| Thursday, 10 May 2012 19:04 |
राज्यसभा में पेश करने से पहले लोकपाल विधेयक पर आम सहमति बनाने के इरादे से सरकार ने आज विपक्ष और अन्य पार्टियों से विचार विमर्श किया ताकि मतभेद दूर हो सकें और विधेयक आसानी से पारित हो सके। केन्रदीय मंत्री कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, पवन कुमार बंसल और वी नारायणसामी ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली से संसद परिसर में मुलाकात कर विधेयक पर चर्चा की। केन्रदीय मंत्रियों के माकपा नेता सीताराम येचुरी और अन्य दलों के नेताओं से भी मुलाकात कर उनकी राय जानने की उम्मीद है।भाजपा दो मुद्दों पर अडी हुई है। उसका कहना है कि लोकपाल की नियुक्ति और उसे हटाने की प्रक्रिया अधिक लोकतांत्रिक होनी चाहिए और सीबीआई को सरकारी नियंत्रण से बाहर रखा जाना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि सरकार शायद इस बात को मान लेगी कि राज्य लोकायुक्त को लोकपाल विधेयक के दायरे से बाहर रखा जाए और संसद एक माडल कानून पारित करेगी जो राज्यों को अपने लोकायुक्त खुद बनाने का अधिकार देगा। विपक्ष के शासन वाले राज्य और पश्चिम बंगाल विधेयक में लोकायुक्त के प्रावधान के खिलाफ हैं। तृणमूल कांग्रेस संप्रग का प्रमुख घटक दल है और पश्चिम बंगाल में सत्ता में है। लोकपाल की नियुक्ति और उसे हटाने तथा सीबीआई को सरकार के नियंत्रण से बाहर रखने के अलावा वाम दल चाहते हैं कि विदेश से वित्तपोषण पा रहे गैर सरकारी संगठनों को लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा, '' हम विधेयक को राज्यसभा में तभी पेश करना चाहेंगे, जब आम सहमति होगी। यदि विधेयक पेश होता है और उसके बाद सदन में आम सहमति की कोशिश होती है तो इससे कुछ दिक्कतें पेश आ सकती हैं। '' राज्यों में लोकायुक्त नियुक्त किये जाने के बारे में अन्ना हजारे की मांग पर खुर्शीद ने कहा कि दिल्ली में हजारे के समर्थक सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह लोकायुक्त को लोकपाल विधेयक के दायरे से बाहर करना चाहती है। विधेयक को लेकर मतभेद दूर करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 23 मार्च को सर्वदलीय बैठक की थी लेकिन बैठक में आम सहमति नहीं बन पायी। विधेयक को पिछले साल शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में पारित नहीं किया जा सका था। लोकसभा उसी सत्र में उसे पारित कर चुकी थी। |
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