिल!
ফেসবুক, ট্যুইটারের মতো সোস্যাল নেটওয়ার্কিং ও ব্লগিং সাইটে পার্টির নীতি
বিষয়ক ইস্যুতে ক্যাডাররা নিজেদের মতামত জানান, লেখালেখি করুন, তা বিলকুল
না-পসন্দ প্রকাশ কারাটের।
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
प्रकाश कारत को शायद अब यह समझ में नहीं रहा है कि जनसंवाद के जरिये पार
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